खगड़िया के नगर पंचायत परबत्ता में आयोजित सहयोग शिविर में कम लोग पहुंचे। इसके बाद शिविर के प्रचार-प्रसार की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। कई वार्ड सदस्यों ने आरोप लगाया है कि शिविर की जानकारी आम लोगों तक ठीक से नहीं पहुंच पाई, जिससे कई जरूरतमंद इसका फायदा नहीं ले पाए। वार्ड सदस्यों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए सिर्फ शिविर लगाना काफी नहीं है। शिविर की तारीख, जगह और मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी हर वार्ड के लोगों तक समय पर पहुंचनी चाहिए। वार्ड सदस्यों को दी गई थी आयोजन की सूचना – EO इसके लिए मुनादी, पोस्टर-बैनर और सोशल मीडिया जैसे प्रचार माध्यमों का इस्तेमाल करना जरूरी है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि अगर ठीक से प्रचार किया जाता तो शिविर में ज्यादा जरूरतमंद लोग आते। कम लोगों की मौजूदगी से यह सवाल उठ रहा है कि शिविर की जानकारी असल लाभार्थियों तक कितनी पहुंची। वहीं, नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी स्नेहलता ने बताया कि सहयोग शिविर के आयोजन की सूचना वार्ड सदस्यों को दी गई थी। कैंप में कम भीड़ को लेकर लोगों ने उठाए सवाल प्रशासन के इस बयान के बाद अब यह चर्चा हो रही है कि वार्ड सदस्यों तक जानकारी पहुंचने के बाद उसे आम जनता तक पहुंचाने का तरीका कितना असरदार रहा। किसी भी जनकल्याणकारी शिविर की सफलता सिर्फ उसके आयोजन से नहीं मापी जाती। बल्कि यह भी देखा जाता है कि कितने सही और जरूरतमंद लोगों तक उसका फायदा पहुंचा। ऐसे में सहयोग शिविर में कम भीड़ ने प्रचार-प्रसार की व्यवस्था की असरदारता पर बहस छेड़ दी है। खगड़िया के नगर पंचायत परबत्ता में आयोजित सहयोग शिविर में कम लोग पहुंचे। इसके बाद शिविर के प्रचार-प्रसार की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। कई वार्ड सदस्यों ने आरोप लगाया है कि शिविर की जानकारी आम लोगों तक ठीक से नहीं पहुंच पाई, जिससे कई जरूरतमंद इसका फायदा नहीं ले पाए। वार्ड सदस्यों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए सिर्फ शिविर लगाना काफी नहीं है। शिविर की तारीख, जगह और मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी हर वार्ड के लोगों तक समय पर पहुंचनी चाहिए। वार्ड सदस्यों को दी गई थी आयोजन की सूचना – EO इसके लिए मुनादी, पोस्टर-बैनर और सोशल मीडिया जैसे प्रचार माध्यमों का इस्तेमाल करना जरूरी है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि अगर ठीक से प्रचार किया जाता तो शिविर में ज्यादा जरूरतमंद लोग आते। कम लोगों की मौजूदगी से यह सवाल उठ रहा है कि शिविर की जानकारी असल लाभार्थियों तक कितनी पहुंची। वहीं, नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी स्नेहलता ने बताया कि सहयोग शिविर के आयोजन की सूचना वार्ड सदस्यों को दी गई थी। कैंप में कम भीड़ को लेकर लोगों ने उठाए सवाल प्रशासन के इस बयान के बाद अब यह चर्चा हो रही है कि वार्ड सदस्यों तक जानकारी पहुंचने के बाद उसे आम जनता तक पहुंचाने का तरीका कितना असरदार रहा। किसी भी जनकल्याणकारी शिविर की सफलता सिर्फ उसके आयोजन से नहीं मापी जाती। बल्कि यह भी देखा जाता है कि कितने सही और जरूरतमंद लोगों तक उसका फायदा पहुंचा। ऐसे में सहयोग शिविर में कम भीड़ ने प्रचार-प्रसार की व्यवस्था की असरदारता पर बहस छेड़ दी है।

