देवरिया मेडिकल कॉलेज की टंकी में शव मिला:प्राचार्य को चेतावनी देकर राहत, अब अधीनस्थों से स्पष्टीकरण मांगने पर विभागीय कार्रवाई चर्चा में

देवरिया मेडिकल कॉलेज की टंकी में शव मिला:प्राचार्य को चेतावनी देकर राहत, अब अधीनस्थों से स्पष्टीकरण मांगने पर विभागीय कार्रवाई चर्चा में

देवरिया के महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में पानी की टंकी में शव मिलने के मामले में विभागीय कार्रवाई के तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं। घटना के बाद तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार बरनवाल को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। उन्होंने शासन को अपना स्पष्टीकरण दिया। अब विभाग ने उन्हें केवल सचेत करते हुए कार्रवाई से राहत दे दी है। इसके कुछ दिन बाद मेडिकल कॉलेज के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। मामला 6 अक्टूबर 2025 का है। मेडिकल कॉलेज के नए भवन की पांचवीं मंजिल पर बनी पानी की टंकी में एक शव मिला था। शव काफी खराब हालत में था। बाद में उसकी पहचान महाराष्ट्र निवासी अशोक गावंडे के रूप में हुई। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा, साफ-सफाई और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। 6 अक्टूबर को टंकी में मिला था शव घटना के अगले दिन 7 अक्टूबर 2025 को जिलाधिकारी ने मामले की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी थी। शुरुआती जांच में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की सुरक्षा और साफ-सफाई व्यवस्था में गंभीर लापरवाही सामने आने की बात कही गई थी। इसी आधार पर तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार बरनवाल से स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके साथ ही उन्हें महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यालय, लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया था। इस कार्रवाई के बाद माना जा रहा था कि मामले में विभागीय स्तर पर आगे भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्राचार्य ने दिसंबर में दिया था स्पष्टीकरण डॉ. बरनवाल ने 22 दिसंबर 2025 को शासन को अपना स्पष्टीकरण सौंपा। इसमें उन्होंने कुछ अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी बताई थी। शासन ने उनके जवाब पर विचार करने के बाद 9 सितंबर 2026 को उन्हें भविष्य में अपने काम को गंभीरता से करने के लिए सचेत किया। विभागीय पत्र में उन्हें आगे के लिए चेतावनी दी गई और इसी के साथ उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई को खत्म कर दिया गया। प्राचार्य को इस तरह राहत मिलने के बाद अब मेडिकल कॉलेज के भीतर विभागीय कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अधीनस्थों से अब मांगा गया स्पष्टीकरण तत्कालीन प्राचार्य को चेतावनी देकर मामला खत्म करने के बाद अब मेडिकल कॉलेज के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसी क्रम को लेकर कॉलेज में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब प्राचार्य के जवाब के आधार पर अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी सामने रखी गई थी, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया अब क्यों शुरू हुई। वहीं, तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार बरनवाल की मेडिकल कॉलेज में वापसी होगी या नहीं, यह भी अभी स्पष्ट नहीं है। विभाग की ओर से इस संबंध में स्थिति साफ नहीं की गई है। तीन सदस्यीय जांच रिपोर्ट का स्पष्ट जिक्र नहीं घटना के बाद शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। इसमें मुख्य विकास अधिकारी, एसडीएम और सीएमओ शामिल थे। टीम ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई थी।स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि तत्कालीन प्राचार्य को दी गई विभागीय चेतावनी के पत्र में तीन सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि इस रिपोर्ट को लेकर विभाग की ओर से कोई अलग स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यही वजह है कि पानी की टंकी में शव मिलने के मामले में कार्रवाई के क्रम को लेकर मेडिकल कॉलेज में चर्चाएं बनी हुई हैं।

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