महाराष्ट्र मंडल के सात दिवसीय गणपति उत्सव का रविवार को गणपति प्रतिमा विसर्जन के साथ समापन हो गया। अंतिम दिन महाराष्ट्र मंडल भवन से गणपति बप्पा की भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। सात दिनों तक चले उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के साथ बप्पा को भेंट अर्पित की। जुलूस में नासिक से आने वाली 60 सदस्यीय झांझ पथक टीम शामिल हुई। इसमें 20 लड़कियां और 40 लड़के थे, जो पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ करतब प्रस्तुत किया। देखें तस्वीरें… पूजा के बाद निकली विसर्जन यात्रा विसर्जन से पहले भक्तों ने विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा की और आरती उतारी। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष संजय भोसले ने कहा कि भगवान श्रीगणेश प्रथम पूज्य देवता हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि गणपति उत्सव के माध्यम से पटना में महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली। महाराष्ट्र से आए कलाकारों ने बढ़ाई शोभा विसर्जन शोभायात्रा में महाराष्ट्र के भुसावल से आए शिव मुद्रा वाद्य पथक के कलाकारों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति से शोभायात्रा का माहौल भक्तिमय हो गया। वहीं, सांगली के महादेव कणसे ने श्रद्धालुओं को महाराष्ट्रीय शैली की पगड़ी पहनाई। इन प्रमुख रास्तों से गुजरी शोभायात्रा शोभायात्रा दरोगा राय पथ स्थित महाराष्ट्र मंडल भवन से शुरू होकर वीरचंद पटेल पथ, बेली रोड, इनकम टैक्स गोलंबर, डाकबंगला चौराहा, भट्टाचार्या रोड, पीरमुहानी, कदमकुआं और ठाकुरबाड़ी रोड होते हुए बाकरगंज पहुंची। इसके बाद शोभायात्रा गंगा घाट पहुंची, जहां पूजा-अर्चना के बाद गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव आईएएस अधिकारी श्रीकांत खांडेकर और राज्यपाल के एडीसी आकाश यादव भी मौजूद रहे। विसर्जन के दौरान श्रद्धालु ‘गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या’ के जयकारे लगाते रहे और बप्पा से अगले वर्ष जल्द लौटने की कामना की। महाराष्ट्र मंडल के सात दिवसीय गणपति उत्सव का रविवार को गणपति प्रतिमा विसर्जन के साथ समापन हो गया। अंतिम दिन महाराष्ट्र मंडल भवन से गणपति बप्पा की भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। सात दिनों तक चले उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के साथ बप्पा को भेंट अर्पित की। जुलूस में नासिक से आने वाली 60 सदस्यीय झांझ पथक टीम शामिल हुई। इसमें 20 लड़कियां और 40 लड़के थे, जो पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ करतब प्रस्तुत किया। देखें तस्वीरें… पूजा के बाद निकली विसर्जन यात्रा विसर्जन से पहले भक्तों ने विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा की और आरती उतारी। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष संजय भोसले ने कहा कि भगवान श्रीगणेश प्रथम पूज्य देवता हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि गणपति उत्सव के माध्यम से पटना में महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली। महाराष्ट्र से आए कलाकारों ने बढ़ाई शोभा विसर्जन शोभायात्रा में महाराष्ट्र के भुसावल से आए शिव मुद्रा वाद्य पथक के कलाकारों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति से शोभायात्रा का माहौल भक्तिमय हो गया। वहीं, सांगली के महादेव कणसे ने श्रद्धालुओं को महाराष्ट्रीय शैली की पगड़ी पहनाई। इन प्रमुख रास्तों से गुजरी शोभायात्रा शोभायात्रा दरोगा राय पथ स्थित महाराष्ट्र मंडल भवन से शुरू होकर वीरचंद पटेल पथ, बेली रोड, इनकम टैक्स गोलंबर, डाकबंगला चौराहा, भट्टाचार्या रोड, पीरमुहानी, कदमकुआं और ठाकुरबाड़ी रोड होते हुए बाकरगंज पहुंची। इसके बाद शोभायात्रा गंगा घाट पहुंची, जहां पूजा-अर्चना के बाद गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव आईएएस अधिकारी श्रीकांत खांडेकर और राज्यपाल के एडीसी आकाश यादव भी मौजूद रहे। विसर्जन के दौरान श्रद्धालु ‘गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या’ के जयकारे लगाते रहे और बप्पा से अगले वर्ष जल्द लौटने की कामना की।

