भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को कमजोर शुरुआत की। बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा नीचे चला गया। निफ्टी भी 23,250 के स्तर से नीचे आ गया। सुबह 9:18 बजे सेंसेक्स 701.63 अंक यानी 0.94 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,200.96 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 239.05 अंक यानी 1.02 प्रतिशत टूटकर 23,237.75 पर पहुंच गया।
बाजार में गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला।
मझोली और छोटी कंपनियों के शेयर भी दबाव में
शुक्रवार को बाजार में बिकवाली काफी व्यापक रही। निफ्टी नेक्स्ट 50 में करीब 1.45 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी क्रमशः 1.28 प्रतिशत और 1.22 प्रतिशत नीचे रहे।
इससे साफ है कि निवेशकों के बीच चिंता सिर्फ कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार के बड़े हिस्से में बिकवाली देखने को मिल रही है।
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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता
शेयर बाजार में आज की गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट कच्चा तेल 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है।
लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात खर्च बढ़ सकता है।
महंगे तेल का असर महंगाई पर भी पड़ सकता है और कंपनियों की लागत बढ़ने से उनके मुनाफे पर दबाव आ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
रुपये पर भी बढ़ा दबाव
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय रुपये पर भी दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को रुपया 18 पैसे कमजोर होकर 95.70 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.52 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
रुपये की कमजोरी से कच्चे तेल जैसे डॉलर में खरीदे जाने वाले सामान भारत के लिए और महंगे हो जाते हैं। इससे आयात खर्च बढ़ सकता है और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
दुनिया के दूसरे बाजारों में भी गिरावट
भारतीय बाजार में ही नहीं, एशिया के दूसरे शेयर बाजारों में भी शुक्रवार को दबाव देखने को मिला। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 2.6 प्रतिशत और 2.7 प्रतिशत तक नीचे रहे।
अमेरिकी शेयर बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे। दुनिया भर के निवेशक बढ़ती तेल कीमतों और उससे पैदा होने वाली महंगाई की चिंता को लेकर सतर्क हैं।
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अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर भी चिंता
अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज भी तेजी से बढ़ रहा है। 10 साल की अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर शुक्रवार को बढ़कर 4.9708 प्रतिशत हो गई। यह करीब तीन साल का सबसे ऊंचा स्तर है और 5 प्रतिशत के बेहद करीब है।
जब अमेरिका में बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों की तुलना में अमेरिकी निवेश अधिक आकर्षक हो सकता है। इसका असर भारत जैसे बाजारों पर भी पड़ सकता है।
30 साल की अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर भी 5.3803 प्रतिशत तक पहुंच गई है। बढ़ती ब्याज दरें अमेरिका में कर्ज और मकान खरीदने की लागत को भी प्रभावित करती हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव भी बना हुआ है। गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 438 करोड़ रुपये की बिकवाली की।
सितंबर में अब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली करीब 1.36 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। अगर विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकालते हैं, तो बाजार की गिरावट और तेज हो सकती है।
धातु और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
आज की गिरावट में कई प्रमुख क्षेत्रों के शेयर प्रभावित हुए हैं। धातु, रियल्टी, वित्तीय सेवाएं, वाहन और उपभोक्ता टिकाऊ सामान बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में खास दबाव देखा गया।
शुरुआती कारोबार में निफ्टी मेटल सूचकांक करीब 3 प्रतिशत तक गिर गया, जबकि निफ्टी रियल्टी में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। बैंक और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में कमजोरी का असर सेंसेक्स और निफ्टी पर भी पड़ा।
सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों पर अलग चिंता
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयर आज दूसरे क्षेत्रों की तुलना में कुछ मजबूत दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इस क्षेत्र को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
अमेरिका में एच-1बी वीजा से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए नई परेशानी खड़ी कर सकता है। इन कंपनियों का बड़ा कारोबार अमेरिका से जुड़ा है। ऐसे में वहां वीजा से जुड़े किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीय कंपनियों की लागत और कारोबार पर पड़ सकता है।
आखिर क्यों गिरा शेयर बाजार?
शुक्रवार की गिरावट के पीछे कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, रुपये की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और दुनिया भर के बाजारों में बढ़ती चिंता ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
इसके अलावा अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर बढ़ती ब्याज दरों से भी निवेशकों की चिंता बढ़ी है। महंगा कच्चा तेल अगर लंबे समय तक बना रहता है तो महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि आज बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिल रही है।

