इस वर्ष 14 सितंबर को सौभाग्य और समृद्धि का त्योहार हरतालिका तीज मनाया जाएगा। संयोगवश इसी दिन गणेश चतुर्थी भी है। इस बार कई सालों के बाद ऐसा दुर्लभ धार्मिक संयोग बन रहा है, जब हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा। 14 सितंबर को तृतीया और चतुर्थी तिथि के अद्भुत संयोग के कारण हरतालिका तीज को ”गणपति तीज” के रूप में भी जाना जाएगा। हालांकि, कई श्रद्धालु उदयकालिक तिथि में 15 सितंबर मंगलवार को भी गणेश चतुर्थी मनाएंगे और 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत करेंगे। सुबह 7:28 बजे के बाद चतुर्थी मुहूर्त शुरू आचार्य राकेश झा ने बताया, ‘14 सितंबर को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, सुबह 7:28 बजे तक है। इसके बाद चतुर्थी हो जाएगी। सूर्योदय तृतीया तिथि में होने से उदयातिथि के मान से पूरे दिन सुबह से लेकर देर रात तक तीज की पूजा होगी।’ चित्रा-स्वाति नक्षत्र के युग्म, ब्रह्म-ऐन्द्र योग का बनेगा संयोग सोमवार को चित्रा और स्वाति नक्षत्र के युग्म संयोग के साथ ब्रह्म-ऐन्द्र योग में सुहागिनें हरितालिका तीज का व्रत करेंगी। सुहागिनें पति की लंबी आयु, सुखी दाम्पत्य जीवन और सुख-समृद्धि की कामना से निराहार, निर्जला व्रत रखेंगी। मिट्टी से भगवान शिव एवं माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर उसे वेदोक्त मंत्रो से विधिवत पूजा-अर्चना कर पौराणिक कथाओं को सुनेगीं। तीज के पूजा में दान की महत्ता त्रेता युग से हो रही है तीज की पूजा आचार्य राकेश झा के मुताबिक, हरितालिका तीज पर दो शुभ नक्षत्र, दो शुभ योग के साथ दो विशिष्ठ सुयोग का संयोग बन रहा है। ऐसे पुण्यकारी सुयोग में व्रत करने से अक्षुण्ण सौभाग्य, सुख-समृद्धि, निरोग काया एवं पति की चिरायु, यश-वैभव, कीर्ति के साथ सर्व मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलेगा। हरितालिका तीज व्रत की परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है। माता पार्वती ने पहली बार शिव शंकर की बालुकामयी प्रतिमा बनाकर पूजा की थी। पार्थिव की प्रतिमा बनाकर गंगाजल, अक्षत, चंदन, बेलपत्र, ऋतुफल और पकवान आदि से पूजा करना कल्याणकारी रहेगा। तपस्या और निष्ठा का व्रत है हरितालिका ज्योतिषी राकेश झा ने लिंग पुराण के हवाले से बताया, ‘माता पार्वती वन में जाकर भोलेनाथ को अपने पति के रूप में पाने के लिए अन्न-जल ग्रहण किए बिना सालों तक तप करती रही। तब शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। महिलाएं इस व्रत को तपस्या और निष्ठा के साथ करेंगी तो सात जन्मों तक शिव स्वरूप में उनके वही पति मिलेंगे।’ 10 दिनों तक हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाएगा गणेशोत्सव गणेश उत्सव का पर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक यानि पूरे 10 दिनों तक हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाएगा। गणपति प्रभु की उपासना से हर काम सिद्ध, ऐश्वर्य की प्राप्ति, जीवन से सारे अवरोध तथा विघ्न-बाधाओं को दूर कर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते है। गणेश चतुर्थी में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर मंत्रोच्चार से उनकी विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। उन्हें पीला वस्त्र, दुर्बा, सिंदूर, मोदक, लड्डू आदि अर्पित की जाएगी। मिट्टी से निर्मित की प्रतिमा सबसे शुभ ज्योतिषी झा के मुताबिक मिट्टी से निर्मित प्रतिमा सबसे शुभ और उत्तम होती है। इस प्रतिमा में सभी पंच तत्वों का समावेश होता है, जिसे शास्त्रों में पूजा हेतु सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। ऐसे मिट्टी युक्त प्रतिमा में पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश इन पांचो तत्वों का सार मिला होता है। इसी से हमारा शरीर भी बना है। मिट्टी की प्रतिमाएं पानी में आसानी से घुल जाती है। इससे पर्यावरण को भी लाभ मिलता है। इस वर्ष 14 सितंबर को सौभाग्य और समृद्धि का त्योहार हरतालिका तीज मनाया जाएगा। संयोगवश इसी दिन गणेश चतुर्थी भी है। इस बार कई सालों के बाद ऐसा दुर्लभ धार्मिक संयोग बन रहा है, जब हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा। 14 सितंबर को तृतीया और चतुर्थी तिथि के अद्भुत संयोग के कारण हरतालिका तीज को ”गणपति तीज” के रूप में भी जाना जाएगा। हालांकि, कई श्रद्धालु उदयकालिक तिथि में 15 सितंबर मंगलवार को भी गणेश चतुर्थी मनाएंगे और 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत करेंगे। सुबह 7:28 बजे के बाद चतुर्थी मुहूर्त शुरू आचार्य राकेश झा ने बताया, ‘14 सितंबर को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, सुबह 7:28 बजे तक है। इसके बाद चतुर्थी हो जाएगी। सूर्योदय तृतीया तिथि में होने से उदयातिथि के मान से पूरे दिन सुबह से लेकर देर रात तक तीज की पूजा होगी।’ चित्रा-स्वाति नक्षत्र के युग्म, ब्रह्म-ऐन्द्र योग का बनेगा संयोग सोमवार को चित्रा और स्वाति नक्षत्र के युग्म संयोग के साथ ब्रह्म-ऐन्द्र योग में सुहागिनें हरितालिका तीज का व्रत करेंगी। सुहागिनें पति की लंबी आयु, सुखी दाम्पत्य जीवन और सुख-समृद्धि की कामना से निराहार, निर्जला व्रत रखेंगी। मिट्टी से भगवान शिव एवं माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर उसे वेदोक्त मंत्रो से विधिवत पूजा-अर्चना कर पौराणिक कथाओं को सुनेगीं। तीज के पूजा में दान की महत्ता त्रेता युग से हो रही है तीज की पूजा आचार्य राकेश झा के मुताबिक, हरितालिका तीज पर दो शुभ नक्षत्र, दो शुभ योग के साथ दो विशिष्ठ सुयोग का संयोग बन रहा है। ऐसे पुण्यकारी सुयोग में व्रत करने से अक्षुण्ण सौभाग्य, सुख-समृद्धि, निरोग काया एवं पति की चिरायु, यश-वैभव, कीर्ति के साथ सर्व मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलेगा। हरितालिका तीज व्रत की परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है। माता पार्वती ने पहली बार शिव शंकर की बालुकामयी प्रतिमा बनाकर पूजा की थी। पार्थिव की प्रतिमा बनाकर गंगाजल, अक्षत, चंदन, बेलपत्र, ऋतुफल और पकवान आदि से पूजा करना कल्याणकारी रहेगा। तपस्या और निष्ठा का व्रत है हरितालिका ज्योतिषी राकेश झा ने लिंग पुराण के हवाले से बताया, ‘माता पार्वती वन में जाकर भोलेनाथ को अपने पति के रूप में पाने के लिए अन्न-जल ग्रहण किए बिना सालों तक तप करती रही। तब शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। महिलाएं इस व्रत को तपस्या और निष्ठा के साथ करेंगी तो सात जन्मों तक शिव स्वरूप में उनके वही पति मिलेंगे।’ 10 दिनों तक हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाएगा गणेशोत्सव गणेश उत्सव का पर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक यानि पूरे 10 दिनों तक हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाएगा। गणपति प्रभु की उपासना से हर काम सिद्ध, ऐश्वर्य की प्राप्ति, जीवन से सारे अवरोध तथा विघ्न-बाधाओं को दूर कर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते है। गणेश चतुर्थी में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर मंत्रोच्चार से उनकी विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। उन्हें पीला वस्त्र, दुर्बा, सिंदूर, मोदक, लड्डू आदि अर्पित की जाएगी। मिट्टी से निर्मित की प्रतिमा सबसे शुभ ज्योतिषी झा के मुताबिक मिट्टी से निर्मित प्रतिमा सबसे शुभ और उत्तम होती है। इस प्रतिमा में सभी पंच तत्वों का समावेश होता है, जिसे शास्त्रों में पूजा हेतु सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। ऐसे मिट्टी युक्त प्रतिमा में पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश इन पांचो तत्वों का सार मिला होता है। इसी से हमारा शरीर भी बना है। मिट्टी की प्रतिमाएं पानी में आसानी से घुल जाती है। इससे पर्यावरण को भी लाभ मिलता है।

