औरंगाबाद- डेंगू-चिकनगुनिया से बचाव को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों को ट्रेनिंग:सिविल सर्जन बोले- घरों के आसपास गंदा पानी जमा न होने दें, रेफरल अस्पतालों में जांच की है व्यवस्था

औरंगाबाद- डेंगू-चिकनगुनिया से बचाव को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों को ट्रेनिंग:सिविल सर्जन बोले- घरों के आसपास गंदा पानी जमा न होने दें, रेफरल अस्पतालों में जांच की है व्यवस्था

औरंगाबाद में डेंगू एवं चिकनगुनिया की रोकथाम और बेहतर क्लिनिकल मैनेजमेंट को लेकर सोमवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सिविल सर्जन डॉ कृष्ण कुमार की अध्यक्षता में सदर अस्पताल परिसर स्थित नवनिर्मित जीटी -9 भवन के छठे तल पर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें जिले के सभी प्रखंडों से चिकित्सा पदाधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान डेंगू एवं चिकनगुनिया के लक्षण, संक्रमण का तरीका, उपचार, जांच और बचाव के उपायों की विस्तार से जानकारी दी गई। डेंगू-चिकनगुनिया के क्लिनिकल मैनेजमेंट की दी जानकारी प्रशिक्षण में जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने डेंगू एवं चिकनगुनिया से संबंधित क्लिनिकल मैनेजमेंट पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया वायरस जनित रोग हैं, जो मुख्य रूप से मादा एडीज मच्छर के काटने से फैलते हैं। यह मच्छर साफ एवं स्थिर पानी में पनपता है। प्रशिक्षण में बताया गया कि एडीज मच्छर मुख्य रूप से दिन में काटता है। इसके काटने का प्रभाव सूर्योदय के करीब दो घंटे बाद और सूर्यास्त से लगभग दो घंटे पहले अधिक रहता है। डेंगू में तेज बुखार के साथ मांसपेशियों में दर्द हो सकता है, जबकि चिकनगुनिया में जोड़ों में तेज दर्द प्रमुख लक्षणों में शामिल है। प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों की स्थिति के अनुसार उचित चिकित्सकीय प्रबंधन करने की जानकारी दी गई। डेंगू से पीड़ित मरीजों को बुखार के लिए पैरासिटामोल देने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार करने पर जोर दिया गया। जिले के सभी रेफरल अस्पतालों में भी की गई है डेंगू जांच की व्यवस्था अधिकारियों ने बताया कि डेंगू के मामलों में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है और मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। डेंगू की जांच के लिए जिले के साथ-साथ प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों में किट के माध्यम से जांच की व्यवस्था की गई है। वहीं डेंगू की पुष्टि के लिए ELISA टेस्ट की व्यवस्था बताई गई। प्रशिक्षण में यह भी जानकारी दी गई कि सदर अस्पताल, औरंगाबाद में आरटीपीसीआर की सुविधा उपलब्ध है। शहरी क्षेत्रों में डेंगू का मरीज मिलने पर नगर पालिका, नगर परिषद या नगर निगम की ओर से टेक्निकल मलेथियान फॉगिंग कराई जाती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में फॉगिंग का कार्य स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से किया जाता है। मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने के लिए लार्वीसाइडल-टेमीफॉस का छिड़काव करने की जानकारी भी दी गई। स्वास्थ्य संस्थानों को डेंगू एवं चिकनगुनिया से बचाव के लिए लगातार प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। लोगों को अपने आसपास पानी जमा नहीं होने देने के लिए जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील प्रशिक्षण के दौरान लोगों को बताया गया कि कूलर, गमले, टायर, मिट्टी के बर्तन, प्लास्टिक की बोतलें और अन्य स्थानों पर पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। घरों में रखे पानी के बर्तनों को ढककर रखने और नियमित रूप से साफ करने की सलाह दी गई। दिन के समय भी मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनने, मच्छरदानी का इस्तेमाल करने तथा कॉइल, एंटी-मॉस्किटो क्रीम और इलेक्ट्रिक वेपर का उपयोग करने की सलाह दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि तेज बुखार, अत्यधिक उल्टी, पेट में तेज दर्द, रक्तस्राव के लक्षण या गंभीर डिहाइड्रेशन जैसी स्थिति दिखाई देने पर मरीज को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाएं। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य डेंगू और चिकनगुनिया की समय पर पहचान, उचित क्लिनिकल मैनेजमेंट और बीमारी की रोकथाम को मजबूत करना रहा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बीमारी की रोकथाम उपचार से बेहतर है। इसलिए मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने में आम लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियमित जागरूकता गतिविधियों के साथ-साथ संदिग्ध मरीजों की जांच और आवश्यक चिकित्सकीय प्रबंधन पर भी जोर दिया जा रहा है। औरंगाबाद में डेंगू एवं चिकनगुनिया की रोकथाम और बेहतर क्लिनिकल मैनेजमेंट को लेकर सोमवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सिविल सर्जन डॉ कृष्ण कुमार की अध्यक्षता में सदर अस्पताल परिसर स्थित नवनिर्मित जीटी -9 भवन के छठे तल पर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें जिले के सभी प्रखंडों से चिकित्सा पदाधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान डेंगू एवं चिकनगुनिया के लक्षण, संक्रमण का तरीका, उपचार, जांच और बचाव के उपायों की विस्तार से जानकारी दी गई। डेंगू-चिकनगुनिया के क्लिनिकल मैनेजमेंट की दी जानकारी प्रशिक्षण में जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने डेंगू एवं चिकनगुनिया से संबंधित क्लिनिकल मैनेजमेंट पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया वायरस जनित रोग हैं, जो मुख्य रूप से मादा एडीज मच्छर के काटने से फैलते हैं। यह मच्छर साफ एवं स्थिर पानी में पनपता है। प्रशिक्षण में बताया गया कि एडीज मच्छर मुख्य रूप से दिन में काटता है। इसके काटने का प्रभाव सूर्योदय के करीब दो घंटे बाद और सूर्यास्त से लगभग दो घंटे पहले अधिक रहता है। डेंगू में तेज बुखार के साथ मांसपेशियों में दर्द हो सकता है, जबकि चिकनगुनिया में जोड़ों में तेज दर्द प्रमुख लक्षणों में शामिल है। प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों की स्थिति के अनुसार उचित चिकित्सकीय प्रबंधन करने की जानकारी दी गई। डेंगू से पीड़ित मरीजों को बुखार के लिए पैरासिटामोल देने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार करने पर जोर दिया गया। जिले के सभी रेफरल अस्पतालों में भी की गई है डेंगू जांच की व्यवस्था अधिकारियों ने बताया कि डेंगू के मामलों में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है और मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। डेंगू की जांच के लिए जिले के साथ-साथ प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों में किट के माध्यम से जांच की व्यवस्था की गई है। वहीं डेंगू की पुष्टि के लिए ELISA टेस्ट की व्यवस्था बताई गई। प्रशिक्षण में यह भी जानकारी दी गई कि सदर अस्पताल, औरंगाबाद में आरटीपीसीआर की सुविधा उपलब्ध है। शहरी क्षेत्रों में डेंगू का मरीज मिलने पर नगर पालिका, नगर परिषद या नगर निगम की ओर से टेक्निकल मलेथियान फॉगिंग कराई जाती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में फॉगिंग का कार्य स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से किया जाता है। मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने के लिए लार्वीसाइडल-टेमीफॉस का छिड़काव करने की जानकारी भी दी गई। स्वास्थ्य संस्थानों को डेंगू एवं चिकनगुनिया से बचाव के लिए लगातार प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। लोगों को अपने आसपास पानी जमा नहीं होने देने के लिए जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील प्रशिक्षण के दौरान लोगों को बताया गया कि कूलर, गमले, टायर, मिट्टी के बर्तन, प्लास्टिक की बोतलें और अन्य स्थानों पर पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। घरों में रखे पानी के बर्तनों को ढककर रखने और नियमित रूप से साफ करने की सलाह दी गई। दिन के समय भी मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनने, मच्छरदानी का इस्तेमाल करने तथा कॉइल, एंटी-मॉस्किटो क्रीम और इलेक्ट्रिक वेपर का उपयोग करने की सलाह दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि तेज बुखार, अत्यधिक उल्टी, पेट में तेज दर्द, रक्तस्राव के लक्षण या गंभीर डिहाइड्रेशन जैसी स्थिति दिखाई देने पर मरीज को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाएं। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य डेंगू और चिकनगुनिया की समय पर पहचान, उचित क्लिनिकल मैनेजमेंट और बीमारी की रोकथाम को मजबूत करना रहा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बीमारी की रोकथाम उपचार से बेहतर है। इसलिए मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने में आम लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियमित जागरूकता गतिविधियों के साथ-साथ संदिग्ध मरीजों की जांच और आवश्यक चिकित्सकीय प्रबंधन पर भी जोर दिया जा रहा है।  

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