Yemen Health Crisis: यमन में जंग के बीच मातृत्व पर संकट, 2,700 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं पर बिना इलाज प्रसव का खतरा

Yemen Health Crisis: यमन में जंग के बीच मातृत्व पर संकट, 2,700 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं पर बिना इलाज प्रसव का खतरा

Yemen Pregnant Women: यमन में तेज होती हिंसा ने विस्थापन के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का संकट भी गहरा दिया है। पश्चिमी तट और ताइज़ के मोर्चों पर लड़ाई के कारण हजारों परिवार सुरक्षित ठिकानों की तलाश में घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। इस संकट का सबसे गंभीर असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है, जिनके लिए अस्पताल तक पहुंचना लगातार मुश्किल हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी बताती है कि आने वाले दिनों में सैकड़ों महिलाओं को प्रसव के दौरान जरूरी चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाने का खतरा है।

यमन में जारी संघर्ष ने महिलाओं और नवजात बच्चों के लिए एक गंभीर मानवीय संकट खड़ा कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष UNFPA के अनुसार, हालिया हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों में 2,700 से अधिक गर्भवती महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मदद के बिना प्रसव का सामना करना पड़ सकता है। यह जानकारी UNFPA की 21 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में सामने आई है।

पश्चिमी तट और दक्षिणी ताइज़ में लड़ाई बढ़ने के बाद 1.20 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। इनमें करीब 30 हजार महिलाएं प्रजनन आयु वर्ग की हैं। UNFPA के मुताबिक, कम से कम 500 महिलाओं को आपातकालीन प्रसूति सेवाओं की जरूरत पड़ सकती है, जबकि लगभग 300 महिलाओं के अगले दो सप्ताह में प्रसव की उम्मीद है।

समस्या केवल अस्पतालों की दूरी तक सीमित नहीं है। संघर्ष के कारण कई स्वास्थ्य केंद्र और महिलाओं व लड़कियों के लिए बनाए गए सुरक्षित स्थान बंद हुए हैं या सीमित क्षमता से काम कर रहे हैं। क्षतिग्रस्त सड़कें, असुरक्षित ठिकाने और स्वास्थ्य सेवाओं में कमी ने गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर अस्पताल पहुंचना कठिन बना दिया है। कुछ इलाकों में महिलाओं को खुले स्थानों पर प्रसव करने की नौबत आने की बात UNFPA ने कही है।

पहले से ही बेहद गंभीर है मातृ स्वास्थ्य की स्थिति

यमन में मातृ स्वास्थ्य की स्थिति संघर्ष बढ़ने से पहले भी चिंताजनक रही है। UNFPA के 2026 मानवीय आकलन के अनुसार, देश में हर दिन करीब तीन महिलाओं की गर्भावस्था या प्रसव से जुड़ी रोकथाम योग्य जटिलताओं के कारण मौत होती है। देश में काम कर रही स्वास्थ्य सुविधाओं का केवल सीमित हिस्सा ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा पाता है।

राहत के मोर्चे पर UNFPA, UNICEF और विश्व खाद्य कार्यक्रम समेत संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। हालिया संकट के बाद त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र ने 72 घंटे के भीतर 60 हजार से अधिक विस्थापित लोगों तक सहायता पहुंचाई है।

लेकिन जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। UNFPA ने तत्काल राहत अभियान बढ़ाने के लिए 2.27 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त राशि की जरूरत बताई है। एजेंसी का 2026 के लिए 7.1 करोड़ डॉलर का व्यापक मानवीय अपील अभियान भी अब तक केवल करीब 20 प्रतिशत वित्तपोषित हुआ है। ऐसे में यमन की गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था संघर्ष के साथ-साथ राहत एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *