चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। वो BRICS समिट के अलावा पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। जिनपिंग आखिरी बार अक्टूबर 2019 में अनौपचारिक बैठक के लिए भारत आए थे। 1. डिप्लोमेसी: कारोबारी मजबूरी में भारत-चीन का सियासी तनाव कम होगा 2. ऑप्टिक्स: जिनपिंग, पुतिन और मोदी एक साथ दिखना भी बड़ी बात 3. मैसेजिंग: BRICS कोई दिखावे का मंच नहीं, सभी देश एकजुट भारत और चीन के रिश्ते करवट ले रहे हैं, लेकिन 2 वजहों से फिलहाल दोनों देश एक पाले में नहीं आ सकते। पहला- ट्रस्ट डेफिसिट, यानी भरोसे की कमी और दूसरा- ट्रेड डेफिसिट, यानी व्यापार घाटा। पहली चुनौती: भारत-चीन के बीच भरोसे की कमी दूसरी चुनौती: भारत को चीन से कारोबारी घाटा जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले NSA अजीत डोभाल चीन गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस दौरे में दोनों देशों के बीच कई बिंदुओं पर सहमति बनी थी। मसलन- सीमा विवाद पर बातचीत आगे बढ़ाना, सैन्य हॉटलाइन मजबूत करना, वीजा नियमों में ढील और व्यापार से जुड़े मुद्दे। यानी टेबल पहले से तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, जिनपिंग से द्विपक्षीय बातचीत में नई दिल्ली की टॉप प्रयॉरिटी आपसी सहयोग, कारोबार, पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज और सीमा विवाद हैं। जिनपिंग के दौरे से ठीक पहले चाइना सदर्न एयरलाइंस ने 6 साल बाद ग्वांगझू-दिल्ली रूट पर फ्लाइट सर्विस बहाल कर दी है। जियोस्ट्रैटजी एक्सपर्ट मनोज केवलरामानी के मुताबिक, ‘भारत-चीन की बातचीत में बीच कारोबार और निवेश जैसे मुद्दों पर फ्रेमवर्क बनने की उम्मीद है। वीजा नियमों में ढील भी मिल सकती है। लेकिन सीमा विवाद पर कुछ ठोस होता नहीं दिखता।’ ————
ये खबर भी पढ़िए… पुतिन से पहले पहुंच जाता है उनका टॉयलेट: जिनपिंग स्पेशल कार साथ लाते हैं; BRICS समिट में विदेशी नेताओं की सिक्योरिटी के क्या-क्या इंतजाम 12-13 सितंबर को BRICS समिट के लिए दिल्ली में 20 से ज्यादा देशों के नेता हो रहे हैं। इनमें जिनपिंग, पुतिन, पजशकियान जैसे बड़े खतरे वाले नेता शामिल हैं। इनके लिए दिल्ली की किलेबंदी की गई है। पूरी खबर पढ़िए…
आज का एक्सप्लेनर:क्या चीन-भारत एक ही पाले में आने वाले हैं; 7 साल बाद जिनपिंग के दिल्ली दौरे के मायने, क्या कुछ ठोस हासिल होगा

