रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) को 4 साल से ज़्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों तरफ से हमलों का सिलसिला बना हुआ है। एक समय था जब रूस के हमलों के खिलाफ यूक्रेन सिर्फ अपनी रक्षा कर रहा था, लेकिन अब यूक्रेन ने भी आक्रामक रवैया अपना लिया है और रूस पर हमले तेज़ कर दिए हैं।
मॉस्को पर किया बड़ा ड्रोन अटैक
यूक्रेन ने देर रात मॉस्को (Moscow) ओब्लास्ट पर बड़े ड्रोन अटैक को अंजाम दिया। रूस का दावा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम्स ने 1,600 से ज़्यादा ड्रोन मार गिराए, जिनमें मॉस्को को निशाना बनाने वाले 450 ड्रोन भी शामिल थे। इन हमलों में कपोटन्या ऑयल रिफाइनरी (मॉस्को की सबसे बड़ी रिफाइनरी) और रिहायशी इमारतें भी प्रभावित हुईं। कई वाहनों को भी इस ड्रोन अटैक की वजह से नुकसान पहुंचा। इतना ही नहीं, हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मॉस्को के एयरपोर्ट्स पर उड़ानों पर भी पाबंदियाँ लगा दी गईं।
2 लोगों की हुई मौत
यूक्रेन के ड्रोन अटैक की वजह से मॉस्को ओब्लास्ट में 2 लोगों की मौत हो गई। कुछ लोग इस ड्रोन अटैक के कारण घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इतना ही नहीं, करीब 400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
मॉस्को पर अब तक का सबसे बड़ा हमला
यूक्रेन का यह ड्रोन अटैक मॉस्को ओब्लास्ट पर अब तक का सबसे बड़ा हमला था। रूसी अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की। यूक्रेन की आक्रामक रणनीति के तहत बड़े लेवल पर ड्रोन अटैक्स किए जा रहे हैं, जिनमें मुख्य रूप से तेल की रिफाइनरियों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसा करके यूक्रेन रूस की आर्थिक और सैन्य क्षमता को कमजोर करना चाहता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रूसी अर्थव्यवस्था में तेल की अहम भूमिका है। तेल के निर्यात से रूस को काफी फायदा होता है। इसी वजह से यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले कर रहा है। कुछ दिन पहले अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा था कि यूक्रेन को रूस के तेल-ऊर्जा ठिकानों पर हमले बंद कर देने चाहिए क्योंकि इसका असर ग्लोबल डीज़ल सप्लाई पर पड़ रहा है जिसकी वजह से इसकी कीमत बढ़ रही है।

