Punjab DA Row: हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव KAP Sinha को 5 अक्टूबर को पेश होने का दिया आदेश

Punjab DA Row: हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव KAP Sinha को 5 अक्टूबर को पेश होने का दिया आदेश

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) से जुड़े एक मामले में पंजाब के मुख्य सचिव को पांच अक्टूबर को अपने समक्ष पेश होने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने तीन अगस्त के अदालत के आदेश का पालन नहीं किए जाने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। उक्त आदेश में राज्य में कार्यरत अखिल भारतीय सेवा (आईएएस/आईपीएस/आईएफएस) अधिकारियों को केंद्रीय पैटर्न के अनुरूप दिए जाने वाली दर के हिसाब से राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बकाया महंगाई भत्ता और महंगाई राहत का भुगतान करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया गया था।

याचिकाकर्ताओं के वकील सनी सिंगला ने कहा कि उच्च न्यायालय ने पिछले आदेश का पालन नहीं करने पर मुख्य सचिव के. ए. पी. सिन्हा को पांच अक्टूबर को अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। तीन अगस्त को अदालत ने पंजाब सरकार को अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को डीए की अब तक की सभी लंबित किस्तें दो सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि जब तक सभी बकाया राशि का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक पंजाब सरकार बड़े पैमाने पर प्रिंट या सोशल मीडिया में विज्ञापन जैसे गैर-जरूरी खर्च नहीं करेगी।

अदालत ने कहा था कि निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं किए जाने पर बकाया राशि पर छह प्रतिशत सालाना की दर से साधारण ब्याज देना होगा। मुख्य सचिव को निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन सुनिश्चित करने और 31 अगस्त तक अदालत की रजिस्ट्री में हलफनामे के माध्यम से अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया था। सिंगला ने कहा कि मंगलवार को अदालत को बताया गया कि बकाया राशि का भुगतान किए जाने तक गैर-जरूरी खर्च नहीं करने के निर्देश के बावजूद राज्य सरकार ने ऐसे खर्च किए हैं।

उन्होंने बताया कि अदालत को राज्य सरकार के इस रुख से भी अवगत कराया गया कि वह इस मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास कर रही है। पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में एक सितंबर को एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी। सरकार ने दलील दी थी कि इतने कम समय में करीब 14,191 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान करने का निर्देश संवैधानिक रूप से संभव नहीं है।

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