दरभंगा की अन्नू सिंह को न्याय दिलाने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों और परिजनों ने कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर लेकर “अन्नू सिंह को न्याय दो”, “इंदिरा आईवीएफ के हत्यारे डॉक्टर श्वेता शिल्पी और सभी कर्मचारियों को गिरफ्तार करो” और “लूटेरा इंदिरा आईवीएफ को बिहार में बंद करो” जैसे नारे लगाए। कैंडल मार्च हाजमा चौराहा से शुरू होकर लहेरियासराय टावर तक पहुंचा। प्रदर्शनकारी मनीष कुमार यादव ने आरोप लगाया कि आईवीएफ सेंटर में इलाज के दौरान गर्भवती अन्नू सिंह को गलत इंजेक्शन दिए जाने के कारण उनकी और गर्भ में पल रहे बच्चों की मौत हुई। उन्होंने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच कराने, संबंधित आईवीएफ सेंटर का लाइसेंस रद्द करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। डॉक्टर ले से पहुंचे थे मृतका के भाई शुभम सिंह ने कहा कि उनकी बहन अन्नू सिंह गर्भवती थी और सामान्य प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची थीं। 29 अगस्त को बहन को बुलाया गया था और इसके बाद 5 सितंबर को नॉर्मल डिलीवरी की तारीख दी गई थी। आरोप लगाया कि एडमिट किए जाने के बाद नर्सिंग स्टाफ ने इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद बहन की हालत अचानक गंभीर हो गई। उनके मुंह और कान से खून आने लगा। आरोप है कि डॉक्टर करीब डेढ़ घंटे बाद पहुंचे। इसके बाद उनकी बहन और गर्भ में पल रहे दोनों बच्चों की मौत हो गई।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी शुभम सिंह ने डॉक्टर श्वेता शिल्पी और संबंधित अस्पताल के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि परिवार को न्याय चाहिए। उन्होंने दोषी डॉक्टर को गिरफ्तार करने और संबंधित आईवीएफ सेंटर को बंद कराने की मांग की।
कैंडल मार्च में दर्जनों लोग शामिल हुए। करीब एक किलोमीटर तक चले मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपितों की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई जल्द नहीं हुई तो आगे आंदोलन को और तेज किया जाएगा। दरभंगा की अन्नू सिंह को न्याय दिलाने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों और परिजनों ने कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर लेकर “अन्नू सिंह को न्याय दो”, “इंदिरा आईवीएफ के हत्यारे डॉक्टर श्वेता शिल्पी और सभी कर्मचारियों को गिरफ्तार करो” और “लूटेरा इंदिरा आईवीएफ को बिहार में बंद करो” जैसे नारे लगाए। कैंडल मार्च हाजमा चौराहा से शुरू होकर लहेरियासराय टावर तक पहुंचा। प्रदर्शनकारी मनीष कुमार यादव ने आरोप लगाया कि आईवीएफ सेंटर में इलाज के दौरान गर्भवती अन्नू सिंह को गलत इंजेक्शन दिए जाने के कारण उनकी और गर्भ में पल रहे बच्चों की मौत हुई। उन्होंने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच कराने, संबंधित आईवीएफ सेंटर का लाइसेंस रद्द करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। डॉक्टर ले से पहुंचे थे मृतका के भाई शुभम सिंह ने कहा कि उनकी बहन अन्नू सिंह गर्भवती थी और सामान्य प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची थीं। 29 अगस्त को बहन को बुलाया गया था और इसके बाद 5 सितंबर को नॉर्मल डिलीवरी की तारीख दी गई थी। आरोप लगाया कि एडमिट किए जाने के बाद नर्सिंग स्टाफ ने इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद बहन की हालत अचानक गंभीर हो गई। उनके मुंह और कान से खून आने लगा। आरोप है कि डॉक्टर करीब डेढ़ घंटे बाद पहुंचे। इसके बाद उनकी बहन और गर्भ में पल रहे दोनों बच्चों की मौत हो गई।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी शुभम सिंह ने डॉक्टर श्वेता शिल्पी और संबंधित अस्पताल के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि परिवार को न्याय चाहिए। उन्होंने दोषी डॉक्टर को गिरफ्तार करने और संबंधित आईवीएफ सेंटर को बंद कराने की मांग की।
कैंडल मार्च में दर्जनों लोग शामिल हुए। करीब एक किलोमीटर तक चले मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपितों की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई जल्द नहीं हुई तो आगे आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

