मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत अमृतसर स्थित श्री दरबार साहिब में माथा टेकने गए लुधियाना के गांव फतेहगढ़ गुजरां के बुजुर्ग चमन लाल अपने साथियों से बिछड़ गए। चमन लाल की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, जिस कारण उन्हें बातें याद नहीं रहतीं। साथियों से बिछड़ने के बाद वे भटकते हुए अमृतसर रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से बिहार जाने वाली ट्रेन में बैठकर सीधे गया पहुंच गए। बुजुर्ग के पोते उन्हें अमृतसर की गली-गली में ढूंढते रहे। जब दादा नहीं मिले, तो उन्होंने अमृतसर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। गया रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद बुजुर्ग जब इधर-उधर भटक रहे थे, तब वहां से गुजर रहे नीरज की नजर उन पर पड़ी। नीरज ने दरियादिली दिखाते हुए उन्हें अपने घर ले जाकर आसरा दिया। चार दिन तक अपने पास रखा और बुजुर्ग से उनके घर का पता पूछते रहे, लेकिन बुजुर्ग को सिर्फ अपने गांव का नाम याद था। नीरज ने चैटजीपीटी और इंटरनेट के माध्यम से गांव की लोकेशन निकाली और बुजुर्ग को लेकर शनिवार देर शाम उनके गांव पहुंच गए। दादा के सही-सलामत घर पहुंचने पर पोता भावुक होकर रोने लगा और उसने हाथ जोड़कर नीरज का धन्यवाद किया। बुजुर्ग के बिछड़ने से घर पहुंचने तक की पूरी कहानी सिलसिलेवार जानिए…

