एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमटीएच अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की 28 वर्षीय पीजी प्रथम वर्ष की जूनियर रेजिडेंट डॉ. सिमी यादव ने इंसुलिन का इंजेक्शन लगाकर जान देने की कोशिश की। उन्हें उपचार के लिए एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सोमवार को पूरे मामले की जांच कमेटी जांच करेगी। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर उनका बयान लिया है। डॉक्टर के परिजनों ने सीनियर डॉक्टरों पर मानसिक प्रताड़ना, अत्यधिक ड्यूटी, गैर-चिकित्सकीय काम कराने और शिकायत के बाद कथित तौर पर टार्गेट किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजन ने बताया कि पीजी डॉक्टर के लिए महीने में 192 घंटे की ड्यूटी का रोस्टर है, लेकिन उनसे 392 घंटे तक काम करवाया गया। हमारे पास इसका सबूत भी है। शुरुआत में 36-36 घंटे की लगातार ड्यूटी कराई गई। बाद में 12 घंटे का रोस्टर जारी हुआ, लेकिन आरोप है कि कई दिन ड्यूटी रात 10.30, 11 और 12 बजे तक खिंचती रही। लंबे समय से शिकायत के बाद भी प्रबंधन ने कार्रवाई नहीं की। 14 फरवरी को जॉइन किया, कुछ ही समय बाद 36 घंटे की ड्यूटी परिजन के मुताबिक डॉ. सिमी ने 14 फरवरी को MGM मेडिकल कॉलेज में पीजी प्रथम वर्ष में जॉइन किया था। उन्होंने MBBS उज्जैन के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज से किया है। जूनियर डॉक्टरों को ड्यूटी रूम के इस्तेमाल की पर्याप्त सुविधा नहीं मिलती थी। 36 घंटे की ड्यूटी के दौरान कुछ मिनट के लिए वॉशरूम जाने पर भी सीनियर फोन कर पूछते थे कि डॉक्टर कहां है और काम कौन कर रहा है। 15 मई जन्मदिन था, 14 मई को आत्महत्या की कोशिश परिवार के मुताबिक मानसिक दबाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 15 मई को सिमी का जन्मदिन था और उससे एक दिन पहले 14 मई को भी उसने आत्महत्या की कोशिश की थी। उस समय भी परिवार उसे संभालता रहा। हायरार्की तोड़ी है, परिणाम भुगतने होंगे’ कहने का आरोप परिजन के मुताबिक शिकायत के बाद जब शिकायतकर्ता की पहचान सामने आई तो HOD की ओर से छात्रा को बुलाया गया। परिवार का आरोप है कि बातचीत के दौरान उससे कहा गया कि उसने “हायरार्की तोड़ी है” और इसके परिणाम का सामना करना पड़ेगा। ओटी शीट फाड़ने से लेकर मारपीट के डर तक के आरोप परिजन ने सीनियरों के व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि काम में छोटी गलती पर भी अपशब्द कहे जाते थे। ओटी शीट या मरीज की ट्रीटमेंट शीट में कोई जानकारी छूट जाने पर डांट और दबाव बनाया जाता था। परिवार का आरोप है कि कुछ सीनियरों का व्यवहार इस स्तर तक पहुंच गया था कि छात्रा को डर लगता था कि कहीं उसके साथ मारपीट न हो जाए। कोर्ट का नोटिस लेकिन नहीं दिया जवाब, आज से शुरू होगी जांच इस संबंध में कोर्ट की ओर से एमजीएम मेडिकल कॉलेज को नोटिस भी भेजा गया है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। एंटी रैगिंग कमेटी द्वारा सोमवार को जांच की जाएगी। जिसमें सभी विद्यार्थी, डॉक्टरों के बयान लिए जाएंगे। यह पहला मामला नहीं- MGM में पहले भी हो चुकी रैगिंग

