ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन मंगलवार को विपक्षी सदस्यों ने संशोधित खनन कानून और स्कूली बच्चों की नई पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों के मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया जिसके कारण सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही पहले दोपहर एक बजकर 10 मिनट तक और फिर शाम चार बजे तक के लिए स्थगित की गई जिसके बाद इसे दिनभर के लिए स्थगित करना पड़ा। इस दौरान सदन में महज 13 मिनट ही कामकाज हो सका।
सत्र की शुरुआत विधानसभा के छह पूर्व सदस्यों और नेपाल में आई भीषण बाढ़ एवं भूस्खलन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके तुरंत बाद बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस के विधायक संसद में खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम-2026 पारित किए जाने और स्कूली बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आसन के निकट आ गए। बीजद विधायकों ने पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों के मुद्दे पर स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग की, जबकि कांग्रेस सदस्यों ने संशोधित खनन कानून को रद्द करने की मांग उठाई।
हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने विधायकों से अपनी सीट पर लौटने की अपील की, लेकिन विपक्षी सदस्य नहीं माने। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर एक बजकर 10 मिनट तक के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद बीजद विधायक महात्मा गांधी मार्ग पहुंचे, जहां पार्टी की युवा एवं छात्र इकाई ‘विधानसभा घेराव’ आंदोलन कर रही है।
विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने कहा, ‘‘हम पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों को लेकर मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुए। स्कूली बच्चों को ऐसी पुस्तकें दिए जाने के लिए मंत्री को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।’’
दोपहर एक बजकर 10 मिनट पर सदन की कार्यवाही फिर शुरू होने पर भी विपक्षी सदस्यों ने अपनी सीट पर लौटने से इनकार कर दिया। इसके बाद विधानसभा उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई ने कार्यवाही शाम चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
शाम चार बजे कार्यवाही शुरू होने पर भी विपक्षी विधायकों ने आसन के निकट आकर विरोध जारी रखा और सीट पर लौटने के अनुरोध को अनसुना कर दिया। अंततः विधानसभा उपाध्यक्ष भोई ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। दोपहर के सत्र में हुए हंगामे के बीच पीठ ने कुछ विधेयकों को पेश करने की अनुमति दी।
इस दौरान न तो प्रश्नकाल हो सका और न ही शून्यकाल। हंगामे के कारण कार्य स्थगन प्रस्तावों पर भी चर्चा नहीं हो सकी। भाजपा विधायक इराशीष आचार्य ने सदन की कार्यवाही बाधित करने के लिए विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘सरकार ने पाठ्यपुस्तक में हुई त्रुटि के मामले में कार्रवाई की है और सुधार करके पुस्तकें बांटी जा रही हैं।
विपक्ष बिना किसी उचित कारण के हंगामा कर रहा है।’’
इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पूर्व मंत्रियों डंबरू माझी और सुशांत सिंह, पूर्व मुख्य सचेतक सत्य भूषण साहू तथा पूर्व विधायकों राममूर्ति गमांगो, हाजी मोहम्मद अय्यूब खान और शिवाजी माझी के निधन पर शोक प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने नेपाल और भारत के कुछ हिस्सों में हाल में आई बाढ़ में हुई जनहानि पर भी शोक व्यक्त करते हुए एक प्रस्ताव रखा। विधानसभा अध्यक्ष पाढ़ी ने गहरी संवेदना व्यक्त की, जिसके बाद सदन ने एक मिनट का मौन रखा।
विधानसभा का नौ दिवसीय मानसून सत्र तीन अक्टूबर तक चलेगा और इसमें छह अहम विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है।

