वरसिद्धि विनायक देवस्थान सेवा समिति के तत्वावधान में इस वर्ष भी गणेशोत्सव की तैयारियां की जा रही हैं। समिति के अध्यक्ष वीरूपाक्ष हीरेमठ, उपाध्यक्ष मल्लिकार्जुन कुंबार, सचिव शंकर पुरोहित तथा कोषाध्यक्ष विश्वेश्वर एम. कुलकर्णी सहित पदाधिकारी आयोजन की व्यवस्थाओं में जुटे हैं।
मंगलवार को विशेष पूजा, संकष्टी पर पालकी उत्सव
मंदिर में प्रतिदिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। प्रत्येक मंगलवार को विशेष गणेश पूजा का आयोजन होता है। संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर पालकी उत्सव निकाला जाता है। इसमें क्षेत्र के श्रद्धालु उत्साह के साथ शामिल होते हैं। पालकी उत्सव के दौरान भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।

14 सितंबर से गणेशोत्सव की शुरुआत
इस वर्ष गणेशोत्सव के मुख्य कार्यक्रमों की शुरुआत 14 सितंबर से होगी। भगवान गणेश की प्रतिमा को शोभायात्रा के साथ मंदिर परिसर में लाया जाएगा और विधि-विधान से स्थापना की जाएगी। इसके बाद गणेशोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
महोत्सव के तहत रंगोली एवं ड्राइंग प्रतियोगिता के साथ म्यूजिकल चेयर सहित विभिन्न खेलों का आयोजन किया जाएगा। महिलाओं और बच्चों के लिए भी अलग-अलग प्रतियोगिताएं रखी गई हैं।
भजनों से लेकर लोकगीतों तक सजेगा उत्सव
गणेशोत्सव के दौरान शास्त्रीय संगीत एवं लोकगीतों की प्रस्तुतियां भी होंगी। इससे धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक वातावरण भी बनेगा। गणेशोत्सव के समापन अवसर पर भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमा की विसर्जन यात्रा निकाली जाएगी।

जन्माष्टमी पर भी होता है विशेष आयोजन
मंदिर में गणेशोत्सव के अलावा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भी श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण को पालने में झुलाने का विशेष आयोजन होता है। इसमें क्षेत्र के श्रद्धालु भाग लेते हैं।
श्रावण में हर सोमवार धार्मिक आयोजन
श्रावण मास के दौरान मंदिर में धार्मिक गतिविधियों की विशेष श्रृंखला आयोजित की जाती है। प्रत्येक सोमवार को भजन-संगीत, धार्मिक एवं सामाजिक विषयों पर विशेष व्याख्यान सहित विभिन्न कार्यक्रम होते हैं। इन आयोजनों में क्षेत्र के श्रद्धालुओं की अच्छी भागीदारी रहती है।

धार्मिक आयोजनों से जुड़ाव बढ़ रहा
मंदिर समिति के उपाध्यक्ष मल्लिकार्जुन कुंबार ने बताया कि मंदिर में वर्षभर धार्मिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। पर्व और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ जाती है। गणेशोत्सव के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ बच्चों और महिलाओं को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का भी प्रयास किया जाता है।

