Nisar Ahmed Murder Case: कर्नाटक के कोराटगेरे में जनवरी 2021 की एक सुबह पुलिस को सड़क दुर्घटना की सूचना मिली, लेकिन मौके पर पहुंचते ही जांच की दिशा बदल गई। कार बिजली के खंभे से टकराई थी और चालक की मौत हो चुकी थी, मगर शरीर पर चाकू के निशान ने हादसे की कहानी पर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद एक मोबाइल फोन, CCTV कैमरों की तस्वीरें और डिजिटल लोकेशन ने जांचकर्ताओं को उस यात्री तक पहुंचाया, जो किराये की कैब में बैठा था।
सुबह की जांच ने बदल दी पूरी कहानी
30 जनवरी 2021 की तड़के कोराटगेरे-मधुगिरी रोड पर एक महिंद्रा वेरिटो बिजली के खंभे से टकराई मिली। शुरुआत में मामला सड़क दुर्घटना जैसा लगा, लेकिन पुलिस निरीक्षक फकरुसाब के. नदाफ ने वाहन और शव की जांच की तो चालक की छाती पर चाकू के तीन घाव मिले। यहीं से दुर्घटना की जांच हत्या के मामले में बदल गई।
मौके को तुरंत सुरक्षित किया गया। फोरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड और क्राइम सीन विशेषज्ञों ने जांच शुरू की। मृतक की पहचान भी तत्काल नहीं हो सकी थी। तभी चालक की सीट के पास मिला मोबाइल फोन जांच की सबसे अहम कड़ी बन गया।
पत्नी के फोन ने बताया मृतक कौन था
मोबाइल की कॉल हिस्ट्री से पुलिस एक ऐसे नंबर तक पहुंची, जो ‘आयशा’ नाम से सेव था। फोन करने पर पता चला कि नंबर निसार अहमद की पत्नी का है। तस्वीर दिखाने पर उसने शव की पहचान अपने पति के रूप में की।
निसार बेंगलुरु के अनेकल इलाके में परिवार के साथ रहता था और आम तौर पर इलेक्ट्रॉनिक सिटी से एयरपोर्ट तक यात्रियों को छोड़ता था। लेकिन घटना से पहले उसने परिवार को बताया था कि वह तुमकुरु की ओर एक यात्री को लेकर जा रहा है।
3,300 रुपये का किराया बना बड़ा सुराग
पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सिटी में निसार के साथी ड्राइवरों से पूछताछ की। अदालत में दिए बयान के मुताबिक मोहम्मद आसिफ ने बताया कि एक व्यक्ति ने करीब 3,500 रुपये से कम में यात्रा कराने की बात रखी थी। कई ड्राइवरों ने मना किया, लेकिन निसार 3,300 रुपये में उसे ले जाने के लिए तैयार हो गया और रात करीब 8:30 बजे रवाना हुआ।
इसके बाद CCTV फुटेज ने जांच को निर्णायक दिशा दी। कैमरों में यात्री अलग-अलग स्थानों पर कैब के साथ दिखाई दिया। रास्ते में होटल पर भुगतान भी UPI से किया गया था। मोबाइल लोकेशन और CCTV फुटेज को मिलाने पर पुलिस को आरोपी की गतिविधियों की तस्वीर साफ होने लगी।
आरोपी तक ऐसे पहुंची पुलिस
मोबाइल नंबर की जांच में उसका संबंध अनेकल निवासी 24 वर्षीय वीरेंद्र पी. से सामने आया। उसकी लोकेशन चित्तदुर्ग जिले के चल्लकेरे तालुक के गोपनहल्ली गांव में मिली। पुलिसकर्मियों वेंकटेश और सोमनाथ ने वहां पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में सामने आया कि वीरेंद्र ने पैसों की जरूरत के चलते कैब चालक को लूटने की योजना बनाई थी। उसकी नजर कार बेचकर करीब चार लाख रुपये हासिल करने पर थी। उसने चाकू और बैग खरीदा और यात्री बनकर निसार की कैब में बैठ गया।
हत्या के बाद हादसा दिखाने की कोशिश
रास्ते में वीरेंद्र ने पहले अगली सीट पर सफर किया और होटल में भोजन के बाद पीछे बैठ गया। कोराटगेरे-मधुगिरी रोड पर उसने वाहन रुकवाया। वापस आकर उसने पीछे से निसार का गला पकड़ा और चाकू से तीन वार कर दिए।
इसके बाद कार चलाने की कोशिश में वाहन कुछ ही दूरी पर बिजली के खंभे से जा टकराया। वीरेंद्र ने शव को ड्राइवर की जगह पर खिसकाकर घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। खून से सने कपड़े उसने एयरबैग में छिपाकर झाड़ियों में फेंक दिए थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने बरामद किया।
अदालत में डिजिटल सबूतों ने जोड़ी पूरी कड़ी
कोराटगेरे पुलिस ने 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल किया। मामले में 33 गवाहों और 21 महत्वपूर्ण वस्तुओं को साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया। प्रत्यक्षदर्शी न होने के बावजूद CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल लोकेशन, गवाहों के बयान और बरामदगी जैसे साक्ष्यों ने घटनाओं की पूरी कड़ी तैयार कर दी।
मधुगिरी की चौथी अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 3 अगस्त को वीरेंद्र को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने माना कि उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्य आरोपी की भूमिका साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
इस मामले की सबसे दर्दनाक कड़ी अपराध के पीछे छिपी लालच की वजह रही। निसार की पत्नी और उनके दो छोटे बच्चे उसके घर लौटने का इंतजार कर रहे थे। एक मामूली आर्थिक लालच ने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया।
स्रोत/रिपोर्टिंग: द इंडियन एक्सप्रेस, “Solving Crime” सीरीज

