Jaishankar Global South Meeting: वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत ने विकासशील देशों की चिंताओं को एक साझा एजेंडे के रूप में सामने रखा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ग्लोबल साउथ के देशों से ऐसी व्यवस्था के लिए आवाज उठाने को कहा, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, खाद्य आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और तकनीक तक पहुंच किसी दबाव का माध्यम न बने। उनका जोर इस बात पर रहा कि विकासशील देशों की भूमिका केवल बाजार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वैश्विक फैसलों में भी उनकी भागीदारी बढ़नी चाहिए।
ग्लोबल साउथ के सामने रखे सात बड़े मुद्दे
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ग्लोबल साउथ के देशों के लिए सात अहम प्राथमिकताएं सामने रखी हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया की आर्थिक व्यवस्था ऐसी नहीं होनी चाहिए, जहां कुछ देशों के नियंत्रण वाले रास्ते सप्लाई, वित्त या कनेक्टिविटी को प्रभावित कर सकें। उनका संदेश साफ था कि महत्वपूर्ण आर्थिक नेटवर्क को राजनीतिक दबाव का साधन बनने से रोकना जरूरी है।
जयशंकर ने ऊर्जा सुरक्षा को विकास की बुनियादी जरूरत बताया। उनके मुताबिक ऊर्जा की उपलब्धता और कीमतों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। विकासशील देशों के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऊर्जा कीमतों में तेज बदलाव का सीधा असर परिवहन, उद्योग और आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
उन्होंने खाद्य सुरक्षा को भी साझा वैश्विक जिम्मेदारी से जोड़ा। खास तौर पर अनाज और उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत बताई। युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंधों के बीच कृषि आपूर्ति प्रभावित होने से कई विकासशील देशों के सामने खाद्य महंगाई और उत्पादन लागत जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
विदेश मंत्री ने व्यापार व्यवस्था में संतुलन की मांग करते हुए कहा कि नियम ऐसे होने चाहिए जो देशों की उत्पादन क्षमता बढ़ाएं। विकासशील देशों को केवल तैयार माल के उपभोक्ता बाजार में बदलना उचित नहीं है। उन्होंने औद्योगिकीकरण के अधिकार को विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
समुद्री सुरक्षा भी उनके एजेंडे में प्रमुख रही। अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के साथ समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने और नाविकों तथा वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। लाल सागर जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में व्यवधान ने वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं की समुद्री निर्भरता को और स्पष्ट किया है।
जयशंकर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी चेताया कि नई तकनीकी क्रांति कहीं देशों के बीच नई खाई न पैदा कर दे। इसके साथ उन्होंने वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की अधिक प्रभावी भागीदारी की आवश्यकता बताई।

