Ladakh में ग्राम प्रधानों का मानदेय बढ़कर हुआ 5000 रुपये, 10 साल बाद 233 प्रतिशत इजाफा

Ladakh में ग्राम प्रधानों का मानदेय बढ़कर हुआ 5000 रुपये, 10 साल बाद 233 प्रतिशत इजाफा

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में स्थानीय रूप से गोबा के नाम से जाने जाने वाले ग्राम प्रधानों के मासिक मानदेय में तीन गुना से अधिक की बढ़ोतरी की गई है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की मंजूरी के बाद ग्राम प्रधानों को प्रतिमाह 1,500 रुपये की जगह 5,000 रुपये मानदेय के तौर पर मिलेंगे। अधिकारियों ने बताया कि मानदेय में 233 प्रतिशत से अधिक की यह बढ़ोतरी पिछले 10 वर्षों में पहली बार की गई है।

इससे पूरे लद्दाख में 247 ‘गोबा’ लाभान्वित होंगे। उपराज्यपाल ने कहा कि इस फैसले से ग्राम प्रधानों, जिन्हें ‘नंबरदार’ के नाम से भी जाना जाता है, को अधिक वित्तीय सहायता मिलेगी और जमीनी स्तर और विशेष रूप से दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में सहभागी शासन व्यवस्था मजबूत होगी। संशोधित मानदेय आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से लागू होगा।

अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला ‘नंबरदारों’ की ओर से मानदेय बढ़ाने की लंबे समय से की जा रही मांग के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा, “लद्दाख के विभिन्न गांवों के दौरे के दौरान सक्सेना को ‘गोबा’ की ओर से इस मुद्दे को लेकर कई ज्ञापन मिले थे। 19 सितंबर को विभिन्न गांवों के ‘नंबरदारों’ के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी उपराज्यपाल से मुलाकात की और अपनी जिम्मेदारियों तथा मौजूदा मानदेय को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाने की मांग की थी।”
उनकी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सक्सेना ने मुख्य सचिव को मामले की समीक्षा करने और इस मुद्दे का समाधान करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा, “नंबरदार जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और प्रशासन तथा ग्रामीणों के बीच कड़ी का काम करते हैं।” उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने और सरकारी योजनाओं को लागू करने पर जोर बढ़ने के साथ उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उपराज्यपाल ने स्थानीय मुद्दों को सामने लाने में ‘नंबरदारों’ की सक्रिय भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, गोबा द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर उनकी तरफ से शुरू की गई पहलों के माध्यम से गांवों में पानी से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान किया गया।

सक्सेना ने कहा, “नंबरदारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे लोगों के साथ सीधे जुड़े रहते हैं और प्रशासन तथा गांवों के बीच एक अहम कड़ी का काम करते हैं। उनके मासिक मानदेय को 1,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये करना उनकी जिम्मेदारियों और लंबे समय से चली आ रही मांग को मान्यता देना है।”
संशोधित मानदेय का निर्धारण केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में लागू जम्मू-कश्मीर लंबरदारी अधिनियम, 1972 और जम्मू-कश्मीर लंबरदारी नियम, 1980 के प्रावधानों के तहत तय किया गया है।

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