मुजफ्फरपुर के 128 साल पुराने एलएस कॉलेज की जमीन की पैमाइश सोमवार को कराई गई। पूर्व तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी और एलएस कॉलेज के पूर्व छात्र अनिल कुमार सिंह के प्रतिवेदन के आलोक में मुशहरी अंचल के अमीन रविरंजन कॉलेज परिसर पहुंचे। उन्होंने गेट और बाउंड्री के आसपास जमीन की नापी की। पूरी पैमाइश और रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। गेट की जगह को लेकर है विवाद अनिल कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि एलएस कॉलेज और विश्वविद्यालय के बीच सीमांकन के लिए वर्षों पहले गेट लगाया गया था। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से कॉलेज की जमीन के अंदर गेट बनाने की बात सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि सितंबर में गेट के लिए तोड़फोड़ की कोशिश भी हुई थी, जिसे कॉलेज के शिक्षक-कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों के लोगों ने रोका। अनिल कुमार सिंह के अनुसार, इसी विवाद को लेकर उन्होंने बिहार सरकार के अपर सचिव, जिलाधिकारी और एसडीओ को पत्र देकर एलएस कॉलेज की जमीन का आधिकारिक सीमांकन कराने की मांग की थी। इसके बाद एसडीओ के माध्यम से मुशहरी अंचल को नापी के लिए निर्देश दिया गया। उन्होंने बताया कि 5 सितंबर को पत्र जारी कर एलएस कॉलेज की चारों तरफ से नापी कर सीमांकन करने और उसका चार्ट व प्रतिवेदन तैयार करने को कहा गया था। ‘एलएस कॉलेज ने विश्वविद्यालय को जमीन दी थी’ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि एलएस कॉलेज की स्थापना 1899 में हुई थी। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय की स्थापना के समय एलएस कॉलेज के पास करीब 80 एकड़ जमीन थी, जिसमें से करीब 21 एकड़ जमीन विश्वविद्यालय के लिए कॉलेज की ओर से दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि समय के साथ कॉलेज की जमीन के कुछ हिस्सों पर विश्वविद्यालय के विभागों का निर्माण हुआ। उनका कहना है कि कॉलेज की जमीन और उसकी सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए सरकारी स्तर पर सीमांकन जरूरी है। अनिल कुमार सिंह ने कहा कि “लंगट सिंह का नाम मिटने नहीं देंगे।” उन्होंने कहा कि जमीन का रिकॉर्ड और खेसरा सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। पूर्ववर्ती छात्र संघ ने कहा- अपनी जमीन में बनाएं गेट एलएस कॉलेज पूर्ववर्ती छात्र संघ के अध्यक्ष अरविंद कुमार वरुण ने कहा कि विश्वविद्यालय अपना गेट बनाए, लेकिन एलएस कॉलेज की जमीन में नहीं। उनके अनुसार, अमीन की नापी में गेट की मौजूदा स्थिति को लेकर जो माप सामने आया है, उसका सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की सिंडिकेट में पहले भी नए गेट को लेकर प्रस्ताव पारित हुआ था। उनके अनुसार, प्रस्ताव में जियोलॉजी विभाग के सामने विश्वविद्यालय का नया गेट बनाने की बात थी। अब गेट की जगह को लेकर फिर से विवाद सामने आया है। अरविंद कुमार वरुण ने कहा कि एलएस कॉलेज का ऐतिहासिक महत्व है और जमीन की सीमा को लेकर नियम-कानून के अनुसार ही फैसला होना चाहिए। अमीन बोले- शुरुआती नापी में गेट सही जगह मिला नापी करने पहुंचे मुशहरी अंचल के अमीन रविरंजन ने बताया कि फिलहाल गेट के आसपास की जमीन की पैमाइश की गई है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में गेट और कॉलेज की बाउंड्री सही जगह पर मिली है। संबंधित खेसरा भी सही जगह पर बताया जा रहा है। हालांकि, अमीन ने स्पष्ट किया कि पूरी स्थिति के लिए रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद जहां कहीं भी कोई समस्या या अंतर सामने आएगा, उसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। फिलहाल एलएस कॉलेज की जमीन की पैमाइश और रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही कॉलेज और विश्वविद्यालय के बीच गेट तथा जमीन की सीमा को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। मुजफ्फरपुर के 128 साल पुराने एलएस कॉलेज की जमीन की पैमाइश सोमवार को कराई गई। पूर्व तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी और एलएस कॉलेज के पूर्व छात्र अनिल कुमार सिंह के प्रतिवेदन के आलोक में मुशहरी अंचल के अमीन रविरंजन कॉलेज परिसर पहुंचे। उन्होंने गेट और बाउंड्री के आसपास जमीन की नापी की। पूरी पैमाइश और रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। गेट की जगह को लेकर है विवाद अनिल कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि एलएस कॉलेज और विश्वविद्यालय के बीच सीमांकन के लिए वर्षों पहले गेट लगाया गया था। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से कॉलेज की जमीन के अंदर गेट बनाने की बात सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि सितंबर में गेट के लिए तोड़फोड़ की कोशिश भी हुई थी, जिसे कॉलेज के शिक्षक-कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों के लोगों ने रोका। अनिल कुमार सिंह के अनुसार, इसी विवाद को लेकर उन्होंने बिहार सरकार के अपर सचिव, जिलाधिकारी और एसडीओ को पत्र देकर एलएस कॉलेज की जमीन का आधिकारिक सीमांकन कराने की मांग की थी। इसके बाद एसडीओ के माध्यम से मुशहरी अंचल को नापी के लिए निर्देश दिया गया। उन्होंने बताया कि 5 सितंबर को पत्र जारी कर एलएस कॉलेज की चारों तरफ से नापी कर सीमांकन करने और उसका चार्ट व प्रतिवेदन तैयार करने को कहा गया था। ‘एलएस कॉलेज ने विश्वविद्यालय को जमीन दी थी’ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि एलएस कॉलेज की स्थापना 1899 में हुई थी। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय की स्थापना के समय एलएस कॉलेज के पास करीब 80 एकड़ जमीन थी, जिसमें से करीब 21 एकड़ जमीन विश्वविद्यालय के लिए कॉलेज की ओर से दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि समय के साथ कॉलेज की जमीन के कुछ हिस्सों पर विश्वविद्यालय के विभागों का निर्माण हुआ। उनका कहना है कि कॉलेज की जमीन और उसकी सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए सरकारी स्तर पर सीमांकन जरूरी है। अनिल कुमार सिंह ने कहा कि “लंगट सिंह का नाम मिटने नहीं देंगे।” उन्होंने कहा कि जमीन का रिकॉर्ड और खेसरा सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। पूर्ववर्ती छात्र संघ ने कहा- अपनी जमीन में बनाएं गेट एलएस कॉलेज पूर्ववर्ती छात्र संघ के अध्यक्ष अरविंद कुमार वरुण ने कहा कि विश्वविद्यालय अपना गेट बनाए, लेकिन एलएस कॉलेज की जमीन में नहीं। उनके अनुसार, अमीन की नापी में गेट की मौजूदा स्थिति को लेकर जो माप सामने आया है, उसका सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की सिंडिकेट में पहले भी नए गेट को लेकर प्रस्ताव पारित हुआ था। उनके अनुसार, प्रस्ताव में जियोलॉजी विभाग के सामने विश्वविद्यालय का नया गेट बनाने की बात थी। अब गेट की जगह को लेकर फिर से विवाद सामने आया है। अरविंद कुमार वरुण ने कहा कि एलएस कॉलेज का ऐतिहासिक महत्व है और जमीन की सीमा को लेकर नियम-कानून के अनुसार ही फैसला होना चाहिए। अमीन बोले- शुरुआती नापी में गेट सही जगह मिला नापी करने पहुंचे मुशहरी अंचल के अमीन रविरंजन ने बताया कि फिलहाल गेट के आसपास की जमीन की पैमाइश की गई है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में गेट और कॉलेज की बाउंड्री सही जगह पर मिली है। संबंधित खेसरा भी सही जगह पर बताया जा रहा है। हालांकि, अमीन ने स्पष्ट किया कि पूरी स्थिति के लिए रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद जहां कहीं भी कोई समस्या या अंतर सामने आएगा, उसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। फिलहाल एलएस कॉलेज की जमीन की पैमाइश और रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही कॉलेज और विश्वविद्यालय के बीच गेट तथा जमीन की सीमा को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

