भारतीय हमलों से बचने के लिए लश्कर-जैश का नया प्लान, पूरे पाकिस्तान में फैलाए जा रहे आतंकी कैंप

भारतीय हमलों से बचने के लिए लश्कर-जैश का नया प्लान, पूरे पाकिस्तान में फैलाए जा रहे आतंकी कैंप

पिछले साल भारत (India) के ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद से ही पाकिस्तान (Pakistan) में आतंकियों की चिंता बढ़ गई। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) और जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) जैसे आतंकी संगठनों ने पूरे पाकिस्तान में अपने नेटवर्क को बड़े पैमाने पर फैलाने का काम शुरू कर दिया है। ये संगठन आतंकी गतिविधियों को विकेंद्रीकृत करने के लिए देशभर में छोटे-छोटे ट्रेनिंग सेंटर और आतंकी कैंप बना रहे हैं।

भारतीय हमलों से बचने के लिए बनाया प्लान

लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने भारतीय हमलों से बचने के लिए यह काम किया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में कई आतंकी कैंप और ट्रेनिंग सेंटर तबाह हो गए थे, जिसकी वजह से आतंकी नेटवर्क को काफी नुकसान हुआ था। फिर से ऐसा न हो, इसी वजह से आतंकी संगठनों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है, जिसके तहत आतंकी कैंप पूरे देश में फैलाए जाएंगे और किसी एक इलाके पर मुख्य रूप से केंद्रित नहीं होंगे। ऐसे में अगर भारत ने फिर हमला किया और कुछ आतंकी कैंपों को तबाह भी कर दिया, तो भी बाकी दूसरे कैंप और ट्रेनिंग सेंटर काम करते रहेंगे।

आईएसआई और पाकिस्तानी सेना कर रही है मदद

इस काम में आतंकियों की मदद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी आईएसआई (ISI) और सेना कर रही हैं। मुरिदके ट्रेनिंग कैंप और जैश के बहावलपुर मुख्यालय को बनाने में काफी पैसा लगाया गया है, जो भारतीय हमलों में तबाह हो गए थे।। आईएसआई और पाकिस्तानी सेना आतंकी संगठनों का मनोबल बढ़ाने के लिए भी उनकी मदद कर रही हैं क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद लश्कर और जैश का मनोबल काफी गिर गया था और दोनों संगठनों की गतिविधियों में कमी भी देखने को मिली।

आईएसआई नहीं चाहता दोबारा हो ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैसी स्थिति

जानकारी के अनुसार आईएसआई ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैसी स्थिति दोबारा नहीं चाहता क्योंकि उसे पता है कि आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से खड़ा करना और उनके कैडर का मनोबल बढ़ाना कोई आसान काम नहीं है, बल्कि काफी चुनौतीपूर्ण है। इसी वजह से भारत को निशाना बनाने वाली आतंकी गतिविधियों पर भी रोक लगी है। जम्मू-कश्मीर इसका एक उदाहरण है। जम्मू-कश्मीर में इसी वजह से अब घुसपैठ बहुत मुश्किल हो गई है और नतीजतन घाटी में एक्टिव आतंकियों की संख्या में भी कमी आई है।

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