Congress ने Monsoon Session के सत्रावसान में देरी पर उठाए सवाल

Congress ने Monsoon Session के सत्रावसान में देरी पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने संसद के हालिया मानसून सत्र का अब तक सत्रावसान नहीं किए जाने का हवाला देते हुए शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाने को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इस विषय पर ‘‘गोपनीयता और रहस्य’’ क्यों बना हुआ है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यह दावा भी किया कि ‘‘मोदी सरकार परिसीमन से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने से इनकार कर रही है, जबकि इस विषय पर व्यापक स्तर पर सहमति की देश को जरूरत है।’’
उन्होंने कहा कि मार्च, 2026 के मध्य से सभी विपक्षी दल लगातार इस बैठक की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस महासचिव ने सवाल किया, ‘‘भारतीय गणराज्य की बुनियाद से जुड़े इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर इतनी गोपनीयता और रहस्य क्यों?’’
रमेश ने संसद के मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किए जाने को लेकर कहा कि संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने और सत्रावसान के बीच का अंतर 29 दिन पहुंच गया है, जबकि 2015 के मानसून सत्र में यह अंतर 28 दिन था।

उन्होंने कहा कि 2026 के मानसून सत्र के मामले में यह अंतर ‘‘दिन-ब-दिन बढ़ रहा है’’ और इसके जल्द सत्रावसान की कोई स्पष्ट संभावना नहीं है। उनका कहना है कि आम तौर पर कार्यवाही स्थगित किए जाने और सत्रावसान के बीच तीन-चार दिन का अंतर होता है। रमेश ने आरोप लगाया कि स्वयंभू चाणक्य (गृह मंत्री अमित शाह) 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में अपने ‘‘अहंकार’’ के कारण सरकार को मिली ‘‘शानदार हार’’ से बुरी तरह आहत हैं और अब संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि गृह मंत्री ने उन तीन दलों में ‘‘फूट’’ डलवाई है, जिन्होंने 17 अप्रैल को विधेयक के खिलाफ मतदान किया था और अन्य ऐसे दलों पर भी अपना रुख बदलने के लिए ‘‘धमकी, दबाव और प्रलोभन’’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि सरकार के पास आवश्यक संख्या नहीं है, लेकिन ‘‘दिखावा, झांसा और डींग’’ उसे वास्तविक स्थिति समझने नहीं दे रही है। उन्होंने संसद का सत्रावसान नहीं किए जाने पर कहा कि सरकार शायद इसे विपक्ष को परेशान करने के लिए ‘‘माइंड गेम’’ और ‘‘मनोवैज्ञानिक अभियान’’ के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार जब चाहे, किसी भी उद्देश्य के लिए संसद का सत्र बुला सकती है। रमेश ने कहा कि सत्रावसान नहीं करके सरकार ‘‘सस्पेंस’’ बनाए रखने की कोशिश कर रही है और उसे लगता है कि इससे विपक्ष परेशान होगा। उन्होंने इसे ‘‘मूर्खतापूर्ण’’ करार देते हुए कहा कि सरकार ‘‘भ्रम में’’ बनी रह सकती है।

संसद का पिछला मानसून सत्र बीते 20 जुलाई को आरंभ हुआ था और इसे 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था।

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