बिहार के सीएम सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक होगी। इस दौरान अलग-अलग विभागों की ओर से तैयार किए गए एक दर्जन से अधिक प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय लिए जाने की संभावना है। खास तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक निवेश, रोजगार, भवन निर्माण और विभिन्न विकास परियोजनाओं से जुड़े प्रस्तावों पर सरकार की नजर रहेगी। औद्योगिक निवेश और रोजगार बढ़ाने पर जोर कैबिनेट बैठक में राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और निवेश का माहौल बेहतर बनाने से जुड़े प्रस्तावों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। सरकार की प्राथमिकताओं में राज्य में नए उद्योगों को आकर्षित करना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना शामिल है। हाल के दिनों में सरकार की ओर से विकास और निवेश से जुड़ी परियोजनाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है। ऐसे में कैबिनेट बैठक में भी उन नीतिगत फैसलों पर जोर रहने की उम्मीद है, जिनसे औद्योगिक परियोजनाओं को गति मिल सके और रोजगार के नए अवसर पैदा हो। बिहार भवन उपविधि-2026 पर भी नजर बैठक में ‘बिहार भवन उपविधि-2026’ यानी Building Bye-Laws के नए नियमों को मंजूरी मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। नए प्रावधान लागू होने के बाद भवन निर्माण से जुड़े नियमों में बदलाव हो सकता है। मकान और व्यावसायिक भवनों का नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की दिशा में भी सरकार कदम उठा सकती है। इससे शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण से संबंधित प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सड़क, स्वास्थ्य और जल संसाधन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा कैबिनेट की बैठक में पथ निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और जल संसाधन विभाग से जुड़े कई प्रस्ताव भी रखे जाने की संभावना है। इनमें चल रही योजनाओं के लिए अतिरिक्त या संशोधित बजट उपलब्ध कराने से संबंधित प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं। सरकार का जोर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर करने, स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और जल संसाधन से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी रहने की उम्मीद है। लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी मंजूरियां दी जा सकती हैं। विकास योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश पिछले दिनों मुख्यमंत्री स्तर पर विभिन्न विभागों की विकास परियोजनाओं की समीक्षा की गई थी। खासकर बड़ी लागत वाली परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में कैबिनेट के फैसलों का असर राज्य में चल रही कई विकास योजनाओं की गति पर पड़ सकता है। सरकार चालू वित्तीय वर्ष के बचे हुए समय में विकास योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए विभागों को आवश्यक बजट, प्रशासनिक स्वीकृति और नीतिगत मंजूरी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 17 एजेंडों पर लगी थी मुहर इससे पहले 15 सितंबर को सम्राट कैबिनेट की बैठक हुई थी। जिसमें कुल 17 एजेंडों पर मुहर लगी थी। बिहार के 5 मेडिकल कॉलेजों में 366 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की घोषणा की गई थी। ये नियुक्तियां संविदा पर की जाएंगी। इसके अलावा बिहार के राजकीय डेंटल कॉलेज में खाली पड़े प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, रीडर, व्याख्याता और सहायक प्राध्यापक के पदों पर भी बहाली होगी। बिहार के सीएम सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक होगी। इस दौरान अलग-अलग विभागों की ओर से तैयार किए गए एक दर्जन से अधिक प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय लिए जाने की संभावना है। खास तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक निवेश, रोजगार, भवन निर्माण और विभिन्न विकास परियोजनाओं से जुड़े प्रस्तावों पर सरकार की नजर रहेगी। औद्योगिक निवेश और रोजगार बढ़ाने पर जोर कैबिनेट बैठक में राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और निवेश का माहौल बेहतर बनाने से जुड़े प्रस्तावों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। सरकार की प्राथमिकताओं में राज्य में नए उद्योगों को आकर्षित करना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना शामिल है। हाल के दिनों में सरकार की ओर से विकास और निवेश से जुड़ी परियोजनाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है। ऐसे में कैबिनेट बैठक में भी उन नीतिगत फैसलों पर जोर रहने की उम्मीद है, जिनसे औद्योगिक परियोजनाओं को गति मिल सके और रोजगार के नए अवसर पैदा हो। बिहार भवन उपविधि-2026 पर भी नजर बैठक में ‘बिहार भवन उपविधि-2026’ यानी Building Bye-Laws के नए नियमों को मंजूरी मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। नए प्रावधान लागू होने के बाद भवन निर्माण से जुड़े नियमों में बदलाव हो सकता है। मकान और व्यावसायिक भवनों का नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की दिशा में भी सरकार कदम उठा सकती है। इससे शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण से संबंधित प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सड़क, स्वास्थ्य और जल संसाधन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा कैबिनेट की बैठक में पथ निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और जल संसाधन विभाग से जुड़े कई प्रस्ताव भी रखे जाने की संभावना है। इनमें चल रही योजनाओं के लिए अतिरिक्त या संशोधित बजट उपलब्ध कराने से संबंधित प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं। सरकार का जोर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर करने, स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और जल संसाधन से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी रहने की उम्मीद है। लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी मंजूरियां दी जा सकती हैं। विकास योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश पिछले दिनों मुख्यमंत्री स्तर पर विभिन्न विभागों की विकास परियोजनाओं की समीक्षा की गई थी। खासकर बड़ी लागत वाली परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में कैबिनेट के फैसलों का असर राज्य में चल रही कई विकास योजनाओं की गति पर पड़ सकता है। सरकार चालू वित्तीय वर्ष के बचे हुए समय में विकास योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए विभागों को आवश्यक बजट, प्रशासनिक स्वीकृति और नीतिगत मंजूरी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 17 एजेंडों पर लगी थी मुहर इससे पहले 15 सितंबर को सम्राट कैबिनेट की बैठक हुई थी। जिसमें कुल 17 एजेंडों पर मुहर लगी थी। बिहार के 5 मेडिकल कॉलेजों में 366 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की घोषणा की गई थी। ये नियुक्तियां संविदा पर की जाएंगी। इसके अलावा बिहार के राजकीय डेंटल कॉलेज में खाली पड़े प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, रीडर, व्याख्याता और सहायक प्राध्यापक के पदों पर भी बहाली होगी।

