सतना जिले के चित्रकूट नगर परिषद क्षेत्र के थरपहाड़ गांव में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नहीं होने का मामला सामने आया है। शुक्रवार को 28 वर्षीय गोरे सिंह की अचानक तबीयत खराब होने पर परिजन और ग्रामीण उन्हें झोली और टाट में बांधकर कंधे पर टांगकर करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले गए। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। घटना का वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उल्टी-दस्त से कमजोर हुए गोरे सिंह जानकारी के मुताबिक, गोरे सिंह को लगातार उल्टी-दस्त हो रहे थे। इससे उनकी हालत कमजोर हो गई थी। गांव तक पक्का रास्ता नहीं होने के कारण परिजन उन्हें सीधे वाहन से अस्पताल नहीं ले जा सके। इसके बाद ग्रामीणों ने मरीज को झोली और टाट में बांधा और कंधे पर टांगकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। मुख्य सड़क पर पहुंचने के बाद उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार और दवा देने के बाद उन्हें वापस घर लाया गया। घर लौटते समय भी ग्रामीणों को गोरे सिंह को कंधे पर लेकर करीब डेढ़ किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ा। मरीज, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को उठाकर ले जाना मजबूरी ग्रामीणों का कहना है कि थरपहाड़ में यह पहली घटना नहीं है। गांव में जब भी किसी मरीज, बुजुर्ग या गर्भवती महिला की तबीयत खराब होती है, तो उन्हें इसी तरह कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। बारिश के दिनों में कच्चे और खराब रास्ते की स्थिति और बिगड़ जाती है। टेंडर की बात, मौके पर अब तक काम शुरू नहीं ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण को लेकर अधिकारी लंबे समय से काम शुरू होने की बात कह रहे हैं। टेंडर होने की जानकारी भी दी जाती है, लेकिन मौके पर अब तक न ठेकेदार पहुंचा और न ही काम शुरू हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार लोगों से सड़क निर्माण को लेकर सवाल करने पर भोपाल स्तर पर मंजूरी अटकी होने की बात कहकर मामला टाल दिया जाता है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि आजादी के इतने साल बाद भी गांव के लोगों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिल सकी है।

