भिंड के वन मंडल में अधिकारियों के बीच चल रहा विवाद अब एसडीओ रामकुमार की संतान संबंधी जानकारी को लेकर की गई शिकायत तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता अनिल कुमार ने मुख्य वन संरक्षक ग्वालियर और वन मंडल अधिकारी भिंड को आवेदन देकर सेवा रिकॉर्ड और समग्र परिवार आईडी में दर्ज जानकारी की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का दावा है कि रामकुमार की पांच संतान हैं, जबकि शासकीय सेवा रिकॉर्ड में एक बेटी का नाम दर्ज है। वहीं समग्र परिवार आईडी में दो अन्य बेटियों के नाम दर्ज होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नियुक्ति के समय संतान संबंधी पूरी जानकारी शासन से छिपाई गई थी। सेवा रिकॉर्ड और परिवार आईडी में अलग-अलग जानकारी का दावा शिकायत के अनुसार रामकुमार के सेवा रिकॉर्ड में शिवांगी अरोलिया का नाम दर्ज है। उनकी जन्मतिथि 17 सितंबर 2000 बताई गई है। वहीं समग्र परिवार आईडी क्रमांक 50939813 में हिमांशी अरोलिया और वान्या अरोलिया के नाम दर्ज होने का दावा शिकायतकर्ता ने किया है। शिकायतकर्ता ने दो अन्य बेटियों के होने का भी दावा किया है। इसके समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच में शामिल करने की मांग की गई है। 2009 में वनक्षेत्रपाल पद पर नियुक्ति का उल्लेख शिकायत में कहा गया है कि रामकुमार को वर्ष 2009 में वनक्षेत्रपाल पद पर नियुक्ति मिली थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नियुक्ति के समय संतान संबंधी वास्तविक जानकारी छिपाई गई। इसी आधार पर उन्होंने नियुक्ति के समय पात्रता और सेवा रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, केवल शिकायत में लगाए गए आरोपों से यह साबित नहीं होता कि जानकारी वास्तव में छिपाई गई थी। इसका तथ्यात्मक निर्धारण संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद ही होगा। तीसरी संतान के नियम का दिया हवाला शिकायतकर्ता ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के प्रावधानों का हवाला दिया है। मध्यप्रदेश की मौजूदा भर्ती नियम पुस्तिकाओं में भी यह प्रावधान दर्ज है कि सामान्य तौर पर ऐसे अभ्यर्थी नियुक्ति के पात्र नहीं होते जिनकी दो से अधिक जीवित संतान हैं और उनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हुआ हो। नियम में कुछ अपवाद भी दिए गए हैं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि सेवा रिकॉर्ड, समग्र परिवार आईडी और अन्य सरकारी दस्तावेजों का मिलान कराया जाए। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। SDO बोले- मीडिया को इस बारे में जानकारी नहीं दे सकते दैनिक भास्कर ने शिकायत को लेकर एसडीओ रामकुमार से उनका पक्ष जाना। उन्होंने शिकायत किए जाने की बात स्वीकार की। संतान की संख्या और सेवा रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी के अलावा किसी अन्य संतान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट जानकारी देने से इनकार कर दिया। रामकुमार ने कहा कि वे मीडिया को इस तरह की व्यक्तिगत जानकारी नहीं बता सकते। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया स्वतंत्र है और उसे जो प्रकाशित करना है, वह लिख सकता है। एक्सपर्ट व्यू: जांच के बाद ही तय होगा नियम लागू होता है या नहीं अधिवक्ता हिमांशु शर्मा के अनुसार मध्यप्रदेश में सरकारी नियुक्तियों से जुड़े नियमों में दो से अधिक जीवित संतान और 26 जनवरी 2001 के बाद जन्मी संतान से संबंधित प्रावधान है। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग दस्तावेजों के आधार पर जांच कर सकता है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि सेवा के दौरान तीसरी संतान से जुड़े मामलों में विभागीय जांच और नोटिस जैसी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। हालांकि, किसी कर्मचारी के मामले में अंतिम कार्रवाई संबंधित नियम, परिस्थितियों और विभागीय जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

