मधेपुरा में 16 साल पुराने दहेज हत्या के एक मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को पति समेत चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। एडीजे-3 रघुवीर प्रसाद की कोर्ट ने श्रीनगर थाना क्षेत्र के मधुबनी गांव के रहने वाले रमेश मेहता को उम्रकैद और 40 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी। इसके साथ ही, धारा 304ए के तहत 10 साल की सजा और 20 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपी महानंद मेहता, प्रदीप मेहता और मनोज मेहता को 3-3 साल की सजा और 10-10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह जानकारी सरकारी वकील रमेश कुमार मेहता ने दी। किरासन तेल डालकर जला दिया महिला के पिता सत्यनारायण मेहता ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने अपनी बेटी कारी देवी की शादी साल 2005 में श्रीनगर थाना क्षेत्र के मधुबनी निवासी रमेश मेहता से की थी। शादी के बाद करीब पांच साल तक दोनों साथ रहे। उनका एक साल का बेटा भी था। आरोप है कि ससुराल वाले बाइक और भैंस की मांग को लेकर कारी देवी को परेशान करते थे। 30 सितंबर 2010 की सुबह करीब 4 बजे उन्हें बेटी के ससुराल से फोन पर खबर मिली कि कारी देवी और उसके एक साल के बेटे को रात में किरासन तेल डालकर जला दिया गया है। गंभीर रूप से जलने के कारण मौत खबर मिलने पर सत्यनारायण मेहता अपने बेटे और दूसरे लोगों के साथ बेटी के ससुराल पहुंचे। वहां मालूम हुआ कि घटना से एक दिन पहले कारी देवी का अपनी सास से झगड़ा हुआ था। रात में सास और अन्य लोगों ने मिलकर कारी देवी पर किरासन तेल छिड़क कर जला दिया था। जिससे वह बुरी तरह जल गई और उसकी मौत हो गई। उसका एक साल का बेटा भी गंभीर रूप से जल गया था, बाद में उसकी भी मौत हो गई। मायके वालों के पहुंचने से पहले लाशों को चुपचाप जलाने की कोशिश की जा रही थी। विरोध करने पर उन्हें धमकाकर वहां से भगा दिया गया। मामले में कुल सात आरोपी बनाए गए थे। इनमें तीन आरोपियों को पूर्व में ही सजा सुनाई जा चुकी है। वर्तमान में चार आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चला, जिसमें अदालत ने पति रमेश मेहता, महानंद मेहता, प्रदीप मेहता और मनोज मेहता को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। मधेपुरा में 16 साल पुराने दहेज हत्या के एक मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को पति समेत चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। एडीजे-3 रघुवीर प्रसाद की कोर्ट ने श्रीनगर थाना क्षेत्र के मधुबनी गांव के रहने वाले रमेश मेहता को उम्रकैद और 40 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी। इसके साथ ही, धारा 304ए के तहत 10 साल की सजा और 20 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपी महानंद मेहता, प्रदीप मेहता और मनोज मेहता को 3-3 साल की सजा और 10-10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह जानकारी सरकारी वकील रमेश कुमार मेहता ने दी। किरासन तेल डालकर जला दिया महिला के पिता सत्यनारायण मेहता ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने अपनी बेटी कारी देवी की शादी साल 2005 में श्रीनगर थाना क्षेत्र के मधुबनी निवासी रमेश मेहता से की थी। शादी के बाद करीब पांच साल तक दोनों साथ रहे। उनका एक साल का बेटा भी था। आरोप है कि ससुराल वाले बाइक और भैंस की मांग को लेकर कारी देवी को परेशान करते थे। 30 सितंबर 2010 की सुबह करीब 4 बजे उन्हें बेटी के ससुराल से फोन पर खबर मिली कि कारी देवी और उसके एक साल के बेटे को रात में किरासन तेल डालकर जला दिया गया है। गंभीर रूप से जलने के कारण मौत खबर मिलने पर सत्यनारायण मेहता अपने बेटे और दूसरे लोगों के साथ बेटी के ससुराल पहुंचे। वहां मालूम हुआ कि घटना से एक दिन पहले कारी देवी का अपनी सास से झगड़ा हुआ था। रात में सास और अन्य लोगों ने मिलकर कारी देवी पर किरासन तेल छिड़क कर जला दिया था। जिससे वह बुरी तरह जल गई और उसकी मौत हो गई। उसका एक साल का बेटा भी गंभीर रूप से जल गया था, बाद में उसकी भी मौत हो गई। मायके वालों के पहुंचने से पहले लाशों को चुपचाप जलाने की कोशिश की जा रही थी। विरोध करने पर उन्हें धमकाकर वहां से भगा दिया गया। मामले में कुल सात आरोपी बनाए गए थे। इनमें तीन आरोपियों को पूर्व में ही सजा सुनाई जा चुकी है। वर्तमान में चार आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चला, जिसमें अदालत ने पति रमेश मेहता, महानंद मेहता, प्रदीप मेहता और मनोज मेहता को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

