किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के बैनर तले किसानों ने सोमवार को पंजाब के कई कैबिनेट मंत्रियों के कार्यालयों और आवासों के बाहर धरना दिया और चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार उनकी मांगों पर बातचीत नहीं करती है तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे। केएमएम ने 12 सूत्री मांग-पत्र को लेकर पंजाब के कई मंत्रियों के आवास और कार्यालयों के बाहर धरना देने का आह्वान किया है। उनकी प्रमुख मांगों में कर्ज माफी और किसान-मजदूर आंदोलनों में भाग लेने वालों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना शामिल है।
होशियारपुर में किसानों ने कैबिनेट मंत्री रवजोत सिंह के आवास के बाहर धरना दिया। केएमएम नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि मुक्तसर में कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, संगरूर में कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा, फरीदकोट में पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां और अमृतसर में कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह के आवास के बाहर भी प्रदर्शन किए गए। होशियारपुर में विरोध प्रदर्शन केएमएम, भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) दोआबा, किसान मजदूर संघर्ष कमेटी (पिड्डी ग्रुप) और किसान मजदूर हितकारी सभा के कार्यकर्ताओं ने आयोजित किया।
बीकेयू दोआबा के प्रदेश अध्यक्ष मनजीत सिंह राय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि किसान संगठनों ने पहले ही पूरे पंजाब में उपायुक्तों को ज्ञापन सौंपे हैं और अब सरकार पर बातचीत के लिए दबाव बनाने के वास्ते मंत्रियों के कार्यालयों और आवासों के बाहर पांच दिवसीय प्रदर्शन किया जा रहा है। राय ने कहा, ‘‘अगर सरकार बातचीत से इनकार करती है तो हम 16 सितंबर को एक बैठक करके अपने अगले कदम पर फैसला करेंगे।’’
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों की अनदेखी करती रही तो संगठन रेल पटरियों और राजमार्गों को अवरुद्ध करने समेत आंदोलन को व्यापक रूप दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कदम उठाया जाता है तो जनता को होने वाली किसी भी असुविधा के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी।
राय ने बिजली कटौती का मुद्दा भी उठाया और दावा किया कि बिना पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति बाधित होने से उस महत्वपूर्ण समय में ट्यूबवेल से सिंचाई प्रभावित हो रही है, जब खड़ी फसलों को पानी की जरूरत है। उन्होंने राज्य सरकार पर कोयले की ‘‘कमी’’ को लेकर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि पर्याप्त कोयला उपलब्ध होने संबंधी मुख्यमंत्री के दावे गलत साबित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि बिजली की कमी से किसान और उद्योग दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार से बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग की। उनके 12 सूत्री मांग-पत्र में किसानों और खेत मजदूरों की पूर्ण कर्ज माफी, आत्महत्या करने वाले किसानों एवं मजदूरों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग भी शामिल है। उन्होंने बाढ़, भूजल स्तर में गिरावट तथा वायु एवं जल प्रदूषण से निपटने के लिए प्रभावी नीति बनाने और नदियों के पानी का बंटवारा नदी संबंधी सिद्धांत के अनुसार करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने बीज अधिनियम, 2025, सहकारी अधिनियम, 2026, वीबी-जी राम जी अधिनियम और विद्युत संशोधन विधेयक, 2025 के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की मांग की। उन्होंने पंजाब में प्रीपेड बिजली मीटर लगाने पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की। अन्य मांगों में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित करना, शंभू और खनौरी धरना स्थलों से कथित तौर पर जब्त या ले जाए गए वाहनों और अन्य सामान को लौटाना तथा जमीन पर खेती करने वाले सभी वर्गों के किसानों और मजदूरों को मालिकाना हक देना शामिल है।
प्रदर्शनकारियों ने किसान और मजदूर आंदोलनों के दौरान पुलिस तथा रेलवे अधिकारियों द्वारा दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग की। इनमें पराली जलाने से जुड़े मामले भी शामिल हैं। उन्होंने प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग भी की।
किसान संगठनों ने भूमि पूलिंग नीति को तत्काल वापस लेने और भारतमाला परियोजनाओं के लिए किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहित करना बंद करने की भी मांग की।

