अलवर मेयर चुनाव: भाजपा-कांग्रेस में बाड़ाबंदी तेज, ऋषिकेश और बस्सी में पहरा

अलवर मेयर चुनाव: भाजपा-कांग्रेस में बाड़ाबंदी तेज, ऋषिकेश और बस्सी में पहरा

अलवर नगर निगम में मेयर पद के चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्षदों को एकजुट रखने में जुटी हैं। चुनाव में एक-एक वोट महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी वजह से दोनों दलों ने अपने अधिकांश पार्षदों को अलग-अलग जगहों पर ठहरा रखा है। अब चर्चा है कि बाड़ाबंदी की जगह भी बदली जा सकती है।

भाजपा ने अपने 23 पार्षदों को उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित एक रिजॉर्ट में रखा हुआ है। पार्टी के कुछ निर्दलीय पार्षदों के भी उसके साथ होने की बात कही जा रही है। वहीं भाजपा के पांच पार्षद अलवर में बताए जा रहे हैं। ऋषिकेश में ठहरे पार्षदों पर नजर रखने के लिए चार सदस्यों की टीम लगाई गई है।

ज्यादातर समय रिजॉर्ट में

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, रिजॉर्ट में ठहरे पार्षदों को बाहर जाने की अनुमति नहीं है। वे रिजॉर्ट परिसर में ही घूम सकते हैं या कमरों में रह सकते हैं। अलवर में मौजूद पार्षदों से भी उनका सीधा संपर्क सीमित रखा गया है। पार्टी पदाधिकारी जरूरत पड़ने पर फोन के जरिए संदेश या बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में पार्षदों का ज्यादातर समय रिजॉर्ट में ही गुजर रहा है।

इधर, कांग्रेस ने अपने 19 पार्षदों को जयपुर के पास बस्सी के एक होटल में ठहरा रखा है। कांग्रेस ने चार पार्षदों को अलवर में ही रखा है। इन्हें स्थानीय स्तर पर संपर्क साधने और समर्थन जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस के खेमे में भी कुछ निर्दलीय पार्षदों के होने की चर्चा है।

निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी अहम

मेयर चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले के साथ निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। दोनों दल अपने-अपने पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए लगातार संपर्क कर रहे हैं। इसी कारण बाड़ाबंदी में शामिल पार्षदों और उनके ठहरने की जगह को लेकर गोपनीयता बरती जा रही है।

कोई औपचारिक घोषणा नहीं

बताया जा रहा है कि दोनों पार्टियों ने तीन से पांच पार्षदों को अलवर में छोड़ा है, ताकि जरूरत के अनुसार दूसरे पार्षदों और निर्दलीयों से संपर्क किया जा सके। आने वाले दिनों में पार्षदों की बाड़ाबंदी की जगह बदलने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में दोनों दलों की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

क्रॉस वोटिंग की आशंका

मेयर चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंका के चलते पार्टियां अपने पार्षदों पर नजर रख रही हैं। निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से चुनावी गणित बदल सकता है। इसलिए दोनों खेमे निर्दलीयों से संपर्क बनाए रखने में जुटे हैं और समर्थन जुटा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *