दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने उत्तर प्रदेश में 2022 में हुए एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले 30 वर्षीय व्यक्ति की पत्नी, चार नाबालिग बच्चों और माता-पिता को 51.45 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। पीठासीन अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने शौकीन के परिवार की ओर से दायर मुआवजा याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। शौकीन की मौत उस समय हो गई थी, जब एक कार ने उनके टेंपो को टक्कर मार दी थी।
न्यायाधिकरण ने दुर्घटना के लिए जिम्मेदार वाहन का बीमा करने वाली आईएफएफसीओ टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को मुआवजे की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया। न्यायाधिकरण ने 15 सितंबर को दिए गए आदेश में कहा, ‘‘मृतक शौकीन को वाहन को चलाते हुए प्रतिवादी संख्या-1 की लापरवाही और चूक के कारण घातक चोटें आईं। इसलिए यह मुद्दा प्रतिवादियों के खिलाफ और याचिकाकर्ताओं के पक्ष में तय किया जाता है।’’
न्यायाधिकरण ने कहा कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदार वाहन के चालक की ‘‘गंभीर लापरवाही और चूक’’ के कारण शौकीन को जानलेवा चोटें आईं।
न्यायाधिकरण के अनुसार, 11 अप्रैल 2022 को शौकीन बड़ौत से अपने गांव सुल्तानपुर, हताना जाने के लिए एक टेंपो में यात्री के रूप में सफर कर रहे थे। इसी दौरान बागपत जिले में तेज गति से और विपरीत दिशा में आ रही कार ने टेंपो को सामने से टक्कर मार दी। इस टक्कर में शौकीन को गंभीर चोटें आईं और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।
न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी के उस दावे को खारिज कर दिया कि शौकीन खुद टेंपो चला रहे थे और हादसे के लिए 50 प्रतिशत तक जिम्मेदार थे। न्यायाधिकरण ने प्रत्यक्षदर्शी नवीन की गवाही, प्राथमिकी, घटनास्थल का नक्शा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों पर भरोसा करते हुए निष्कर्ष निकाला कि हादसा कार चालक नीरज पांचाल की तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुआ। मुआवजे की गणना के लिए न्यायाधिकरण ने यह स्वीकार किया कि शौकीन ‘साहिबा क्रिएशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते थे और मृत्यु के समय उनकी मासिक आय 19,500 रुपये थी।
न्यायाधिकरण ने उनकी भविष्य की आय में संभावित वृद्धि के मद में 50 प्रतिशत राशि जोड़ी और व्यक्तिगत खर्चों के लिए उनकी आय का पांचवां हिस्सा घटाया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उनकी पत्नी, चार नाबालिग बच्चे और माता-पिता उन पर आश्रित थे। न्यायाधिकरण ने विभिन्न मदों के तहत परिवार को कुल 51.45 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
साथ ही बीमा कंपनी को 30 दिनों के भीतर यह राशि जमा करने का निर्देश दिया। निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर देरी की अवधि के लिए बीमा कंपनी को 12 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा।

