जैसलमेर में भाजपा बोर्ड तय, सभापति रेस में पांच दावेदार:25 वार्ड जीती, विजय डांगरा समेत पांच नाम सभापति दौड़ में

जैसलमेर में भाजपा बोर्ड तय, सभापति रेस में पांच दावेदार:25 वार्ड जीती, विजय डांगरा समेत पांच नाम सभापति दौड़ में

जैसलमेर नगर परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 45 में से 25 वार्डों में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर स्पष्ट और पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। इस प्रचंड बहुमत के साथ ही शहर में भाजपा का नया बोर्ड बनना पूरी तरह तय हो गया है। बोर्ड गठन की सुगबुगाहट के बीच अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि नगर परिषद का अगला सभापति कौन बनेगा। सभापति की इस रेस में विजय डांगरा, नगरमंडल अध्यक्ष अरुण पुरोहित, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष अजय सिंह राहड़, संघ पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले ललित खत्री और मुकेश नागौरी जैसे पांच कद्दावर चेहरे सबसे आगे चल रहे हैं। चुनाव परिणामों के स्पष्ट होते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और पार्टी के भीतर नए बोर्ड के गठन के साथ ही सर्वोच्च पद के लिए लॉबिंग भी शुरू हो गई है। भाजपा खेमे में खुशी की लहर है, वहीं पार्टी के भीतर से ही सभापति की कुर्सी के लिए कई दिग्गज और कद्दावर पार्षदों के नाम सामने आने लगे हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। दलीय स्थिति और बहुमत का सियासी गणित जैसलमेर नगर परिषद के इन चुनावों में राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच हुए कड़े संघर्ष के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो चुकी है: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): पार्टी ने रणनीतिक बढ़त बनाते हुए 45 में से 25 वार्डों में जीत दर्ज की है, जिससे नगर परिषद में उसका बोर्ड बनना और पूर्ण बहुमत साबित होना तय है। इंडियन नेशनल कांग्रेस: मुख्य विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस पार्टी 16 वार्डों तक ही सिमट कर रह गई। निर्दलीय उम्मीदवार: बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपने व्यक्तिगत प्रभाव के दम पर 4 वार्डों पर कब्जा जमाया है। सभापति पद की दौड़ में सबसे आगे ये 5 प्रमुख दावेदार भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब पार्टी संगठन और नवनिर्वाचित पार्षदों के बीच सभापति पद के लिए मंथन शुरू हो गया है। राजनीतिक गलियारों में जिन पांच प्रमुख चेहरों के नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनका प्रोफाइल और राजनीतिक वजन इस प्रकार है: विजय डांगरा: वार्ड संख्या 32 से चुनाव जीतने वाले विजय डांगरा ने इस चुनाव में सबसे अधिक 616 कुल वोट प्राप्त कर अपनी मजबूत जनस्वीकार्यता साबित की है। उनकी सक्रियता और शानदार जीत ने उन्हें सभापति पद की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार के रूप में ला खड़ा किया है। अरुण पुरोहित (अरुण कुमार): वार्ड 5 से रिकॉर्ड 353 वोटों के सबसे बड़े अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले अरुण पुरोहित पार्टी के भीतर एक ऊर्जावान और प्रभावशाली चेहरे के रूप में उभरे हैं। उनकी यह बड़ी जीत उन्हें इस रेस में सबसे आगे रख सकती है। वे बीजेपी के जैसलमेर शहर के नगरमंडल अध्यक्ष भी है। अजय सिंह राहड़: वार्ड 4 से मैदान में उतरकर शानदार जीत हासिल करने वाले अजय सिंह राहड़ का क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक रसूख रहा है। पार्टी के भीतर उनकी मजबूत पकड़ और निर्णय लेने की क्षमता उन्हें इस पद के लिए एक योग्य विकल्प बनाती है। वे बीजेपी के OBC मोर्चा के जैसलमेर शहर के नगरमंडल अध्यक्ष भी है। ललित खत्री (ललित कुमार): वार्ड 42 से जीत दर्ज करने वाले ललित खत्री पार्टी के निष्ठावान और सक्रिय कार्यकर्ताओं में गिने जाते हैं। बीजेपी की पूर्व नगरपरिषद चेयरमैन कविता कैलाश खत्री के जेठ के लड़के हैं। वे संघ पृष्ठभूमि परिवार से भी है। शहरी मतदाताओं के बीच उनकी साफ-सुथरी छवि उन्हें सभापति की रेस में एक दावेदार बनाती है। मुकेश नागौरी: वार्ड 33 जैसे कड़े और संवेदनशील मुकाबले वाले वार्ड से जीत हासिल करने वाले मुकेश नागौरी की राजनीतिक समझ और चुनावी प्रबंधन क्षमता काफी मजबूत मानी जाती है। दिग्गजों के बीच मुकाबला जीतने के कारण उनका दावा भी काफी मजबूत माना जा रहा है। सबसे बड़ी और सबसे छोटी जीत के रोचक आंकड़े चुनाव परिणामों के विस्तृत विश्लेषण से यह भी सामने आया कि कुछ वार्डों में जीत का अंतर बहुत बड़ा रहा तो कुछ जगह कांटे की टक्कर थी: सबसे बड़ी जीत: वार्ड 5 में अरुण कुमार ने 353 मतों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि वार्ड 19 में भूमिका ने 331 वोटों से जीत हासिल की। सबसे छोटी जीत: वार्ड 7 में भाजपा के देरावर राम ने मात्र 2 वोटों के अत्यंत करीबी अंतर से बाजी मारी। वहीं वार्ड 10 में रजी (कांग्रेस) ने 13 वोटों से जीत दर्ज की। निष्कर्ष और आगे की राजनीतिक हलचल भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब सभी की निगाहें पार्टी के उच्च नेतृत्व और पर्यवेक्षकों पर टिकी हैं कि वे सभापति पद के लिए किस नाम पर मुहर लगाते हैं। विजय डांगरा, अरुण पुरोहित, अजय सिंह राहड़, ललित खत्री और मुकेश नागौरी जैसे दिग्गजों की दावेदारी के बीच ऊंट किस करवट बैठेगा, यह आने वाले कुछ दिनों में तय हो जाएगा। नए बोर्ड के सामने शहर के रुके हुए विकास कार्यों को गति देना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

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