बलिया में धान की फसल में बालियां निकलने के समय किसानों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इस अवस्था में सही पोषण और पर्याप्त नमी मिलने से दाने मोटे, चमकदार और वजनदार होते हैं, जिससे उत्पादन बेहतर होता है। कृषि विज्ञान केंद्र सोहांव के वैज्ञानिक डॉ. सोमेन्द्र सिंह ने किसानों को इस दौरान फसल की विशेष निगरानी की सलाह दी है। डॉ. सोमेन्द्र सिंह के मुताबिक धान में बालियां निकलने के समय फसल को फास्फोरस और पोटाश की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। किसानों को प्रति एकड़ 1 किलोग्राम एनपीके 0:52:34 को 150 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए। इससे तना मजबूत होता है और दानों का भराव बेहतर होता है। बोरॉन की कमी हो तो करें स्प्रे अगर खेत की मिट्टी में बोरॉन की कमी है तो एनपीके के घोल के साथ प्रति एकड़ 100 से 150 ग्राम बोरॉन (20 प्रतिशत) मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। इससे बालियों में दाने अच्छी तरह भरते हैं और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है। खेत में नमी रखें, पानी भरने से बचें धान में बालियां निकलने के समय खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है। खेत में सूखापन नहीं आने देना चाहिए, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी भी नहीं भरना चाहिए। नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव होने पर फसल में तना छेदक, पत्ती लपेटक और ब्लास्ट रोग का खतरा बढ़ सकता है। लक्षण दिखें तो तुरंत करें नियंत्रण किसानों को फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए। कीट या फंगस के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उचित कीटनाशक या फफूंदनाशक का इस्तेमाल करें। अधिक जानकारी और फसल संबंधी सलाह के लिए किसान कृषि विज्ञान केंद्र सोहांव से संपर्क कर सकते हैं।

