TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर विवाद, Nandigram और रेजीनगर उपचुनाव में आमने-सामने होंगे दोनों गुट

TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर विवाद, Nandigram और रेजीनगर उपचुनाव में आमने-सामने होंगे दोनों गुट

कोलकाता, नौ सितंबर तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद अब नंदीग्राम और रेजीनगर में होने वाले उपचुनावों तक पहुंच गया है। प्रतिद्वंद्वी गुट अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं जबकि निर्वाचन आयोग के पास उनके दावे अब भी लंबित हैं। निर्वाचन आयोग ने अब तक यह तय नहीं किया है कि तृणमूल कांग्रेस के मान्यता प्राप्त नाम और ‘घास पर दो फूल’ वाले चुनाव चिह्न पर किस गुट का अधिकार है।

छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए बुधवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही दोनों गुट अपनी चुनावी योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। इससे एक अनोखे मुकाबले की संभावना बन गई है जिसमें प्रतिद्वंद्वी गुट तृणमूल कांग्रेस की पहचान का दावा करते हुए वोट मांग सकते हैं। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने कहा है कि वह तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा करेगा।

साथ ही अगर नामांकन बंद होने से पहले निर्वाचन आयोग उनके दावे को मान्यता नहीं देता है तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार रहेंगे। विधानसभा में ऋतब्रत के गुट के मुख्य सचेतक अखरुज्जमां ने बुधवार को कहा, ‘‘हम उपचुनाव लड़ेंगे। नामांकन दाखिल करते समय हम बताएंगे कि हमारे उम्मीदवार तृणमूल कांग्रेस से हैं और ‘दो फूल’ वाले चुनाव चिह्न पर दावा करेंगे।

अगर निर्वाचन आयोग समय-सीमा तक हमें यह चुनाव चिह्न आवंटित नहीं करता है तो हमारे उम्मीदवार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे।’’
बागी तृणमूल गुट ने उपचुनाव को लेकर उम्मीदवारों पर फैसला करने के लिए अपने पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है। ममता बनर्जी गुट के नेता अखिल गिरी ने कहा कि पार्टी जल्द अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेगी। यह गुट दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारेगा और उसने अपनी जिला इकाइयों से नामों की मांग की है।

उम्मीद है कि उम्मीदवार स्थानीय चेहरे होंगे और उनके नामों की घोषणा 15 सितंबर को की जा सकती है। हालांकि, यह चुनावी मुकाबला तृणमूल की राजनीतिक और संगठनात्मक पहचान पर प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावों की परीक्षा भी बन रहा है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट कहता है कि निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में बनर्जी को ही पार्टी की अध्यक्ष के तौर पर मान्यता मिली हुई है।

वहीं, विरोधी गुट पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक संसाधनों पर अपने दावे को मान्यता दिलाने की कोशिश कर रहा है।

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