गोरखपुर के सहारा स्टेट स्थित मल्हार अपार्टमेंट में शुक्रवार को इंजीनियर अभिषेक त्रिपाठी का शव मिलने के बाद शनिवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। राजघाट पर दोपहर करीब एक बजे उनके बहनोई ने मुखाग्नि दी। परिवार के लोगों के मुताबिक, अभिषेक के छोटे भाई अंबरीष के अमेरिका से गोरखपुर पहुंचने में देरी हो रही थी। इसी वजह से अंतिम संस्कार दोपहर में ही कराया गया। बताया गया कि अंबरीष के शाम तक गोरखपुर पहुंचने की उम्मीद थी।
पोस्टमार्टम में मौत की वजह स्पष्ट नहीं
अभिषेक की मौत की वजह अभी पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर किसी तरह के चोट या जख्म के निशान नहीं मिले हैं। रिपोर्ट से मौत का स्पष्ट कारण भी सामने नहीं आया है। हालांकि पुलिस प्रथम दृष्टया इसे प्राकृतिक मौत मान रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है, जिससे हत्या की आशंका हो।
लोगों से दूरी बनाकर रहते थे अभिषेक
अभिषेक के व्यवहार को लेकर आसपास रहने वाले लोगों से बातचीत करने पर पता चला कि वह काफी समय से खुद तक सीमित रहने लगे थे। पड़ोसियों के मुताबिक, वह बहुत कम लोगों से बातचीत करते थे। किसी से ज्यादा मिलना-जुलना भी नहीं था। वह ज्यादातर समय अपने कमरे में ही रहते थे।
हालांकि, आसपास के लोग कैमरे पर इस बारे में बोलने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अभिषेक का सामाजिक मेल-जोल बेहद कम था।
घर में खाना बनाने का चलन भी कम था
पड़ोसियों के मुताबिक, अभिषेक के फ्लैट में खाना भी बहुत कम बनता था। अक्सर शाम के समय ऑनलाइन डिलीवरी के जरिए खाना मंगाया जाता था। डिलीवरी एजेंटों को कई बार अपार्टमेंट में आते-जाते देखा जाता था। इससे भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह बाहर निकलने के बजाय ऑनलाइन सर्विस पर अधिक निर्भर थे।
किचन भी कम इस्तेमाल होने जैसा मिला
शुक्रवार को जब काफी समय से बंद फ्लैट का दरवाजा पुलिस ने तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो कमरे की स्थिति भी सामान्य नहीं थी। पुलिस की जांच के दौरान कमरा काफी गंदा मिला। किचन को देखकर भी ऐसा नहीं लग रहा था कि वहां नियमित रूप से खाना बनाया जाता था।
पुलिस ने फ्लैट के अंदर से जरूरी साक्ष्य जुटाए और जांच की। फिलहाल मौत की वजह को लेकर पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
कई समय से नहीं चली थी बाइक, टायरों में भी नहीं थी हवा
अभिषेक की बाइक अपार्टमेंट के नीचे ही खड़ी मिली। आसपास के लोगों के मुताबिक, बाइक काफी समय से नहीं चली थी। उसके दोनों टायरों में हवा नहीं थी और ऊपर पड़े कवर पर धूल की मोटी परत जमी थी।
बाइक की हालत देखकर ऐसा लग रहा था कि लंबे समय से उसका इस्तेमाल नहीं किया गया था। पड़ोसियों का कहना है कि अभिषेक आने-जाने के लिए पैदल या ऑनलाइन कैब जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल करते होंगे। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
चार दिन से बंद था फ्लैट, दुर्गंध के बाद चला पता
अभिषेक का फ्लैट करीब चार दिन से बंद था। शुक्रवार सुबह फ्लैट से दुर्गंध आने पर आसपास के लोगों को शक हुआ और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा खोलने के बाद अंदर अभिषेक का शव मिला था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। अब पोस्टमार्टम में किसी चोट के निशान नहीं मिलने के बाद पुलिस प्राकृतिक मौत की आशंका जता रही है। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट होने के लिए पुलिस जांच जारी है। अब विस्तार से पढिए पूरा मामला गोरखपुर में 45 साल के IIT इंजीनियर का शव उनके फ्लैट में मिला है। शुक्रवार सुबह बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर गई तो इंजीनियर का शव सोफे पर पड़ा था। पुलिस के मुताबिक, इंजीनियर अभिषेक त्रिपाठी का शव 3-4 दिन पुराना था। शादी नहीं की थी। वह फ्लैट में अकेले रहते थे। 4 साल पहले उनकी नौकरी छूट गई थी। अभिषेक का छोटा भाई अमेरिका में IT इंजीनियर है। पिता सभा त्रिपाठी सिंचाई विभाग में एक्सईएन पद से रिटायर्ड थे। मामला सहारा एस्टेट के मल्हार अपार्टमेंट का है। भाई की मौत की जानकारी मिलते ही छोटा भाई अंबरीष अमेरिका से गोरखपुर के लिए रवाना हो गया है। उसके आने के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। अभिषेक त्रिपाठी के माता-पिता की मौत हो चुकी है। नौकरी छूटने के बाद वह मानसिक परेशानी से जूझ रहे थे। अभिषेक के बड़े भाई आशुतोष बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सुरक्षा गार्ड थे। उनकी 2014 में चेन्नई में बीमारी के कारण मौत हो गई थी। बहन गुड़िया पति के साथ गोरखपुर में रहती हैं। फिलहाल, पोस्टमार्टम में भी मौत की वजह पता नहीं चली है। 2 तस्वीरें देखिए… मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छूटी तो डिप्रेशन में चले गए घटना के बाद मौके पर पहुंची गुड़िया उर्फ अर्चना ने बताया- पिता मूल रूप से कुशीनगर के महासोन गांव के रहने वाले थे, लेकिन गोरखपुर में सिंचाई विभाग में तैनात थे। इसलिए हम लोगों की पढ़ाई-लिखाई यहीं हुई। 16 साल पहले पिता का निधन हो गया। इसके 3 साल बाद मां भी हम लोगों को छोड़कर चली गईं। भाई अभिषेक पढ़ने में होनहार था। उसने IIT से इंजीनियरिंग की और नोएडा की मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी की। कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम के चलते गोरखपुर आ गया। 4 साल पहले नौकरी छूट गई। इसके बाद वह परेशान रहने लगा और धीरे-धीरे डिप्रेशन में चला गया। परिवार ने लखनऊ में उसका इलाज कराया, लेकिन परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। बीमारी के चलते भाई के व्यवहार में बदलाव आया, लोगों ने बनाई दूरी बहन ने बताया- बीमारी के कारण अभिषेक के व्यवहार में बदलाव आ गया था। वह कभी-कभी लोगों से अभद्र भाषा में बात कर देते थे। इसका असर रिश्तों पर पड़ा। रिश्तेदारों-परिचितों का आना-जाना कम हो गया। छोटा भाई अंबरीष पैसे भेजता था, उसी से अभिषेक का खर्च चलता था। मैं और अंबरीष समय-समय पर उससे मिलने आते थे। पड़ोसी बोले- अकेले पड़ गए थे, ज्यादातर कमरे में रहते थे पड़ोसियों के मुताबिक, अभिषेक अकेले पड़ गए थे। वह ज्यादातर कमरे में ही रहते और किसी से ज्यादा बात नहीं करते थे। 3-4 दिनों से वह दिखाई नहीं दिए थे। शुक्रवार को फ्लैट से बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो अंदर उनका शव मिला। सीओ कीर्ति निधि आनंद ने बताया- अभिषेक 3-4 दिन से फ्लैट से बाहर नहीं निकले थे। दरवाजा अंदर से बंद था। मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। कमरे का सामान बिखरा मिला। मोबाइल लॉक है, उसे खुलवाने की कोशिश की जा रही है।

