WHO और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें कैसे घर के अंदर मौजूद रेडॉन गैस बढ़ा सकती है फेफड़ों के कैंसर का खतरा

WHO और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें कैसे घर के अंदर मौजूद रेडॉन गैस बढ़ा सकती है फेफड़ों के कैंसर का खतरा

Redon Gas Side Effect: जब भी हम फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला ख्याल धूम्रपान यानी सिगरेट या बीड़ी पीने का आता है। हम अक्सर मानते हैं कि जो लोग धूम्रपान नहीं करते, वे इस जानलेवा बीमारी से बिल्कुल सुरक्षित हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर के बंद कमरों की हवा में एक ऐसा अनदेखा और गंधहीन खतरा तैर रहा हो सकता है, जो धूम्रपान न करने वालों में भी फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण बनता है? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) की रिपोर्ट्स के अनुसार, Redon Gas (रेडॉन गैस) एक ऐसा साइलेंट किलर है जो धीरे-धीरे हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। आइए समझते हैं कि रेडॉन गैस क्या है, यह हमारे घरों में कैसे दाखिल होती है, शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाती है और इससे बचने के क्या उपाय हैं।

क्या है रेडॉन गैस (Radon Gas)?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, रेडॉन एक प्राकृतिक रूप से बनने वाली रेडियोधर्मी (Radioactive) गैस है। यह जमीन के नीचे मौजूद प्राकृतिक यूरेनियम, थोरियम और रेडियम जैसे तत्वों के धीरे-धीरे टूटने और सड़ने से बनती है। इस गैस की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसका कोई रंग नहीं होता, कोई गंध (महक) नहीं होती और न ही इसका कोई स्वाद होता है। यानी आप बिना जाने या महसूस किए हर दिन सांस के जरिए इसे अपने शरीर के अंदर खींच रहे हो सकते हैं। खुली हवा में यह गैस बाहर निकलकर बहुत कम मात्रा में फैल जाती है, इसलिए बाहर इससे कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन जब यह गैस घरों, बेसमेंट या बंद इमारतों के अंदर जमा होने लगती है, तो इसका स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है।

घर के अंदर कैसे पहुंचती है यह अदृश्य गैस?

रेडॉन गैस जमीन के अंदर मिट्टी और चट्टानों से निकलती है। घरों के अंदर का हवा का दबाव जमीन के मुकाबले थोड़ा कम होता है, इसलिए यह घर के नीचे की जमीन से खिंचकर अंदर आने लगती है। यह गैस मुख्य रूप से इन रास्तों से घर में दाखिल होती है;

  • फर्श और दीवारों की दरारें।
  • पाइपों के आसपास की जगह।
  • बेसमेंट और बंद कमरे।
  • भूजल (Groundwater)।

फेफड़ों के कैंसर का कारण कैसे बनती है रेडॉन?

जब हम रेडॉन गैस से प्रभावित कमरे में सांस लेते हैं, तो इसके छोटे-छोटे रेडियोधर्मी कण (Radioactive Particles) हवा के साथ हमारे फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं। फेफड़ों में जाकर ये कण लगातार हल्की रेडिएशन (विकिरण) छोड़ते हैं। लंबे समय तक (कई सालों तक) इस रेडिएशन के संपर्क में रहने से फेफड़ों की अंदरूनी कोशिकाओं (Cells) का डीएनए (DNA) क्षतिग्रस्त होने लगता है। जब कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो यह धीरे-धीरे फेफड़ों के कैंसर का रूप ले लेती है। WHO के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में फेफड़ों के कैंसर के कुल मामलों में से लगभग 3% से 14% तक मामले रेडॉन गैस के संपर्क में आने के कारण होते हैं। धूम्रपान न करने वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर का यह सबसे प्रमुख कारण है, जबकि सिगरेट पीने वाले लोगों में यदि वे रेडॉन के संपर्क में भी आते हैं, तो कैंसर का खतरा 25 गुना अधिक बढ़ जाता है।

क्या शरीर में इसके तुरंत कोई लक्षण दिखाई देते हैं?

रेडॉन गैस के संपर्क में आने से तुरंत कोई छींक, खांसी, सिरदर्द या जलन महसूस नहीं होती। यही कारण है कि लोग सालों तक इसके खतरे से बेखबर रहते हैं। इसके लक्षण तब सामने आते हैं जब फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंच चुका होता है या कैंसर विकसित हो जाता है;

  • लगातार रहने वाली खांसी जो समय के साथ बिगड़ती जाए।
  • छाती में दर्द या भारीपन महसूस होना।
  • सांस लेने में तकलीफ या बिना मेहनत किए सांस फूलना।
  • खांसी के साथ बलगम में खून आना।
  • बिना किसी कारण के तेजी से वजन घटना और हर समय थकान रहना।

घर में रेडॉन के खतरे को कम करने के तरीके

  • वेंटिलेशन (हवा की आवाजाही) बेहतर बनाएं।
  • दरारों और सुराखों को सील करें।
  • बेसमेंट की सफाई और हवा का ध्यान रखें।
  • धूम्रपान पूरी तरह बंद करें।
  • रेडॉन टेस्टिंग और मिटिगेशन।

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