बांका जिले में मछली पालन में लगी पूंजी और मेहनत अब प्राकृतिक आपदा या दूसरे अप्रत्याशित खतरों से सुरक्षित रहेगी। जिले के मछली पालकों को अपने व्यवसाय को सुरक्षित रखने के लिए जल कृषि बीमा का लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि-सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत पारंपरिक तालाबों के साथ आधुनिक मछली पालन इकाइयों को भी बीमा सुरक्षा देने की पहल शुरू की गई है। इसमें बायोफ्लाक और आरएएस जैसी आधुनिक तकनीक से चलने वाली इकाइयों के साथ पानी में मौजूद मछलियों की खड़ी फसल और मछली के बीज को भी बीमा के दायरे में शामिल किया गया है। नुकसान होने पर मिलेगी आर्थिक मदद जिले में मछली पालन से जुड़े किसानों और मछुआरों की संख्या को देखते हुए इस योजना को अहम माना जा रहा है। तालाब और पोखर में मछली पालन करने वाले किसानों को कई बार अप्रत्याशित हालात में नुकसान का डर रहता है। ऐसे में बीमा सुरक्षा मिलने से मछली पालकों को नुकसान होने पर आर्थिक मदद मिलेगी। विभाग की तरफ से ज्यादा से ज्यादा मछली किसानों को योजना से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। मछली विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जल कृषि बीमा सिर्फ पारंपरिक तालाबों तक सीमित नहीं है। निवेश की सुरक्षा का रहेगा भरोसा जिले में तालाब और पोखर में मछली पालन करने वाले किसानों के साथ बायोफ्लाक इकाई चलाने वालों को भी इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा, आरएएस यानी रिसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम जैसी आधुनिक मछली पालन प्रणाली को भी बीमा सुरक्षा में शामिल किया गया है। पानी में मौजूद मछलियों और मछली के बीज के बीमा में शामिल होने से आधुनिक तरीके से मछली पालन करने वाले किसानों को अपने निवेश की सुरक्षा का भरोसा रहेगा। एक हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश मछली निदेशालय ने जिला स्तर पर योजना को अच्छे से लागू करने का निर्देश दिया है। जिला मछली कार्यालय को ज्यादा से ज्यादा मछली पालकों को जल कृषि बीमा से जोड़ने के लिए कैंप लगाने और जरूरी कार्रवाई करने को कहा गया है। साथ ही, योजना की प्रगति की पूरी रिपोर्ट एक हफ्ते के अंदर देने का निर्देश भी दिया है। इससे जिले में योजना के तहत कितने मत्स्य पालकों को जोड़ा गया है और आगे कितने किसानों को लाभ देने की तैयारी है, इसकी स्थिति स्पष्ट होगी। बांका जिले में मछली पालन में लगी पूंजी और मेहनत अब प्राकृतिक आपदा या दूसरे अप्रत्याशित खतरों से सुरक्षित रहेगी। जिले के मछली पालकों को अपने व्यवसाय को सुरक्षित रखने के लिए जल कृषि बीमा का लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि-सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत पारंपरिक तालाबों के साथ आधुनिक मछली पालन इकाइयों को भी बीमा सुरक्षा देने की पहल शुरू की गई है। इसमें बायोफ्लाक और आरएएस जैसी आधुनिक तकनीक से चलने वाली इकाइयों के साथ पानी में मौजूद मछलियों की खड़ी फसल और मछली के बीज को भी बीमा के दायरे में शामिल किया गया है। नुकसान होने पर मिलेगी आर्थिक मदद जिले में मछली पालन से जुड़े किसानों और मछुआरों की संख्या को देखते हुए इस योजना को अहम माना जा रहा है। तालाब और पोखर में मछली पालन करने वाले किसानों को कई बार अप्रत्याशित हालात में नुकसान का डर रहता है। ऐसे में बीमा सुरक्षा मिलने से मछली पालकों को नुकसान होने पर आर्थिक मदद मिलेगी। विभाग की तरफ से ज्यादा से ज्यादा मछली किसानों को योजना से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। मछली विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जल कृषि बीमा सिर्फ पारंपरिक तालाबों तक सीमित नहीं है। निवेश की सुरक्षा का रहेगा भरोसा जिले में तालाब और पोखर में मछली पालन करने वाले किसानों के साथ बायोफ्लाक इकाई चलाने वालों को भी इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा, आरएएस यानी रिसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम जैसी आधुनिक मछली पालन प्रणाली को भी बीमा सुरक्षा में शामिल किया गया है। पानी में मौजूद मछलियों और मछली के बीज के बीमा में शामिल होने से आधुनिक तरीके से मछली पालन करने वाले किसानों को अपने निवेश की सुरक्षा का भरोसा रहेगा। एक हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश मछली निदेशालय ने जिला स्तर पर योजना को अच्छे से लागू करने का निर्देश दिया है। जिला मछली कार्यालय को ज्यादा से ज्यादा मछली पालकों को जल कृषि बीमा से जोड़ने के लिए कैंप लगाने और जरूरी कार्रवाई करने को कहा गया है। साथ ही, योजना की प्रगति की पूरी रिपोर्ट एक हफ्ते के अंदर देने का निर्देश भी दिया है। इससे जिले में योजना के तहत कितने मत्स्य पालकों को जोड़ा गया है और आगे कितने किसानों को लाभ देने की तैयारी है, इसकी स्थिति स्पष्ट होगी।

