मथुरा में मजदूर की मौत से भड़का आक्रोश:परिजनों ने शव रखकर लगाया जाम, ठेकेदार पर लगाया लापरवाही का आरोप

मथुरा में मजदूर की मौत से भड़का आक्रोश:परिजनों ने शव रखकर लगाया जाम, ठेकेदार पर लगाया लापरवाही का आरोप

मथुरा के गोवर्धन कस्बे में स्थित राष्ट्रीय इंटर कॉलेज में निर्माण और सुंदरीकरण कार्य के दौरान हुए हादसे में मजदूर की मौत के बाद शनिवार को आक्रोश भड़क उठा। मृतक मजदूर का शव लेकर परिजन और ग्रामीण राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के मुख्य द्वार पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने शव को गेट के सामने रखकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। परिजनों ने मृतक के परिवार के भरण-पोषण के लिए उचित मुआवजा और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शुक्रवार को हुआ था हादसा गोवर्धन कस्बे में स्थित राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के मुख्य मार्ग पर निर्माण एवं सुंदरीकरण का कार्य कराया जा रहा है। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि यह कार्य मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की देखरेख में ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा था और निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। इसी कथित लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ। इलाज के दौरान हुई मौत शुक्रवार सुबह करीब दस बजे मजदूर निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। इसी दौरान कॉलेज के मुख्य द्वार की छजली अचानक भरभरा कर नीचे गिर गई। छजली के मलबे की चपेट में आने से राजस्थान के भरतपुर जिले के तालफरा गांव निवासी पंकज पुत्र रामवीर और अड़ींग निवासी लाल सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद दोनों घायलों को उपचार के लिए गोवर्धन अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए दोनों को आगरा रेफर कर दिया गया। आगरा में उपचार के दौरान पंकज की मौत हो गई। नहीं थे सुरक्षा के इंतजाम पंकज की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। शनिवार को जब उसका शव गोवर्धन पहुंचा तो परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। शव को राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के मुख्य द्वार पर रखकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर मजदूरों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता तो हादसे को रोका जा सकता था। प्रशासन पर लगाया आरोप मृतक के परिजनों ने एक और गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि हादसा सुबह करीब दस बजे हुआ, लेकिन परिवार को घटना की सूचना शाम करीब चार बजे दी गई। सूचना देने में हुई देरी को लेकर परिजनों में खासा आक्रोश है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और सूचना देने में देरी के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय करने की मांग की। पंकज अपने पीछे पत्नी, छह वर्षीय बेटा और तीन वर्षीय बेटी छोड़ गया है। परिवार का कहना है कि पंकज ही परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा था। उसकी मौत के बाद पत्नी और छोटे बच्चों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, हादसे की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की भूमिका की जांच करने तथा पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे परिजनों एवं ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया, लेकिन परिजन मुआवजे और कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।

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