औरंगाबाद जिले में 10 प्रमुख सड़कों की हालत जर्जर:जानलेवा गड्ढे, फ्लाई ऐश से बढ़ी परेशानी; ग्रामीण बोले- मरम्मत नहीं, स्थायी समाधान चाहिए

औरंगाबाद जिले में 10 प्रमुख सड़कों की हालत जर्जर:जानलेवा गड्ढे, फ्लाई ऐश से बढ़ी परेशानी; ग्रामीण बोले- मरम्मत नहीं, स्थायी समाधान चाहिए

औरंगाबाद जिले के अलग-अलग प्रखंडों में कई महत्वपूर्ण सड़कें लंबे समय से जर्जर हालत में है। इन सड़कों से रोजाना हजारों लोग आवागमन करते हैं, लेकिन मरम्मत नहीं होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कहीं सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हादसे का कारण बन रहे हैं तो कहीं बारिश के बाद सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार विभाग और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। अंबा-नबीनगर रोड पर जानलेवा गड्ढे, फ्लाई ऐश से बढ़ी परेशानी अंबा से नबीनगर जाने वाली महत्वपूर्ण सड़क लंबे समय से जर्जर है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। मेंह पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद एनटीपीसी से फ्लाई ऐश लेकर भारी वाहनों के अंबा होकर औरंगाबाद जाने से सड़क पर दबाव और बढ़ गया है। अंबा बाजार में सड़क की स्थिति सबसे खराब है। कुछ दिनों पहले विभाग ने गड्ढों में मेटल डालकर भरने का प्रयास किया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। भारी वाहनों से गिरने वाला फ्लाई ऐश सूखने के बाद धूल बनकर उड़ता है, जिससे दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी होती है। यह सड़क बिहार और झारखंड को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। कुटुंबा में कई सड़कें बदहाल, हजारों ग्रामीण परेशान कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र में सिमर मोड़ से सिमरा होते हुए चंद्रपुरा जाने वाली सड़क की हालत खराब है। यह मार्ग एनएच-139 से कई गांवों को जोड़ता है और आगे नहर मार्ग से बेदौलिया, बिशुनपुर होते हुए माली रोड में मिलता है। घेउरा से सरडीहा, खैर हरनाथ, नोनिया बिगहा, चांदखाप होते हुए सुंदरगंज तक जाने वाला मार्ग भी बदहाल है। इसके अलावा कठरी से माली, संडा बालूगंज से महसु और इरियप, अंबा-नबीनगर रोड से मुड़िला होते हुए बरहेत, कुटुंबा से पिपरा बगही जाने वाली सड़क की स्थिति भी खराब है। सिमरा गांव निवासी वार्ड सदस्य सुनील चौहान और ग्रामीण आयुष कुमार सिंह ने बताया कि इन मार्गों से प्रतिदिन हजारों लोग बाजार, स्कूल, अस्पताल और प्रखंड कार्यालय तक पहुंचते हैं। लोग काफी परेशानी हैं, फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। नबीनगर-गजना सड़क पर 15 किलोमीटर का सफर एक घंटे में नबीनगर से गजना जाने वाली करीब 15 किलोमीटर सड़क वर्षों से जर्जर है। यह मार्ग चंद्रगढ़, खरौंधा और मुनगा होते हुए बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित गजना धाम तक जाता है। यह सड़क झारखंड के जपला क्षेत्र को भी जोड़ती है। सड़क की बदहाली के कारण वाहन चालकों को कम दूरी तय करने में भी करीब एक घंटे का समय लग जाता है। ग्रामीण भृगुनाथ सिंह और राम निवास सिंह ने बताया कि कार चालकों और दोपहिया सवारों को विशेष परेशानी होती है। गजना धाम में प्रतिदिन श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक और सीमावर्ती क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होने के बावजूद सड़क की वर्षों से मरम्मत नहीं हुई है। रफीगंज के कुंवर बिगहा में 2.5 किमी सड़क का इंतजार गोरडीहा पंचायत के कुंवर बिगहा गांव में ग्रामीण करीब 2.5 किलोमीटर जर्जर सड़क से परेशान हैं। ग्रामीणों के अनुसार रफीगंज-इस्माइलपुर-गया मुख्य मार्ग से गांव तक जाने वाली सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि बारिश में एक से दो फीट तक पानी और कीचड़ जमा हो जाता है। इससे कुंवर बिगहा के साथ गौसपुर, प्राणपुर, पाती, मदारपुर और कासमा के लोगों को भी परेशानी होती है। बच्चों का स्कूल जाना और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय सड़क निर्माण का आश्वासन मिलता है, लेकिन बाद में समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता। लोगों ने प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग की है। गोह में मुड़वा-बाजितपुर-महदीपुर सड़क पर गड्ढे मुड़वा से बाजितपुर एवं महदीपुर जाने वाली सड़क वर्षों से जर्जर है। जगह-जगह बड़े गड्ढे और उखड़ी गिट्टी के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। यह मार्ग प्राणपुर, निमड़ा, बाजितपुर, आशापुर, नीमड़ी, भूपेश नगर, गैनी और महदीपुर समेत कई गांवों को जोड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार करीब छह हजार से अधिक आबादी इस सड़क पर निर्भर है। बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चलता और दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। सुरेश यादव, दिलीप सिंह, जोगिंदर साव, विजय गुप्ता, बबन सिंह और राजेंद्र यादव समेत ग्रामीणों ने सड़क की मरम्मत की मांग की है। ओबरा में बुद्ध स्थल जाने वाली सड़क बदहाल, स्कूल वाहन भी फंस रहे लोकन बिगहा-अतरौली एनएच-139 से महुआ बिगहा, मनोरा दरगाह होते हुए ऐतिहासिक बुद्ध स्थल तक जाने वाली सड़क जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह बड़े गड्ढे और उखड़ी सड़क के कारण आवागमन मुश्किल है। स्कूल की गाड़ियां कई बार गड्ढों में फंस जाती हैं। बाइक सवारों को भी दुर्घटना का खतरा रहता है। प्रसव पीड़ित महिलाओं को अस्पताल ले जाने में भी परेशानी होती है। मनोरा दरगाह पर साल में कई बार मेला और बुद्ध स्थल परिसर में आर्द्रा नक्षत्र के दौरान करीब 15 दिनों तक आयोजन होता है। इससे इस मार्ग पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। सरपंच राजश्री शर्मा समेत ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग की है। हसपुरा में 20 साल से जर्जर पुरानी थाना रोड हसपुरा मुख्य बाजार से बांधी तक जाने वाली पुरानी थाना रोड करीब 20 वर्षों से जर्जर है। सड़क पर तीन-तीन फीट तक गहरे गड्ढे हैं और कई स्थानों पर नाली का पानी जमा रहता है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कई बार आंदोलन किया और बाजार बंद कर प्रदर्शन भी किया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। सड़क की बदहाली से स्थानीय व्यवसायियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। यह मार्ग हसपुरा-देवकुंड सड़क से जुड़ता है और 12 से 15 गांवों के हजारों लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीणों को खराब सड़क के कारण करीब तीन किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। दाउदनगर में तीन साल में ही खराब हो गई चार किमी सड़क दाउदनगर से रेपुरा,देवदतपुर होते हुए ओबरा प्रखंड की गैनी पंचायत को जोड़ने वाली करीब चार किलोमीटर सड़क की हालत खराब है। ग्रामीणों के अनुसार इसका निर्माण करीब तीन वर्ष पहले एमआर योजना के तहत कराया गया था। निर्माण के कुछ ही वर्षों बाद सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन गए। इससे रेपुरा, देवदतपुर और आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने सड़क की गुणवत्ता की जांच और जल्द मरम्मत की मांग की है। ग्रामीणों की मांग – मरम्मत नहीं, स्थायी समाधान चाहिए जिले की इन सड़कों की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि गड्ढों में मेटल या मिट्टी डालकर अस्थायी मरम्मत से समस्या खत्म नहीं होगी। महत्वपूर्ण ग्रामीण और संपर्क मार्गों का स्थायी निर्माण जरूरी है। सड़कें बेहतर होने से ग्रामीणों को बाजार, अस्पताल, स्कूल, प्रखंड कार्यालय और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में सुविधा होगी। लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से सड़कों की स्थिति का सर्वे कराकर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत और पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। औरंगाबाद जिले के अलग-अलग प्रखंडों में कई महत्वपूर्ण सड़कें लंबे समय से जर्जर हालत में है। इन सड़कों से रोजाना हजारों लोग आवागमन करते हैं, लेकिन मरम्मत नहीं होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कहीं सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हादसे का कारण बन रहे हैं तो कहीं बारिश के बाद सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार विभाग और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। अंबा-नबीनगर रोड पर जानलेवा गड्ढे, फ्लाई ऐश से बढ़ी परेशानी अंबा से नबीनगर जाने वाली महत्वपूर्ण सड़क लंबे समय से जर्जर है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। मेंह पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद एनटीपीसी से फ्लाई ऐश लेकर भारी वाहनों के अंबा होकर औरंगाबाद जाने से सड़क पर दबाव और बढ़ गया है। अंबा बाजार में सड़क की स्थिति सबसे खराब है। कुछ दिनों पहले विभाग ने गड्ढों में मेटल डालकर भरने का प्रयास किया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। भारी वाहनों से गिरने वाला फ्लाई ऐश सूखने के बाद धूल बनकर उड़ता है, जिससे दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी होती है। यह सड़क बिहार और झारखंड को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। कुटुंबा में कई सड़कें बदहाल, हजारों ग्रामीण परेशान कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र में सिमर मोड़ से सिमरा होते हुए चंद्रपुरा जाने वाली सड़क की हालत खराब है। यह मार्ग एनएच-139 से कई गांवों को जोड़ता है और आगे नहर मार्ग से बेदौलिया, बिशुनपुर होते हुए माली रोड में मिलता है। घेउरा से सरडीहा, खैर हरनाथ, नोनिया बिगहा, चांदखाप होते हुए सुंदरगंज तक जाने वाला मार्ग भी बदहाल है। इसके अलावा कठरी से माली, संडा बालूगंज से महसु और इरियप, अंबा-नबीनगर रोड से मुड़िला होते हुए बरहेत, कुटुंबा से पिपरा बगही जाने वाली सड़क की स्थिति भी खराब है। सिमरा गांव निवासी वार्ड सदस्य सुनील चौहान और ग्रामीण आयुष कुमार सिंह ने बताया कि इन मार्गों से प्रतिदिन हजारों लोग बाजार, स्कूल, अस्पताल और प्रखंड कार्यालय तक पहुंचते हैं। लोग काफी परेशानी हैं, फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। नबीनगर-गजना सड़क पर 15 किलोमीटर का सफर एक घंटे में नबीनगर से गजना जाने वाली करीब 15 किलोमीटर सड़क वर्षों से जर्जर है। यह मार्ग चंद्रगढ़, खरौंधा और मुनगा होते हुए बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित गजना धाम तक जाता है। यह सड़क झारखंड के जपला क्षेत्र को भी जोड़ती है। सड़क की बदहाली के कारण वाहन चालकों को कम दूरी तय करने में भी करीब एक घंटे का समय लग जाता है। ग्रामीण भृगुनाथ सिंह और राम निवास सिंह ने बताया कि कार चालकों और दोपहिया सवारों को विशेष परेशानी होती है। गजना धाम में प्रतिदिन श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक और सीमावर्ती क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होने के बावजूद सड़क की वर्षों से मरम्मत नहीं हुई है। रफीगंज के कुंवर बिगहा में 2.5 किमी सड़क का इंतजार गोरडीहा पंचायत के कुंवर बिगहा गांव में ग्रामीण करीब 2.5 किलोमीटर जर्जर सड़क से परेशान हैं। ग्रामीणों के अनुसार रफीगंज-इस्माइलपुर-गया मुख्य मार्ग से गांव तक जाने वाली सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि बारिश में एक से दो फीट तक पानी और कीचड़ जमा हो जाता है। इससे कुंवर बिगहा के साथ गौसपुर, प्राणपुर, पाती, मदारपुर और कासमा के लोगों को भी परेशानी होती है। बच्चों का स्कूल जाना और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय सड़क निर्माण का आश्वासन मिलता है, लेकिन बाद में समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता। लोगों ने प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग की है। गोह में मुड़वा-बाजितपुर-महदीपुर सड़क पर गड्ढे मुड़वा से बाजितपुर एवं महदीपुर जाने वाली सड़क वर्षों से जर्जर है। जगह-जगह बड़े गड्ढे और उखड़ी गिट्टी के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। यह मार्ग प्राणपुर, निमड़ा, बाजितपुर, आशापुर, नीमड़ी, भूपेश नगर, गैनी और महदीपुर समेत कई गांवों को जोड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार करीब छह हजार से अधिक आबादी इस सड़क पर निर्भर है। बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चलता और दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। सुरेश यादव, दिलीप सिंह, जोगिंदर साव, विजय गुप्ता, बबन सिंह और राजेंद्र यादव समेत ग्रामीणों ने सड़क की मरम्मत की मांग की है। ओबरा में बुद्ध स्थल जाने वाली सड़क बदहाल, स्कूल वाहन भी फंस रहे लोकन बिगहा-अतरौली एनएच-139 से महुआ बिगहा, मनोरा दरगाह होते हुए ऐतिहासिक बुद्ध स्थल तक जाने वाली सड़क जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह बड़े गड्ढे और उखड़ी सड़क के कारण आवागमन मुश्किल है। स्कूल की गाड़ियां कई बार गड्ढों में फंस जाती हैं। बाइक सवारों को भी दुर्घटना का खतरा रहता है। प्रसव पीड़ित महिलाओं को अस्पताल ले जाने में भी परेशानी होती है। मनोरा दरगाह पर साल में कई बार मेला और बुद्ध स्थल परिसर में आर्द्रा नक्षत्र के दौरान करीब 15 दिनों तक आयोजन होता है। इससे इस मार्ग पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। सरपंच राजश्री शर्मा समेत ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग की है। हसपुरा में 20 साल से जर्जर पुरानी थाना रोड हसपुरा मुख्य बाजार से बांधी तक जाने वाली पुरानी थाना रोड करीब 20 वर्षों से जर्जर है। सड़क पर तीन-तीन फीट तक गहरे गड्ढे हैं और कई स्थानों पर नाली का पानी जमा रहता है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कई बार आंदोलन किया और बाजार बंद कर प्रदर्शन भी किया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। सड़क की बदहाली से स्थानीय व्यवसायियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। यह मार्ग हसपुरा-देवकुंड सड़क से जुड़ता है और 12 से 15 गांवों के हजारों लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीणों को खराब सड़क के कारण करीब तीन किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। दाउदनगर में तीन साल में ही खराब हो गई चार किमी सड़क दाउदनगर से रेपुरा,देवदतपुर होते हुए ओबरा प्रखंड की गैनी पंचायत को जोड़ने वाली करीब चार किलोमीटर सड़क की हालत खराब है। ग्रामीणों के अनुसार इसका निर्माण करीब तीन वर्ष पहले एमआर योजना के तहत कराया गया था। निर्माण के कुछ ही वर्षों बाद सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन गए। इससे रेपुरा, देवदतपुर और आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने सड़क की गुणवत्ता की जांच और जल्द मरम्मत की मांग की है। ग्रामीणों की मांग – मरम्मत नहीं, स्थायी समाधान चाहिए जिले की इन सड़कों की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि गड्ढों में मेटल या मिट्टी डालकर अस्थायी मरम्मत से समस्या खत्म नहीं होगी। महत्वपूर्ण ग्रामीण और संपर्क मार्गों का स्थायी निर्माण जरूरी है। सड़कें बेहतर होने से ग्रामीणों को बाजार, अस्पताल, स्कूल, प्रखंड कार्यालय और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में सुविधा होगी। लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से सड़कों की स्थिति का सर्वे कराकर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत और पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।  

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