‘राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति’ बुक का लोकार्पण:राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान-राष्ट्र जागरण की भावना को जोड़ेगी किताब, सभापति अवधेश नारायण सिंह हुए शामिल

‘राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति’ बुक का लोकार्पण:राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान-राष्ट्र जागरण की भावना को जोड़ेगी किताब, सभापति अवधेश नारायण सिंह हुए शामिल

बिहार विधान परिषद् सभागार में परिषद् में सत्तारूढ़ दल के उपनेता स्तंभकार प्रो. राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता की बुक ‘राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने पुस्तक को राष्ट्रीय चेतना, जनजागरण और वैचारिक विमर्श की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बताया। वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक पाठकों को राष्ट्रहित, राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान और राष्ट्र जागरण की भावना से जोड़ने का कार्य करती है। बिहार विधान परिषद् के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा, उन्हें राष्ट्रवादी धारा से जोड़ने में राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी लिखित पुस्तक ‘राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति’ भी पाठकों को राष्ट्रवादी विचारधारा की ओर आकर्षित करेगी। यह पुस्तक राष्ट्र जागरण का महत्त्वपूर्ण कार्य करेगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पटना साहिब के सांसद रविशंकर प्रसाद ने पुस्तक की भाषा-शैली की सराहना करते हुए कहा कि कॉमर्स के प्राध्यापक प्रो. राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने अत्यंत सहज और सरल हिंदी भाषा में इस पुस्तक की रचना की है, जिससे गंभीर विषय भी सामान्य पाठकों के लिए सुगम हो गए हैं। वहीं, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि पुस्तक में अखंड भारत की अवधारणा सहित अनेक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा की गई है और यह पुस्तक युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। लेखक ने भारत विभाजन की पीड़ा, राजनीति में आए ह्रास तथा सत्ता प्राप्ति के लिए राजनेताओं द्वारा किए गए असंवैधानिक कार्यों जैसे विषयों पर गंभीरता से लिखा है। उन्होंने पंजाब में प्रधानमंत्री की गाड़ी रोके जाने के प्रसंग से जुड़े आलेख का भी उल्लेख किया। पुस्तक में कुल 36 आलेख हैं महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के मीडिया अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार भगत ने कहा कि पुस्तक में कुल 36 आलेख हैं, जिन्हें मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है। प्रथम भाग में समकालीन मुद्दों, दूसरे में वैचारिक विषयों तथा तीसरे भाग में विमर्श आधारित आलेखों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी आलेखों का मूल तत्त्व राष्ट्रीय चेतना है। राष्ट्रीय चेतना का अर्थ राष्ट्रहित के प्रति बोध, राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान और राष्ट्र जागरण से है और यही तत्त्व पुस्तक के प्राण हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक को पढ़ने के बाद स्पष्ट होता है कि लेखक के रोम-रोम में राष्ट्रीय चेतना बसी हुई है। उन्होंने पटना की हुंकार रैली और उससे जुड़े आलेख को विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण बताया। ऐसे आलेख पाठकों को वैचारिक रूप से मजबूती प्रदान करते हैं। बुक में तर्क, विश्लेषण, देश, जनता के प्रति चिंता व्यक्त की वरिष्ठ लेखक राकेश प्रवीर ने कहा कि पुस्तक में तर्क, विश्लेषण तथा देश और जनता के प्रति चिंता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। पुस्तक के विषय समाज, राज्य और देश से जुड़े हुए हैं। इसके आलेख पाठकों में जिज्ञासा उत्पन्न करने के साथ-साथ कई बार समाज को झकझोरने का भी काम करते हैं। पुस्तक के लेखक प्रो. राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने पुस्तक की रचना-प्रक्रिया और इसके पीछे की वैचारिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पुस्तक में समकालीन राष्ट्रीय और सामाजिक विषयों को तथ्य एवं तर्क के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। कार्यक्रम का संचालन बीएचयू में हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने किया। अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन आचार्य शत्रुघ्न प्रसाद शोध संस्थान की अध्यक्ष प्रो. अनीता ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शिवानी ने किया। कार्यक्रम में बिहार विधानमंडल के अनेक माननीय सदस्य, कुलपति, प्राध्यापक, शोधार्थी, साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग तथा पत्रकार उपस्थित रहे। पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली ने किया है। बिहार विधान परिषद् सभागार में परिषद् में सत्तारूढ़ दल के उपनेता स्तंभकार प्रो. राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता की बुक ‘राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने पुस्तक को राष्ट्रीय चेतना, जनजागरण और वैचारिक विमर्श की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बताया। वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक पाठकों को राष्ट्रहित, राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान और राष्ट्र जागरण की भावना से जोड़ने का कार्य करती है। बिहार विधान परिषद् के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा, उन्हें राष्ट्रवादी धारा से जोड़ने में राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी लिखित पुस्तक ‘राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति’ भी पाठकों को राष्ट्रवादी विचारधारा की ओर आकर्षित करेगी। यह पुस्तक राष्ट्र जागरण का महत्त्वपूर्ण कार्य करेगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पटना साहिब के सांसद रविशंकर प्रसाद ने पुस्तक की भाषा-शैली की सराहना करते हुए कहा कि कॉमर्स के प्राध्यापक प्रो. राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने अत्यंत सहज और सरल हिंदी भाषा में इस पुस्तक की रचना की है, जिससे गंभीर विषय भी सामान्य पाठकों के लिए सुगम हो गए हैं। वहीं, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि पुस्तक में अखंड भारत की अवधारणा सहित अनेक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा की गई है और यह पुस्तक युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। लेखक ने भारत विभाजन की पीड़ा, राजनीति में आए ह्रास तथा सत्ता प्राप्ति के लिए राजनेताओं द्वारा किए गए असंवैधानिक कार्यों जैसे विषयों पर गंभीरता से लिखा है। उन्होंने पंजाब में प्रधानमंत्री की गाड़ी रोके जाने के प्रसंग से जुड़े आलेख का भी उल्लेख किया। पुस्तक में कुल 36 आलेख हैं महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के मीडिया अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार भगत ने कहा कि पुस्तक में कुल 36 आलेख हैं, जिन्हें मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है। प्रथम भाग में समकालीन मुद्दों, दूसरे में वैचारिक विषयों तथा तीसरे भाग में विमर्श आधारित आलेखों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी आलेखों का मूल तत्त्व राष्ट्रीय चेतना है। राष्ट्रीय चेतना का अर्थ राष्ट्रहित के प्रति बोध, राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान और राष्ट्र जागरण से है और यही तत्त्व पुस्तक के प्राण हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक को पढ़ने के बाद स्पष्ट होता है कि लेखक के रोम-रोम में राष्ट्रीय चेतना बसी हुई है। उन्होंने पटना की हुंकार रैली और उससे जुड़े आलेख को विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण बताया। ऐसे आलेख पाठकों को वैचारिक रूप से मजबूती प्रदान करते हैं। बुक में तर्क, विश्लेषण, देश, जनता के प्रति चिंता व्यक्त की वरिष्ठ लेखक राकेश प्रवीर ने कहा कि पुस्तक में तर्क, विश्लेषण तथा देश और जनता के प्रति चिंता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। पुस्तक के विषय समाज, राज्य और देश से जुड़े हुए हैं। इसके आलेख पाठकों में जिज्ञासा उत्पन्न करने के साथ-साथ कई बार समाज को झकझोरने का भी काम करते हैं। पुस्तक के लेखक प्रो. राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने पुस्तक की रचना-प्रक्रिया और इसके पीछे की वैचारिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पुस्तक में समकालीन राष्ट्रीय और सामाजिक विषयों को तथ्य एवं तर्क के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। कार्यक्रम का संचालन बीएचयू में हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने किया। अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन आचार्य शत्रुघ्न प्रसाद शोध संस्थान की अध्यक्ष प्रो. अनीता ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शिवानी ने किया। कार्यक्रम में बिहार विधानमंडल के अनेक माननीय सदस्य, कुलपति, प्राध्यापक, शोधार्थी, साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग तथा पत्रकार उपस्थित रहे। पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली ने किया है।  

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