Radhika Madan On Statement: एक्ट्रेस राधिका मदान ने हाल ही में अपने इमोशनल सफर और मुश्किल वक्त से निपटने के तरीके पर फिल्मीज्ञान को दिए इंटरव्यू में खुलकर बात की है, जिसमें उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब वह अपने दुख और परेशानियों का सामना करने के बजाय उनसे भागने की कोशिश करती थीं। हालांकि, धीरे-धीरे उन्होंने अपनी भावनाओं को स्वीकार करना और उन्हें खुलकर महसूस करना सीखा।
राधिका ने बताया कि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ किसी चीज को छोड़ देना ही काफी नहीं है, बल्कि उस दर्द को महसूस करना और उसे स्वीकार करना भी जरूरी है। उनके मुताबिक, ग्रीव करना यानी दुख को महसूस करना भी जरूरी है, तभी इंसान वास्तव में उससे आगे बढ़ पाता है।
‘मैं भागती रहती थी’
राधिका ने अपने पुराने रवैये के बारे में बात करते हुए कहा कि वह ऐसी शख्स थीं जो मुश्किल भावनाओं को एड्रेस करने से बचती थीं। जब भी कुछ परेशान करने वाला होता, वह खुद को यह समझाने की कोशिश करतीं कि सब ठीक है।
उन्होंने कहा, “मैं एक ऐसी इंसान थी जो भागती रहती थी। मुझे लगता था- क्या हो गया? ये तो अच्छा है, वो तो अच्छा है। मैं उसे कभी एड्रेस ही नहीं करती थी।” राधिका के मुताबिक, ऐसा करते-करते भावनाएं धीरे-धीरे उनके अंदर जमा होती रहती थीं। वह उन चीजों को उस वक्त महसूस नहीं करती थीं, लेकिन उनका असर अंदर बना रहता था।
पार्टनर ने समझाया- दर्द को एड्रेस करना जरूरी है
राधिका ने आगे ये भी बताया कि उनके पार्टनर ने उन्हें अपनी भावनाओं का सामना करने और उनके बारे में बात करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि उनका पार्टनर उनकी बात सुनने के लिए मौजूद रहता था, जबकि वह कई बार उसे दूर जाने के लिए कह देती थीं।
धीरे-धीरे दोनों के बीच एक ऐसी बॉन्डिंग बनी, जहां राधिका अपनी भावनाओं के बारे में खुलकर बात कर सकीं। उन्होंने बताया कि वहां उन्होंने समझा कि किसी परेशानी को दबाने के बजाय उसके बारे में बात करना, उसे रिलीज करना और फिर आगे बढ़ना जरूरी है।
‘ग्रीव करना भी बहुत जरूरी है’
राधिका ने यह भी कहा कि किसी दर्द या मुश्किल अनुभव से आगे बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि उसे नजरअंदाज कर दिया जाए। उनके मुताबिक, पहले उस भावना को स्वीकार करना और उसे महसूस करना जरूरी है। उन्होंने कहा, “आपको उसे जाने देना है और आगे बढ़ना है, लेकिन ग्रीव करना भी बहुत जरूरी है।” राधिका की बात का सार यही है कि मुश्किल भावनाओं से लगातार बचने के बजाय उन्हें स्वीकार करना, उनके बारे में बात करना और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ना जरूरी है।


