शहर में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के बीच प्रस्तावित भूमिगत रूट को लेकर तिलक नगर, गोयल नगर, साईंनाथ कॉलोनी और आसपास के रहवासियों की आपत्तियां जारी हैं। बुधवार को तिलक नगर में रहवासियों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों को प्रस्तावित रूट की जानकारी दी और उनकी आपत्तियां व सुझाव दर्ज किए। रहवासियों का कहना है कि उनका विरोध मेट्रो परियोजना से नहीं, बल्कि आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे से प्रस्तावित सुरंग के विकल्प को लेकर है। रहवासियों ने मांग की है कि घनी बस्तियों, पुराने मकानों और बड़ी संख्या में बोरिंग वाले क्षेत्रों के नीचे से सुरंग निकालने के अलावा अन्य संभावित रूट का भी तकनीकी अध्ययन कराया जाए। उनका कहना है कि परियोजना जरूरी है, लेकिन निर्माण के दौरान स्थानीय परिस्थितियों और सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। कई लोगों को रूट की जानकारी नहीं थी हस्ताक्षर अभियान के दौरान रहवासियों ने बताया कि इलाके के कई लोगों को प्रस्तावित भूमिगत रूट की पूरी जानकारी नहीं थी। अभियान के जरिए उन्हें रूट और संभावित प्रभावों के बारे में बताया गया। इसके बाद लोगों से उनकी राय और सुझाव लिए गए। रहवासियों के मुताबिक अभियान का उद्देश्य परियोजना रोकना नहीं, बल्कि प्रभावित क्षेत्र के लोगों की बात मेट्रो प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाना है। भूजल और बोरिंग को लेकर सवाल तिलक नगर और आसपास के इलाकों में कई परिवार घरेलू जरूरतों के लिए बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं। रहवासियों को आशंका है कि टनल बोरिंग मशीन से होने वाले भूमिगत निर्माण का स्थानीय जलस्रोतों और बोरिंग पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में बोरिंग प्रभावित हुए तो भविष्य में जलसंकट की स्थिति बन सकती है। पुराने मकानों की सुरक्षा भी चिंता क्षेत्र में कई मकान 50 से 60 वर्ष पुराने बताए जा रहे हैं। रहवासियों का सवाल है कि भूमिगत निर्माण के दौरान जमीन में होने वाले बदलाव का पुराने भवनों की नींव पर क्या असर पड़ेगा। रहवासी अंकित दुबे ने कहा कि लोगों को मकानों में दरार या अन्य संरचनात्मक नुकसान की आशंका है। उनका सुझाव है कि निर्माण से पहले पुराने मकानों का संरचनात्मक आकलन कराया जाए, ताकि नुकसान की स्थिति में सुरक्षा और जिम्मेदारी स्पष्ट रहे। जुलाई से शुरू हुआ विरोध, अब कई इलाके जुड़े

