बिहार में बाढ़, कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भागलपुर परिषदन के सभा कक्ष में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सुरेश पासवान ने राज्य सरकार पर कई मोर्चों पर हमला बोला। उन्होंने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए और उसे ‘संवेदनहीन’ बताया। पासवान ने दावा किया कि अगर सरकार के बहुमत पर सवाल उठा तो वह अगले ही दिन गिर सकती है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर आज बहुमत का सवाल उठता है तो सरकार कल ही गिर जाएगी। हालांकि, यह उनका राजनीतिक दावा है और इसे सरकार के वास्तविक बहुमत का सबूत नहीं माना जा सकता है। पूर्व मंत्री ने बिहार में जारी बाढ़ की स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से परेशान हैं। कई इलाकों में लोगों को भोजन, सुरक्षित आश्रय और जरूरी राहत सामग्री चाहिए। पूर्व मंत्री बोले- हेलिकॉप्टर से राहत सामग्री बाढ़ वाले इलाकों में पहुंचाई जा सकती थी सुरेश पासवान ने आरोप लगाया कि संकट की इस घड़ी में सरकार को तेजी से राहत अभियान चलाना चाहिए था। जरूरतमंद इलाकों में हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री पहुंचाई जा सकती थी, लेकिन सरकार की ओर से जरूरी तेजी नहीं दिखाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि “यह सरकार सिर्फ फोटो खिंचवाने वाली सरकार बनकर रह गई है।” उनका कहना था कि बाढ़ प्रभावित लोगों की असली परेशानियों को हल करने के बजाय सरकारी स्तर पर दौरे और तस्वीरों को ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। तंज कसते हुए कहा- बिहार में ट्रिपल इंजन की सरकार बाढ़ राहत को लेकर पूर्व मंत्री ने सरकार के राजनीतिक ढांचे पर भी हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिहार में ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार है—नगर में सत्ता पक्ष, बिहार में सत्ता पक्ष और केंद्र में भी उसी गठबंधन की सरकार है। इसके बावजूद बाढ़ पीड़ितों को राहत के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब प्राकृतिक आपदा आती है तो सरकार की पहली प्राथमिकता राजनीति नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाना और उन्हें भोजन, दवा, सुरक्षित स्थान तथा जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना होनी चाहिए। उत्तर बिहार में बाढ़, मगध में सुखाड़ का संकट सुरेश पासवान ने बिहार की दोहरी प्राकृतिक आपदा का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक उत्तर बिहार के कई इलाके बाढ़ से जूझ रहे हैं, जबकि दक्षिण बिहार और खासकर मगध क्षेत्र में बारिश की कमी से किसान परेशान हैं। उन्होंने दावा किया कि मगध क्षेत्र में धान की रोपनी बेहद कम हुई है। ऐसे में सरकार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के साथ-साथ सुखाड़ प्रभावित किसानों के लिए भी तत्काल राहत पैकेज और प्रभावी सहायता व्यवस्था पर काम करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भागलपुर, पीरपैंती, नाथनगर और राघोपुर जैसे बाढ़ प्रभावित इलाकों की तत्काल सुध लेने के बजाय सरकार के नेता दूसरे राजनीतिक मुद्दों में उलझे हुए हैं। इसी पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह “हंसुआ के बियाह में खुरपी का गीत” जैसा है। भागलपुर में 111 से अधिक गांव प्रभावित होने का दावा प्रेस वार्ता में राजद नेताओं ने भागलपुर में बाढ़ की भयावह स्थिति का भी जिक्र किया। नेताओं के अनुसार जिले के करीब 13 प्रखंडों के 111 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बड़ी आबादी और हजारों परिवारों के सामने जीवन-यापन का संकट है। राजद नेताओं ने आरोप लगाया कि बाढ़ के कारण खेतों में लगी फसल और मकानों को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत सामग्री का वितरण पर्याप्त नहीं है। नेताओं ने यह भी चिंता जताई कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद बीमारी और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, स्वच्छ पेयजल, दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। बच्चियों से अपराध पर सरकार से जवाब मांगा प्रेस वार्ता में बिहार की कानून-व्यवस्था भी प्रमुख मुद्दा रही। सुरेश पासवान और अन्य विपक्षी नेताओं ने जमुई, दरभंगा के जमालपुर थाना क्षेत्र और औरंगाबाद में महिलाओं एवं बच्चियों से जुड़ी आपराधिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार से जवाब मांगा। नेताओं ने कहा कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रही घटनाओं से राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सम्राट चौधरी के पुराने बयान पर निशाना उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पूर्व के सुरक्षा संबंधी बयानों का हवाला देते हुए सुरेश पासवान ने सवाल उठाया कि यदि राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर स्थिति इतनी बेहतर है, तो विभिन्न जिलों में महिलाओं और बच्चियों से जुड़ी घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं। उन्होंने सत्ता पक्ष के नेताओं से अपने पुराने बयानों को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। ‘एफआईआर से नहीं दबेगी आवाज’ सोशल मीडिया पर सरकार और प्रशासन की आलोचना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे पर भी पूर्व मंत्री ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कथित विफलताओं को उजागर करने वाले लोगों पर एफआईआर दर्ज कराकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि मुकदमे और कार्रवाई से जनता की समस्याएं खत्म नहीं होंगी। सरकार को आलोचना का जवाब बेहतर काम और जमीनी राहत के जरिए देना चाहिए। UCC को लेकर भी सरकार को चुनौती समान नागरिक संहिता यानी UCC के मुद्दे पर भी सुरेश पासवान ने सरकार को खुली चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बेरोजगारी, रोजगार, शिक्षा और युवाओं के सवालों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में UCC लागू करना आसान नहीं होगा। इसी क्रम में उन्होंने दावा किया कि बिहार में UCC लागू करके देखिए, दूसरे ही दिन सरकार धराशायी होकर गिर जाएगी। उन्होंने बिहार की साझा संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग लंबे समय से मिल-जुलकर रहते आए हैं। ईद, बकरीद, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे पर्वों में सामाजिक भागीदारी बिहार की पहचान रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मुद्दों पर कदम उठाते समय सामाजिक ताने-बाने का ध्यान रखना चाहिए। UPI के कथित शुल्क पर भी उठाए सवाल प्रेस वार्ता में डिजिटल भुगतान और UPI को लेकर भी सवाल उठाए गए। सुरेश पासवान ने नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिए जाने का जिक्र करते हुए UPI की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने UPI की तुलना रिलायंस जियो के शुरुआती मुफ्त ऑफरों से करते हुए कहा कि पहले किसी सेवा की आदत डाली जाती है और बाद में शुल्क बढ़ाए जाते हैं। हालांकि, 2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू होने संबंधी दावा आधिकारिक स्रोत से सत्यापित किया जाना जरूरी है। इसे फिलहाल नेता के बयान/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। ‘दशहरा तक धराशायी हो जाएगी सरकार’ प्रेस वार्ता का सबसे बड़ा राजनीतिक दावा सरकार के भविष्य को लेकर सामने आया। सुरेश पासवान ने कहा कि सरकार किसान, नौजवान, छात्र, रोजगार, महिला सुरक्षा और आपदा राहत जैसे मुद्दों पर जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार अपनी अंतिम सांसें गिन रही है और दशहरा के आसपास यह सरकार उसी तरह धराशायी हो जाएगी, जैसे भागलपुर में बाढ़ के दौरान कई मकान पानी में विलीन हो गए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सरकार के बहुमत पर सवाल खड़ा होता है तो सरकार के टिके रहने पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा। बिहार में बाढ़, कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भागलपुर परिषदन के सभा कक्ष में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सुरेश पासवान ने राज्य सरकार पर कई मोर्चों पर हमला बोला। उन्होंने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए और उसे ‘संवेदनहीन’ बताया। पासवान ने दावा किया कि अगर सरकार के बहुमत पर सवाल उठा तो वह अगले ही दिन गिर सकती है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर आज बहुमत का सवाल उठता है तो सरकार कल ही गिर जाएगी। हालांकि, यह उनका राजनीतिक दावा है और इसे सरकार के वास्तविक बहुमत का सबूत नहीं माना जा सकता है। पूर्व मंत्री ने बिहार में जारी बाढ़ की स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से परेशान हैं। कई इलाकों में लोगों को भोजन, सुरक्षित आश्रय और जरूरी राहत सामग्री चाहिए। पूर्व मंत्री बोले- हेलिकॉप्टर से राहत सामग्री बाढ़ वाले इलाकों में पहुंचाई जा सकती थी सुरेश पासवान ने आरोप लगाया कि संकट की इस घड़ी में सरकार को तेजी से राहत अभियान चलाना चाहिए था। जरूरतमंद इलाकों में हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री पहुंचाई जा सकती थी, लेकिन सरकार की ओर से जरूरी तेजी नहीं दिखाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि “यह सरकार सिर्फ फोटो खिंचवाने वाली सरकार बनकर रह गई है।” उनका कहना था कि बाढ़ प्रभावित लोगों की असली परेशानियों को हल करने के बजाय सरकारी स्तर पर दौरे और तस्वीरों को ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। तंज कसते हुए कहा- बिहार में ट्रिपल इंजन की सरकार बाढ़ राहत को लेकर पूर्व मंत्री ने सरकार के राजनीतिक ढांचे पर भी हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिहार में ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार है—नगर में सत्ता पक्ष, बिहार में सत्ता पक्ष और केंद्र में भी उसी गठबंधन की सरकार है। इसके बावजूद बाढ़ पीड़ितों को राहत के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब प्राकृतिक आपदा आती है तो सरकार की पहली प्राथमिकता राजनीति नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाना और उन्हें भोजन, दवा, सुरक्षित स्थान तथा जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना होनी चाहिए। उत्तर बिहार में बाढ़, मगध में सुखाड़ का संकट सुरेश पासवान ने बिहार की दोहरी प्राकृतिक आपदा का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक उत्तर बिहार के कई इलाके बाढ़ से जूझ रहे हैं, जबकि दक्षिण बिहार और खासकर मगध क्षेत्र में बारिश की कमी से किसान परेशान हैं। उन्होंने दावा किया कि मगध क्षेत्र में धान की रोपनी बेहद कम हुई है। ऐसे में सरकार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के साथ-साथ सुखाड़ प्रभावित किसानों के लिए भी तत्काल राहत पैकेज और प्रभावी सहायता व्यवस्था पर काम करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भागलपुर, पीरपैंती, नाथनगर और राघोपुर जैसे बाढ़ प्रभावित इलाकों की तत्काल सुध लेने के बजाय सरकार के नेता दूसरे राजनीतिक मुद्दों में उलझे हुए हैं। इसी पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह “हंसुआ के बियाह में खुरपी का गीत” जैसा है। भागलपुर में 111 से अधिक गांव प्रभावित होने का दावा प्रेस वार्ता में राजद नेताओं ने भागलपुर में बाढ़ की भयावह स्थिति का भी जिक्र किया। नेताओं के अनुसार जिले के करीब 13 प्रखंडों के 111 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बड़ी आबादी और हजारों परिवारों के सामने जीवन-यापन का संकट है। राजद नेताओं ने आरोप लगाया कि बाढ़ के कारण खेतों में लगी फसल और मकानों को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत सामग्री का वितरण पर्याप्त नहीं है। नेताओं ने यह भी चिंता जताई कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद बीमारी और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, स्वच्छ पेयजल, दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। बच्चियों से अपराध पर सरकार से जवाब मांगा प्रेस वार्ता में बिहार की कानून-व्यवस्था भी प्रमुख मुद्दा रही। सुरेश पासवान और अन्य विपक्षी नेताओं ने जमुई, दरभंगा के जमालपुर थाना क्षेत्र और औरंगाबाद में महिलाओं एवं बच्चियों से जुड़ी आपराधिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार से जवाब मांगा। नेताओं ने कहा कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रही घटनाओं से राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सम्राट चौधरी के पुराने बयान पर निशाना उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पूर्व के सुरक्षा संबंधी बयानों का हवाला देते हुए सुरेश पासवान ने सवाल उठाया कि यदि राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर स्थिति इतनी बेहतर है, तो विभिन्न जिलों में महिलाओं और बच्चियों से जुड़ी घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं। उन्होंने सत्ता पक्ष के नेताओं से अपने पुराने बयानों को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। ‘एफआईआर से नहीं दबेगी आवाज’ सोशल मीडिया पर सरकार और प्रशासन की आलोचना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे पर भी पूर्व मंत्री ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कथित विफलताओं को उजागर करने वाले लोगों पर एफआईआर दर्ज कराकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि मुकदमे और कार्रवाई से जनता की समस्याएं खत्म नहीं होंगी। सरकार को आलोचना का जवाब बेहतर काम और जमीनी राहत के जरिए देना चाहिए। UCC को लेकर भी सरकार को चुनौती समान नागरिक संहिता यानी UCC के मुद्दे पर भी सुरेश पासवान ने सरकार को खुली चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बेरोजगारी, रोजगार, शिक्षा और युवाओं के सवालों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में UCC लागू करना आसान नहीं होगा। इसी क्रम में उन्होंने दावा किया कि बिहार में UCC लागू करके देखिए, दूसरे ही दिन सरकार धराशायी होकर गिर जाएगी। उन्होंने बिहार की साझा संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग लंबे समय से मिल-जुलकर रहते आए हैं। ईद, बकरीद, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे पर्वों में सामाजिक भागीदारी बिहार की पहचान रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मुद्दों पर कदम उठाते समय सामाजिक ताने-बाने का ध्यान रखना चाहिए। UPI के कथित शुल्क पर भी उठाए सवाल प्रेस वार्ता में डिजिटल भुगतान और UPI को लेकर भी सवाल उठाए गए। सुरेश पासवान ने नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिए जाने का जिक्र करते हुए UPI की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने UPI की तुलना रिलायंस जियो के शुरुआती मुफ्त ऑफरों से करते हुए कहा कि पहले किसी सेवा की आदत डाली जाती है और बाद में शुल्क बढ़ाए जाते हैं। हालांकि, 2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू होने संबंधी दावा आधिकारिक स्रोत से सत्यापित किया जाना जरूरी है। इसे फिलहाल नेता के बयान/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। ‘दशहरा तक धराशायी हो जाएगी सरकार’ प्रेस वार्ता का सबसे बड़ा राजनीतिक दावा सरकार के भविष्य को लेकर सामने आया। सुरेश पासवान ने कहा कि सरकार किसान, नौजवान, छात्र, रोजगार, महिला सुरक्षा और आपदा राहत जैसे मुद्दों पर जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार अपनी अंतिम सांसें गिन रही है और दशहरा के आसपास यह सरकार उसी तरह धराशायी हो जाएगी, जैसे भागलपुर में बाढ़ के दौरान कई मकान पानी में विलीन हो गए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सरकार के बहुमत पर सवाल खड़ा होता है तो सरकार के टिके रहने पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा।

