समस्तीपुर| दैनिक भास्कर की ओर से आयोजित ‘गुरु शिक्षा सम्मान’ समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि एसडीओ राकेश कुमार ने अपने संबोधन से माहौल को भावनाओं से भर दिया। गुरु की महिमा बयां करते हुए वे कुछ पल के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारियों से निकलकर अपने बचपन और स्कूल की उन गलियों में लौट गए, जहां उनके व्यक्तित्व की पहली इबारत लिखी गई थी। उन्होंने कहा कि जीवन में मिली सफलता के पीछे गुरुओं की शिक्षा, सीख और संस्कार की अमिट छाप है। गुरु ने केवल किताबों के अक्षर नहीं पढ़ाए, बल्कि जीवन के कठिन सवालों को समझने और सही राह चुनने का विवेक दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता जीवन देते हैं, लेकिन गुरु उस जीवन को दिशा और उद्देश्य देते हैं। गुरु का दिया संस्कार समय के साथ धुंधला नहीं पड़ता, बल्कि सफलता की हर सीढ़ी पर उसकी चमक और गहरी होती जाती है।उनकी जितनी भी सराहना की जाए कम है। उन्होंने कहा कि जिन गुरूओं को आज सम्मानित किया जा रहा है उन्हें मैं सादर प्रणाम निवेदित करता हूं। समस्तीपुर| दैनिक भास्कर की ओर से आयोजित ‘गुरु शिक्षा सम्मान’ समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि एसडीओ राकेश कुमार ने अपने संबोधन से माहौल को भावनाओं से भर दिया। गुरु की महिमा बयां करते हुए वे कुछ पल के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारियों से निकलकर अपने बचपन और स्कूल की उन गलियों में लौट गए, जहां उनके व्यक्तित्व की पहली इबारत लिखी गई थी। उन्होंने कहा कि जीवन में मिली सफलता के पीछे गुरुओं की शिक्षा, सीख और संस्कार की अमिट छाप है। गुरु ने केवल किताबों के अक्षर नहीं पढ़ाए, बल्कि जीवन के कठिन सवालों को समझने और सही राह चुनने का विवेक दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता जीवन देते हैं, लेकिन गुरु उस जीवन को दिशा और उद्देश्य देते हैं। गुरु का दिया संस्कार समय के साथ धुंधला नहीं पड़ता, बल्कि सफलता की हर सीढ़ी पर उसकी चमक और गहरी होती जाती है।उनकी जितनी भी सराहना की जाए कम है। उन्होंने कहा कि जिन गुरूओं को आज सम्मानित किया जा रहा है उन्हें मैं सादर प्रणाम निवेदित करता हूं।

