1 किमी लंबी लाइन, 35 मिनट में निपटा एक चालान:लोक अदालत में सुबह 11 बजे पहुंचे, शाम तक खड़े रह गए; लोग बोले- पूरा दिन बर्बाद हो गया

1 किमी लंबी लाइन, 35 मिनट में निपटा एक चालान:लोक अदालत में सुबह 11 बजे पहुंचे, शाम तक खड़े रह गए; लोग बोले- पूरा दिन बर्बाद हो गया

‘एक दिन में अलग-अलग जगहों पर हेलमेट के नाम पर 4 हजार रुपए तक का चालान काटा गया है। सोचा था लोक अदालत में ट्रैफिक चालान 50% माफ हो जाएगा। इसलिए सुबह 11 बजे ही गांधी मैदान पहुंच गए। यहां पहुंचा तो 1 किमी लंबी लाइन। खड़े-खड़े शाम हो गए, पर मेरा नंबर ही नहीं आया। लोक अदालत का समय खत्म हो गया, जिस काम के लिए आए थे, वो हुआ ही नहीं। पूरा दिन बर्बाद हो गया। काउंटर पर एक व्यक्ति का चालान निपटाने में 35 मिनट से ज्यादा समय लग रहा था।’ ये बातें राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुंचने वाले लोगों ने कही हैं। दरअसल, गांधी मैदान के गेट नंबर-7 पर राष्ट्रीय लोक अदालत लगी। इसका आयोजन जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुश्री अनामिका टी की अध्यक्षता और सचिव ज्योति चंदन के नेतृत्व में हुआ। पटना न्याय मंडल में राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान करीब 15 हजार मामलों का निपटारा किया गया।
लोक अदालत में पहुंचने वाले लोगों को क्या परेशानियां हुईं, व्यवस्था को लेकर उन्होंने क्या कहा, कैसी है उनकी नाराजगी, पढ़ें रिपोर्ट… पहले कुछ तस्वीरें… ‘लोगों की संख्या के अनुसार काम की गति नहीं थी’ अमित सिन्हा ने बताया कि मेरी बाइक पर हेलमेट नहीं पहनने और ओवर स्पीडिंग के मामले में करीब 24 हजार रुपए का चालान हो गया था। पिछले 6 महीने में इतना चालान कटा है। लोक अदालत में 50% तक राहत मिलने की जानकारी के बाद चालान खत्म कराने पहुंचे थे। यहां आने के बाद चालान की राशि आधी होने की उम्मीद थी, लेकिन इसके लिए काफी देर तक लाइन में लगना पड़ा। भीड़ को व्यवस्थित नहीं किया जा सका। लोगों की संख्या लगातार बढ़ती गई, लेकिन काम उस गति से नहीं हो रहा था। 2 हजार का चालान खत्म कराने आए थे, खाने-पीने में ही ज्यादा खर्च हो गए विक्की कुमार ने बताया कि मैं सुबह 11 बजे से लाइन में खड़ा रहा। बाइक पर 2 हजार रुपए का चालान है और उसे खत्म कराने के लिए लोक अदालत पहुंचा था, लेकिन कई घंटे इंतजार के बाद भी नंबर नहीं आया। उन्होंने कहा कि सुबह से खाने-पीने और आने-जाने में ही इतना खर्च हो गया कि चालान से मिलने वाली राहत का फायदा भी फीका लगने लगा। विक्की के अनुसार, सुबह से लाइन में लगे लोगों की स्थिति शाम तक भी वही बनी हुई थी और व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
न पंखा-कूलर और न पानी की व्यवस्था राकेश रौशन ने शिविर में मूलभूत सुविधाओं की कमी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भीड़ के बीच लोगों के लिए न पंखे की पर्याप्त व्यवस्था थी और न कूलर की। पानी तक की व्यवस्था नहीं थी। राकेश ने कहा कि समझ नहीं आ रहा कि सिस्टम धीमा है या काम करने वाले लोगों को प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। लोग सुबह से जिस जगह खड़े थे, शाम तक वहीं खड़े रहे। 10 बजे पहुंचने के बाद भी काम नहीं हुआ राकेश रौशन ने व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि मैं सुबह 10 बजे ही गांधी मैदान पहुंच गया था। सुबह से शाम हो गई, लेकिन न तो लाइन ठीक से आगे बढ़ी और न ही भीड़ कम हुई। उम्मीद थी कि 4 हजार रुपए के चालान में 2 हजार रुपए की राहत मिल जाएगी और सिर्फ 2 हजार रुपए जमा करके मामला खत्म हो जाएगा, लेकिन पूरा दिन लाइन में खड़े रहने के बाद भी मेरा नंबर नहीं आया।
6 घंटे में लाइन में खड़े 10 लोग ही आगे बढ़ें साकेत ने कहा कि मैं सुबह 11 बजे से लाइन में खड़ा था और शाम 5 बजे तक इंतजार करने के बावजूद सिर्फ करीब 10 लोग ही आगे बढ़ पाए। मेरी बाइक पर 8 हजार रुपए का चालान है, जिसे खत्म कराने के लिए लोक अदालत पहुंचा था। उन्होंने कहा कि एक दिन में अलग-अलग जगहों पर हेलमेट चालान काटे जाते हैं। चालान में राहत की उम्मीद लेकर यहां पहुंचे थे, लेकिन भीड़ इतनी थी कि मेरा काम तो हुआ ही नहीं। बिना वजह पुलिस वाले गाड़ी का नंबर ले लेते हैं सरपंच नरेंद्र सिंह कटारिया ने ट्रैफिक चालान की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिस हिंदुस्तान और बिहार में लोग रह रहे हैं, वहां ऐसा लग रहा है जैसे अंग्रेजों के समय लगाए जाने वाले कर से भी ज्यादा कर लगाया जा रहा है। पुलिसकर्मी कई बार बिना वजह वाहन का नंबर ले लेते हैं और जहां मन करता है, जैसे मन करता है, चालान काट देते हैं। कई बार वाहन मालिकों को यह तक पता नहीं चलता कि उनका चालान किस वजह से काटा गया है। 50% तक छूट की उम्मीद, नकद भुगतान की मजबूरी विशेष ट्रैफिक लोक अदालत में 90 दिन यानी तीन महीने से ज्यादा पुराने लंबित ई-चालानों के निपटारे की व्यवस्था की गई है। वाहन मालिकों को चालान राशि में नियमों के तहत 50% तक की राहत दी जा रही है। इसी उम्मीद में बड़ी संख्या में लोग गांधी मैदान पहुंचे। शिविर में छूट के बाद बची चालान राशि का भुगतान केवल नकद माध्यम से किया जा रहा है। यहां यूपीआई या अन्य डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को पहले से नकद लेकर पहुंचना पड़ा। ‘एक दिन में अलग-अलग जगहों पर हेलमेट के नाम पर 4 हजार रुपए तक का चालान काटा गया है। सोचा था लोक अदालत में ट्रैफिक चालान 50% माफ हो जाएगा। इसलिए सुबह 11 बजे ही गांधी मैदान पहुंच गए। यहां पहुंचा तो 1 किमी लंबी लाइन। खड़े-खड़े शाम हो गए, पर मेरा नंबर ही नहीं आया। लोक अदालत का समय खत्म हो गया, जिस काम के लिए आए थे, वो हुआ ही नहीं। पूरा दिन बर्बाद हो गया। काउंटर पर एक व्यक्ति का चालान निपटाने में 35 मिनट से ज्यादा समय लग रहा था।’ ये बातें राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुंचने वाले लोगों ने कही हैं। दरअसल, गांधी मैदान के गेट नंबर-7 पर राष्ट्रीय लोक अदालत लगी। इसका आयोजन जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुश्री अनामिका टी की अध्यक्षता और सचिव ज्योति चंदन के नेतृत्व में हुआ। पटना न्याय मंडल में राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान करीब 15 हजार मामलों का निपटारा किया गया।
लोक अदालत में पहुंचने वाले लोगों को क्या परेशानियां हुईं, व्यवस्था को लेकर उन्होंने क्या कहा, कैसी है उनकी नाराजगी, पढ़ें रिपोर्ट… पहले कुछ तस्वीरें… ‘लोगों की संख्या के अनुसार काम की गति नहीं थी’ अमित सिन्हा ने बताया कि मेरी बाइक पर हेलमेट नहीं पहनने और ओवर स्पीडिंग के मामले में करीब 24 हजार रुपए का चालान हो गया था। पिछले 6 महीने में इतना चालान कटा है। लोक अदालत में 50% तक राहत मिलने की जानकारी के बाद चालान खत्म कराने पहुंचे थे। यहां आने के बाद चालान की राशि आधी होने की उम्मीद थी, लेकिन इसके लिए काफी देर तक लाइन में लगना पड़ा। भीड़ को व्यवस्थित नहीं किया जा सका। लोगों की संख्या लगातार बढ़ती गई, लेकिन काम उस गति से नहीं हो रहा था। 2 हजार का चालान खत्म कराने आए थे, खाने-पीने में ही ज्यादा खर्च हो गए विक्की कुमार ने बताया कि मैं सुबह 11 बजे से लाइन में खड़ा रहा। बाइक पर 2 हजार रुपए का चालान है और उसे खत्म कराने के लिए लोक अदालत पहुंचा था, लेकिन कई घंटे इंतजार के बाद भी नंबर नहीं आया। उन्होंने कहा कि सुबह से खाने-पीने और आने-जाने में ही इतना खर्च हो गया कि चालान से मिलने वाली राहत का फायदा भी फीका लगने लगा। विक्की के अनुसार, सुबह से लाइन में लगे लोगों की स्थिति शाम तक भी वही बनी हुई थी और व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
न पंखा-कूलर और न पानी की व्यवस्था राकेश रौशन ने शिविर में मूलभूत सुविधाओं की कमी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भीड़ के बीच लोगों के लिए न पंखे की पर्याप्त व्यवस्था थी और न कूलर की। पानी तक की व्यवस्था नहीं थी। राकेश ने कहा कि समझ नहीं आ रहा कि सिस्टम धीमा है या काम करने वाले लोगों को प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। लोग सुबह से जिस जगह खड़े थे, शाम तक वहीं खड़े रहे। 10 बजे पहुंचने के बाद भी काम नहीं हुआ राकेश रौशन ने व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि मैं सुबह 10 बजे ही गांधी मैदान पहुंच गया था। सुबह से शाम हो गई, लेकिन न तो लाइन ठीक से आगे बढ़ी और न ही भीड़ कम हुई। उम्मीद थी कि 4 हजार रुपए के चालान में 2 हजार रुपए की राहत मिल जाएगी और सिर्फ 2 हजार रुपए जमा करके मामला खत्म हो जाएगा, लेकिन पूरा दिन लाइन में खड़े रहने के बाद भी मेरा नंबर नहीं आया।
6 घंटे में लाइन में खड़े 10 लोग ही आगे बढ़ें साकेत ने कहा कि मैं सुबह 11 बजे से लाइन में खड़ा था और शाम 5 बजे तक इंतजार करने के बावजूद सिर्फ करीब 10 लोग ही आगे बढ़ पाए। मेरी बाइक पर 8 हजार रुपए का चालान है, जिसे खत्म कराने के लिए लोक अदालत पहुंचा था। उन्होंने कहा कि एक दिन में अलग-अलग जगहों पर हेलमेट चालान काटे जाते हैं। चालान में राहत की उम्मीद लेकर यहां पहुंचे थे, लेकिन भीड़ इतनी थी कि मेरा काम तो हुआ ही नहीं। बिना वजह पुलिस वाले गाड़ी का नंबर ले लेते हैं सरपंच नरेंद्र सिंह कटारिया ने ट्रैफिक चालान की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिस हिंदुस्तान और बिहार में लोग रह रहे हैं, वहां ऐसा लग रहा है जैसे अंग्रेजों के समय लगाए जाने वाले कर से भी ज्यादा कर लगाया जा रहा है। पुलिसकर्मी कई बार बिना वजह वाहन का नंबर ले लेते हैं और जहां मन करता है, जैसे मन करता है, चालान काट देते हैं। कई बार वाहन मालिकों को यह तक पता नहीं चलता कि उनका चालान किस वजह से काटा गया है। 50% तक छूट की उम्मीद, नकद भुगतान की मजबूरी विशेष ट्रैफिक लोक अदालत में 90 दिन यानी तीन महीने से ज्यादा पुराने लंबित ई-चालानों के निपटारे की व्यवस्था की गई है। वाहन मालिकों को चालान राशि में नियमों के तहत 50% तक की राहत दी जा रही है। इसी उम्मीद में बड़ी संख्या में लोग गांधी मैदान पहुंचे। शिविर में छूट के बाद बची चालान राशि का भुगतान केवल नकद माध्यम से किया जा रहा है। यहां यूपीआई या अन्य डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को पहले से नकद लेकर पहुंचना पड़ा।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *