सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय उसे गिरफ्तारी की वजह लिखित में बताना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति को रिहा कर दिया जाता है और जांच एजेंसी उसे दोबारा गिरफ्तार करना चाहती है, तो पुलिस सीधे उसे नहीं पकड़ सकती। इसके लिए पहले मजिस्ट्रेट से मंजूरी लेनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पहली गिरफ्तारी में नियमों का उल्लंघन करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच होगी। दोबारा गिरफ्तारी की स्थिति में मामले की आगे की जांच किसी दूसरे अधिकारी को सौंपी जाएगी। जसरकरनजीत सिंह की गिरफ्तारी के मामले में कोर्ट ने दिया फैसला कोर्ट ने ये टिप्पणियां शिरोमणि अकाली दल से जुड़े मुल्लांपुर दाखा विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी जसरकरनजीत सिंह की अपील पर कीं। नाबालिग से यौन अपराध के आरोपों से जुड़े मामले में उनकी गिरफ्तारी की वजह लिखित में नहीं बताई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को गैरकानूनी माना। सिंह ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें स्थानीय अदालत के उनकी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताने और तत्काल रिहाई के आदेश पर रोक लगा दी गई थी। SC बोला- गिरफ्तारी की वजह समझ आने वाली भाषा में लिखित देनी होगी जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल चंद्रकुर की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत आरोपी को गिरफ्तारी की वजह लिखित में और ऐसी भाषा में बतानी होगी, जिसे वह समझ सके। इसकी कॉपी भी उसे जल्द से जल्द देनी होगी। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यक्ति का मौलिक और वैधानिक अधिकार है। इसका उल्लंघन होने पर गिरफ्तारी असंवैधानिक हो जाएगी और आरोपी को तत्काल रिहाई का अधिकार होगा। दोबारा गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट को अर्जी देना जरूरी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर अनुच्छेद 22(1) के उल्लंघन के कारण व्यक्ति को रिहा किया जाता है और जांच एजेंसी को उसकी हिरासत जरूरी लगती है, तो दोबारा गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट के सामने अर्जी देनी होगी। अर्जी में ये 3 बातें बतानी होंगी: पहली गिरफ्तारी करने वाला अधिकारी दोबारा गिरफ्तारी का फैसला नहीं लेगा कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस अधिकारी ने पहली गिरफ्तारी में संवैधानिक नियम का उल्लंघन किया, उसे दोबारा गिरफ्तारी का फैसला लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दोबारा गिरफ्तारी की अर्जी पर उसके सीनियर अधिकारी की सहमति भी जरूरी होगी। दोबारा गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अन्य बड़े निर्देश जांच दूसरे अधिकारी को सौंपी जाएगी: सीनियर अधिकारी मामले की आगे की जांच किसी दूसरे पुलिस अधिकारी को सौंपेगा। पहली गिरफ्तारी में गलती करने वाले अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच होगी। गलती साबित होने पर कार्रवाई होगी और सर्विस बुक में रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा। चार्जशीट से गिरफ्तारी वैध नहीं होगी: बाद में चार्जशीट दाखिल करने या कोर्ट के संज्ञान लेने से गैरकानूनी गिरफ्तारी सही नहीं हो जाएगी। आरोपी को नुकसान साबित करने की जरूरत भी नहीं होगी। अनुच्छेद 22(1) सभी गिरफ्तारियों पर लागू: अनुच्छेद 22(1) सामान्य और विशेष, दोनों तरह के मामलों में हुई गिरफ्तारियों पर लागू होता है। कोर्ट ने इसे मौलिक संवैधानिक सुरक्षा बताया। रिहाई को जमानत नहीं माना जाएगा: अनुच्छेद 22(1) के उल्लंघन पर रिहाई को जमानत नहीं माना जाएगा। इसे गैरकानूनी हिरासत से रिहाई माना जाएगा। अनुच्छेद 22(2) के उल्लंघन पर भी दोबारा हिरासत मांगने के लिए यही प्रक्रिया अपनानी होगी। जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट मुआवजा भी दे सकता है। —————————— यह खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट जांच करेगा- पेपर लीक रोकने के क्या इंतजाम हुए, जज NTA दफ्तर जाएंगे सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जरूरत पड़ने पर नीट परीक्षा सिस्टम की जांच के लिए जज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के ऑफिस का दौरा करेंगे। वे देखेंगे कि परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने के इंतजाम वास्तव में काम कर रहे हैं या नहीं। पढ़ें पूरी खबर…
गिरफ्तारी की वजह नहीं बताई तो एक्शन गैरकानूनी कहलाएगा:दोबारा पकड़ने से पहले मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी; सुप्रीम कोर्ट ने तय किए नियम

