चित्रकूट के कालूपुर पाही गांव में खैरापति देवी मंदिर की जमीन की दोबारा पैमाइश की मांग की गई है। ग्रामीणों ने बुधवार को दोपहर 1:00 बजे जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि 22 सितंबर को राजस्व टीम ने मौके पर सरकारी नक्शे और फिक्स पॉइंट के आधार पर तकनीकी नापजोख नहीं की। ग्रामीणों ने शिकायत में बताया कि मंदिर के नाम दर्ज गाटा संख्या 495 और खाता संख्या 0043 की जमीन के सीमांकन के लिए पहले समाधान दिवस में आवेदन दिया गया था। इसके बाद 22 सितंबर को राजस्व टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि टीम ने आधुनिक उपकरणों या सरकारी नक्शे से नापजोख करने के बजाय मौखिक रूप से बताया कि सड़क के बीच से 75 फीट तक की जमीन सड़क में चली गई है। टीम ने इसके पीछे की खाली जमीन को मंदिर की भूमि नहीं माना। ग्रामीणों का कहना है कि जब मौके पर ठीक से पैमाइश नहीं हुई, तो जमीन के सड़क में शामिल होने का आधार साफ नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना लिखित रिपोर्ट और सीमांकन के मौखिक जानकारी देने से विवाद बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने यह आशंका भी जताई कि मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा या प्लॉटिंग की कोशिश हो सकती है। शिकायत में कहा गया है कि मंदिर की जमीन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सार्वजनिक महत्व की भी है। इसलिए पूरे मामले में निष्पक्ष तरीके से सीमांकन कराना जरूरी है। ग्रामीणों ने DM से मांग की है कि मौजूदा राजस्व टीम की मौखिक रिपोर्ट को आधार न माना जाए। उन्होंने किसी वरिष्ठ अधिकारी की देखरेख में एक विशेष तकनीकी राजस्व टीम बनाने की मांग की। ग्रामीणों ने सरकारी शजरे और फिक्स पॉइंट के आधार पर गाटा संख्या 495 की दोबारा पैमाइश कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर पुलिस की मौजूदगी में सीमांकन कराकर जमीन को सुरक्षित किया जाए। ज्ञापन देने वालों में रामसेवक राम, अरुण कुमार, अभिलाष यादव, मनोज कुमार, राकेश राजपूत, सिद्धगोपाल समेत कई ग्रामीण शामिल थे।

