Lichen Sclerosus Symptoms: कई बार शरीर की त्वचा पर अचानक हल्के सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं या किसी खास हिस्से पर बहुत तेज खुजली होने लगती है। अक्सर लोग इसे दाद, खाज, एलर्जी या फिर सामान्य सूखापन मानकर कोई भी एंटी-फंगल क्रीम या तेल लगाकर छोड़ देते हैं। लेकिन अगर यह खुजली और सफेद निशान धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं, तो यह केवल कोई मामूली एलर्जी नहीं है। मेडिकल भाषा में इस को लाइकेन स्क्लेरोसस (Lichen Sclerosus) कहा जाता है। यह त्वचा से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में जानकारी की कमी के कारण लोग इसे सही समय पर पहचान नहीं पाते। सही जानकारी न होने की वजह से कई बार मरीज काफी समय तक परेशान रहते हैं। आइए जानते हैं कि लाइकेन स्क्लेरोसस क्या है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और इससे कैसे राहत पाई जा सकती है।
आखिर क्या है लाइकेन स्क्लेरोसस?
डर्मनेट के अनुसार, लाइकेन स्क्लेरोसस त्वचा से जुड़ा एक दीर्घकालिक (Long-term) विकार है। इसमें त्वचा की ऊपरी परत बहुत पतली, झुर्रीदार और सफेद रंग की होने लगती है। यह समस्या शरीर के किसी भी हिस्से की त्वचा पर हो सकती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह जननांगों (Genital areas) और उसके आसपास की नाजुक त्वचा को प्रभावित करती है। यह बीमारी महिलाओं, पुरुषों और बच्चों किसी को भी हो सकती है, हालांकि रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद महिलाओं में इसके मामले ज्यादा देखे जाते हैं। सबसे राहत की बात यह है कि यह बीमारी छुआछूत (Contagious) वाली नहीं है। यानी यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में छूने, साथ रहने या कपड़ों के संपर्क से बिल्कुल नहीं फैलती।
लक्षणों को कैसे पहचानें?
लाइकेन स्क्लेरोसस के लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं। शुरुआत में यह बहुत सामान्य दिखते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ध्यान न देने पर परेशानी बढ़ा सकते हैं। इसके प्रमुख लक्षण नीचे दिए गए हैं;
- तेज और असहनीय खुजली।
- त्वचा पर सफेद धब्बे।
- त्वचा का पतला और नाजुक होना।
- दर्द और जलन महसूस होना।
- त्वचा पर दरारें और छालें।
यह बीमारी क्यों होती है?
मेयो क्लिनिक के अनुसार, लाइकेन स्क्लेरोसस का कोई एक सटीक कारण अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। हालांकि, इसे मुख्य रूप से एक ऑटोइम्यून समस्या (Autoimmune Condition) माना जाता है। जब हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) गलती से शरीर की अपनी ही स्वस्थ त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है, तब यह स्थिति पैदा होती है। इसके अलावा, शरीर में हार्मोनल बदलाव, त्वचा पर किसी तरह की पुरानी चोट या आनुवंशिक (Genetic) कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
क्या है इसका सही इलाज और बचाव?
अगर इस बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में ही हो जाए, तो इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है और त्वचा को हमेशा के लिए होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। डॉक्टर की सलाह पर क्रीम या ऑइंटमेंट (Corticosteroid Creams) इसके इलाज का सबसे असरदार तरीका हैं। यह सूजन और खुजली को तुरंत कम करती हैं। इसके बचाव के लिए ये उपाय अपना सकते हैं;
- प्रभावित हिस्से पर बिना खुशबू वाला माइल्ड मॉइश्चराइजर या पेट्रोलियम जेली लगाएं।
- हमेशा ढीले-ढाले और सूती अंदरूनी कपड़े पहनें ।
- कड़े साबुन से बचें।

