गोमती पुस्तक महोत्सव में रविवार को पहुंचे 1200 बच्चे:साहित्य, इतिहास और संगीत के सजे रंग, लखनऊ पर भी हुआ संवाद

गोमती पुस्तक महोत्सव में रविवार को पहुंचे 1200 बच्चे:साहित्य, इतिहास और संगीत के सजे रंग, लखनऊ पर भी हुआ संवाद

लखनऊ में गोमती पुस्तक महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को साहित्य, रचनात्मकता, इतिहास और संगीत से जुड़े कई कार्यक्रम हुए। शहर के अलग-अलग स्कूलों से आए 1,200 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने कहानी, कला और रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया। वहीं, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और लेखक पार्थसारथी सेन शर्मा के साथ विशेष संवाद हुआ। ‘वीरगाथा डायरी’ और ‘दिल्ली मेट्रो’ बैंड की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों ने कहानी और कला में दिखाई प्रतिभा कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों के लिए कहानी और रचनात्मक गतिविधियों से हुई। कहानीकार प्रियंका सागर ने प्रॉप्स, कठपुतलियों और गीतों के जरिए बच्चों को कहानियों की दुनिया से जोड़ा। इसके बाद ड्राइंग प्रतियोगिता, क्ले आर्ट वर्कशॉप और बुक कवर बनाने की गतिविधियां हुईं। राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की टीम ने बच्चों को 7,000 से ज्यादा मुफ्त ई-बुक्स वाली डिजिटल लाइब्रेरी के बारे में जानकारी दी। यशपाल, अमृतलाल नागर की विरासत पर चर्चा ‘साहित्यिक धरोहरों के वारिस’ सत्र में यशपाल, अमृतलाल नागर और भगवतीचरण वर्मा की साहित्यिक और पारिवारिक विरासत पर चर्चा हुई। यशपाल की पुत्रवधू मीना यशपाल, अमृतलाल नागर की पोती ऋचा नागर से जुड़ी यादें साझा कीं। ऋचा नागर ने अमृतलाल नागर की बच्चों के प्रति आत्मीयता और कहानी कहने की कला को याद किया। लखनऊ पर ऐतिहासिक उपन्यास लिखना चाहते हैं सेन शर्मा
‘अनुभव, विचार और संवाद’ सत्र में पार्थसारथी सेन शर्मा ने अपने लेखन और लखनऊ से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि लखनऊ ने कई सदियों को अपने भीतर समेटा है। 20 साल पहले का लखनऊ आज से काफी अलग था। उन्होंने भविष्य में लखनऊ को केंद्र में रखकर एक ऐतिहासिक उपन्यास लिखने की इच्छा जताई। यह उपन्यास 1916 से 2026 तक की समय अवधि पर आधारित होगा। उन्होंने अपनी किताब ‘लव इन लखनऊ’, ‘अंडमान-अंडमानुष सफर का उपन्यासनामा’, ‘लव साइड बाय साइड’, ‘लखनऊ डायरीज’ समेत अन्य पुस्तकों पर भी चर्चा की। AI के दौर में भाषा और साहित्य को मजबूत करने पर जोर AI के बढ़ते प्रभाव पर पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि एआई हमेशा हमारी बातों और भावनाओं को उसी तरह पेश नहीं करता, जिस तरह हम उन्हें कहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अपनी भाषाओं और साहित्य को खुद विकसित और समृद्ध करना जरूरी है। उन्होंने साहित्य को नई पीढ़ी को समझने और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रभावी माध्यम बताया। ‘वीरगाथा डायरी’ में गूंजीं वीरों की गाथाएं कवि और गीतकार डॉ. कृष्ण कुमार सिंह ने ‘वीरगाथा डायरी’ के जरिए भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों को याद किया। प्रस्तुति में पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप और चंद्रशेखर आजाद की वीरता को गद्य, पद्य और छंदों के जरिए पेश किया गया। मंगल पांडे, बहादुर शाह जफर, नाना साहब, रानी लक्ष्मीबाई और वीर कुंवर सिंह के योगदान को भी याद किया गया। 1857 की क्रांति में अवध की भूमिका को भी रेखांकित किया गया। ‘दिल्ली मेट्रो’ बैंड ने बांधा समां शाम को पांच सदस्यीय लाइव बैंड ‘दिल्ली मेट्रो’’ ने हिंदी और अंग्रेजी के लोकप्रिय क्लासिक गीतों की प्रस्तुति दी। नए संगीत संयोजन और लाइव परफॉर्मेंस ने दर्शकों का मनोरंजन किया। दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति की तालियों के साथ सराहना की।

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