WTI Crude Oil Price Today: मध्य पूर्व में शांति की कोशिशें तेज होने के बावजूद कच्चे तेल के बाजार में पूरी तरह राहत नहीं लौटी है। चार सत्रों की गिरावट के बाद अमेरिकी WTI क्रूड ने मंगलवार को फिर बढ़त दर्ज की और नवंबर कॉन्ट्रैक्ट करीब 92.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। बाजार की नजर अब संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच संभावित बातचीत पर है। हालांकि, सऊदी तेल आपूर्ति में सुधार और क्षेत्रीय हमलों ने कीमतों के लिए नया संतुलन बना दिया है।
Oil Price Today: तेल की कीमतों ने फिर मारी पलटी
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चार कारोबारी सत्र की गिरावट के बाद मंगलवार को हल्की तेजी देखने को मिली। एशियाई कारोबार के दौरान WTI के सक्रिय नवंबर कॉन्ट्रैक्ट ने करीब 92.50 डॉलर प्रति बैरल का स्तर छुआ। सोमवार को यह लगभग 92.47 डॉलर पर था। वहीं, मंगलवार को समाप्त होने वाले अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट का भाव करीब 95.78 डॉलर पर बंद हुआ था।
तेल की कीमतों में इस पलटाव के पीछे बाजार की स्थिति कुछ जटिल है। एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत से युद्ध के लंबे खिंचने और आपूर्ति बाधित होने का जोखिम घटने की उम्मीद है। दूसरी ओर, मध्य पूर्व में सैन्य तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यही वजह है कि कारोबारी तेजी के बावजूद कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
Trump Iran Meeting : न्यूयॉर्क में ट्रंप-पेजेशकियन पर नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं। इस दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से संभावित मुलाकात पर भी बाजार की नजर है। ट्रंप की इस सप्ताह खाड़ी देशों के नेताओं और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत भी प्रस्तावित है। अमेरिकी प्रशासन ने युद्ध से प्रभावित मध्य पूर्व के बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर के फंड का प्रस्ताव भी दिया है।
अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ती है तो बाजार में मौजूद भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम कम हो सकता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि किसी भी बातचीत के विफल होने या संघर्ष बढ़ने पर तेल की कीमतों पर दोबारा दबाव बन सकता है।
सऊदी तेल की आवाजाही ने बदला समीकरण
सऊदी अरब से तेल निर्यात में सुधार ने बाजार को एक अहम संकेत दिया है। उपलब्ध ट्रैकिंग आंकड़ों के मुताबिक पिछले छह दिनों में करीब 29 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भेजा गया, जबकि अगस्त में यह औसत लगभग 7 लाख बैरल प्रतिदिन था। सप्ताहांत में सऊदी अरब के खाड़ी निर्यात टर्मिनलों पर मौजूद सुपरटैंकरों की संयुक्त क्षमता करीब 1.4 करोड़ बैरल बताई गई।
इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय व्यवधानों के बावजूद तेल की वास्तविक आपूर्ति पूरी तरह ठप नहीं हुई है। यही स्थिति हाल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट की एक वजह बनी।
फिर भी खतरा टला नहीं
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रियाद और सऊदी अरामको से जुड़े ठिकानों पर हमले किए हैं। इन हमलों ने सऊदी अरब की वैकल्पिक तेल आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है और लाल सागर क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बरकरार रखी है।

