खगड़िया जिले में गंगा समेत सभी प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार घट रहा है। इसके बाद बाढ़ राहत व्यवस्था में बदलाव किए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे सामुदायिक किचनों को धीरे-धीरे बंद किया जा रहा है। अब तक जिले में कुल 33 सामुदायिक किचन बंद हो चुके हैं। इनमें परबत्ता के 10, खगड़िया सदर के 10, गोगरी के 10 और मानसी के 3 सामुदायिक किचन शामिल हैं। पानी निकलने वाले इलाकों में किचन बंद प्रशासन के मुताबिक, जिन इलाकों से बाढ़ का पानी निकल गया है और जनजीवन सामान्य हो रहा है, वहां सामुदायिक किचन बंद किए जा रहे हैं। वहीं, जिन क्षेत्रों में अभी भी बाढ़ का पानी जमा है, वहां प्रभावित परिवारों की जरूरत के हिसाब से किचन चलते रहेंगे। परबत्ता के अंचल अधिकारी हरिनाथ राम ने बताया कि रविवार को प्रखंड के 7 राहत शिविर बंद कर दिए गए हैं। सोमवार को भी जमीनी हालात और जरूरत के अनुसार दूसरे शिविरों को बंद करने का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि जिन इलाकों में अभी भी बाढ़ का पानी फंसा हुआ है, वहां सामुदायिक किचन फिलहाल जारी रहेंगे। इससे प्रभावित परिवारों को भोजन की दिक्कत नहीं होगी। गोगरी में 7 किचन बंद, 4 अभी चल रहे गोगरी प्रखंड में बाढ़ के दौरान 12 सामुदायिक किचन चलाए गए थे। जलस्तर घटने के बाद इनमें से सात बंद कर दिए गए हैं। अभी भी जरूरत वाले क्षेत्रों में चार सामुदायिक किचन और एक राहत शिविर से प्रभावितों को भोजन और जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं। आज भी जरूरत के हिसाब से कुछ शिविर बंद किए जाएंगे। पानी से घिरे गांवों में किचन जारी रखने की मांग बन्त्री और झिकटिया पंचायत के कई गांवों में बाढ़ का पानी अभी भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का जलस्तर तो घट रहा है, लेकिन कई घर और गांव अभी भी पानी से घिरे हैं। ऐसे में सामुदायिक किचन बंद होने से भोजन का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीण इन इलाकों में किचन जारी रखने की मांग कर रहे हैं। प्रभावित लोगों ने पानी पूरी तरह निकलने तक कुछ और दिनों के लिए सामुदायिक किचन चलाने की मांग की है। जरूरत के हिसाब से जारी रहेगी राहत व्यवस्था प्रशासन का कहना है कि राहत व्यवस्था का निर्णय लगातार जलस्तर और जमीनी स्थिति की समीक्षा के आधार पर लिया जा रहा है। जहां जरूरत होगी, वहां किचन जारी रखा जाएगा और स्थिति सामान्य होने पर चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा। खगड़िया जिले में गंगा समेत सभी प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार घट रहा है। इसके बाद बाढ़ राहत व्यवस्था में बदलाव किए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे सामुदायिक किचनों को धीरे-धीरे बंद किया जा रहा है। अब तक जिले में कुल 33 सामुदायिक किचन बंद हो चुके हैं। इनमें परबत्ता के 10, खगड़िया सदर के 10, गोगरी के 10 और मानसी के 3 सामुदायिक किचन शामिल हैं। पानी निकलने वाले इलाकों में किचन बंद प्रशासन के मुताबिक, जिन इलाकों से बाढ़ का पानी निकल गया है और जनजीवन सामान्य हो रहा है, वहां सामुदायिक किचन बंद किए जा रहे हैं। वहीं, जिन क्षेत्रों में अभी भी बाढ़ का पानी जमा है, वहां प्रभावित परिवारों की जरूरत के हिसाब से किचन चलते रहेंगे। परबत्ता के अंचल अधिकारी हरिनाथ राम ने बताया कि रविवार को प्रखंड के 7 राहत शिविर बंद कर दिए गए हैं। सोमवार को भी जमीनी हालात और जरूरत के अनुसार दूसरे शिविरों को बंद करने का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि जिन इलाकों में अभी भी बाढ़ का पानी फंसा हुआ है, वहां सामुदायिक किचन फिलहाल जारी रहेंगे। इससे प्रभावित परिवारों को भोजन की दिक्कत नहीं होगी। गोगरी में 7 किचन बंद, 4 अभी चल रहे गोगरी प्रखंड में बाढ़ के दौरान 12 सामुदायिक किचन चलाए गए थे। जलस्तर घटने के बाद इनमें से सात बंद कर दिए गए हैं। अभी भी जरूरत वाले क्षेत्रों में चार सामुदायिक किचन और एक राहत शिविर से प्रभावितों को भोजन और जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं। आज भी जरूरत के हिसाब से कुछ शिविर बंद किए जाएंगे। पानी से घिरे गांवों में किचन जारी रखने की मांग बन्त्री और झिकटिया पंचायत के कई गांवों में बाढ़ का पानी अभी भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का जलस्तर तो घट रहा है, लेकिन कई घर और गांव अभी भी पानी से घिरे हैं। ऐसे में सामुदायिक किचन बंद होने से भोजन का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीण इन इलाकों में किचन जारी रखने की मांग कर रहे हैं। प्रभावित लोगों ने पानी पूरी तरह निकलने तक कुछ और दिनों के लिए सामुदायिक किचन चलाने की मांग की है। जरूरत के हिसाब से जारी रहेगी राहत व्यवस्था प्रशासन का कहना है कि राहत व्यवस्था का निर्णय लगातार जलस्तर और जमीनी स्थिति की समीक्षा के आधार पर लिया जा रहा है। जहां जरूरत होगी, वहां किचन जारी रखा जाएगा और स्थिति सामान्य होने पर चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा।

