बाढ़ के बीच अफसर बनकर स्वास्थ्यकर्मियों से साइबर ठगी:आपदा शाखा का नायब सूबेदार बन मांगी कर्मचारियों की सूची, फिर योजनाओं का झांसा देकर मांगे पैसे

बाढ़ के बीच अफसर बनकर स्वास्थ्यकर्मियों से साइबर ठगी:आपदा शाखा का नायब सूबेदार बन मांगी कर्मचारियों की सूची, फिर योजनाओं का झांसा देकर मांगे पैसे

खगड़िया के परबत्ता में बाढ़ के बीच साइबर ठगों ने सरकारी तंत्र को निशाना बनाया है। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्यकर्मियों से प्रशासनिक अधिकारी बनकर ठगी की गई है। ठग ने खुद को खगड़िया जिला आपदा शाखा का नायब सूबेदार अशोक कुमार मीणा बताया। उसने पहले स्वास्थ्यकर्मियों के नाम और मोबाइल नंबर मांगे, फिर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर पैसे मांगे। इस मामले में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने परबत्ता थाने में शिकायत दर्ज कराई है। फोन कर खुद को बताया आपदा शाखा का सूबेदार प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर कशिश के मुताबिक, 6 सितंबर को एक मोबाइल नंबर (7828230837) से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को जिला आपदा शाखा का नायब सूबेदार बताया और बाढ़ की स्थिति में तालमेल के लिए सभी कर्मचारियों के नाम और मोबाइल नंबर मांगे। आपदा की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य केंद्र ने उसे कर्मचारियों की सूची दे दी। कर्मचारियों की सूची मिलते ही अगले दिन 7 सितंबर को उसी मोबाइल नंबर से कई कर्मियों को फोन और व्हाट्सऐप कॉल आने लगे। आरोपी ने सरकारी योजनाओं का फायदा दिलाने और दूसरी सुविधाएं देने का भरोसा देकर अलग-अलग रकम मांगी। आरोपी की बातों में आकर कुछ स्वास्थ्यकर्मियों ने बिना पहचान की पुष्टि किए ऑनलाइन पैसे भी दे दिए। ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े दिए सबूत मामले की जांच में आरोपी की पहचान को लेकर कई सवाल उठे हैं। भुगतान के लिए जिस यूपीआई आईडी (boim-421687980831@boi) का इस्तेमाल हुआ, उस पर ‘Rakesh Saikh’ नाम दिखा। वहीं, आरोपी के व्हाट्सऐप प्रोफाइल पर ‘Ashok Meena Sir ji’ नाम दिख रहा था। इससे लगता है कि ठगी के पीछे फर्जी पहचान और संगठित साइबर अपराध हो सकता है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने पुलिस को दिए आवेदन के साथ व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट, संदिग्ध मोबाइल नंबर और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े सबूत भी दिए हैं। उन्होंने पुलिस से साइबर अपराध की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर तकनीकी जांच के माध्यम से आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी की मांग की है। पुलिस अब मोबाइल नंबर, यूपीआई लेनदेन और व्हाट्सऐप गतिविधियों के आधार पर मामले की जांच में जुटी है। बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति का फायदा उठाकर स्वास्थ्यकर्मियों को निशाना बनाए जाने से सरकारी कर्मियों के बीच भी सतर्कता बढ़ गई है। प्रशासनिक अधिकारियों के नाम पर आने वाले किसी भी फोन या आर्थिक मांग की पहले आधिकारिक स्तर पर पुष्टि करने की अपील की जा रही है। खगड़िया के परबत्ता में बाढ़ के बीच साइबर ठगों ने सरकारी तंत्र को निशाना बनाया है। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्यकर्मियों से प्रशासनिक अधिकारी बनकर ठगी की गई है। ठग ने खुद को खगड़िया जिला आपदा शाखा का नायब सूबेदार अशोक कुमार मीणा बताया। उसने पहले स्वास्थ्यकर्मियों के नाम और मोबाइल नंबर मांगे, फिर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर पैसे मांगे। इस मामले में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने परबत्ता थाने में शिकायत दर्ज कराई है। फोन कर खुद को बताया आपदा शाखा का सूबेदार प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर कशिश के मुताबिक, 6 सितंबर को एक मोबाइल नंबर (7828230837) से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को जिला आपदा शाखा का नायब सूबेदार बताया और बाढ़ की स्थिति में तालमेल के लिए सभी कर्मचारियों के नाम और मोबाइल नंबर मांगे। आपदा की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य केंद्र ने उसे कर्मचारियों की सूची दे दी। कर्मचारियों की सूची मिलते ही अगले दिन 7 सितंबर को उसी मोबाइल नंबर से कई कर्मियों को फोन और व्हाट्सऐप कॉल आने लगे। आरोपी ने सरकारी योजनाओं का फायदा दिलाने और दूसरी सुविधाएं देने का भरोसा देकर अलग-अलग रकम मांगी। आरोपी की बातों में आकर कुछ स्वास्थ्यकर्मियों ने बिना पहचान की पुष्टि किए ऑनलाइन पैसे भी दे दिए। ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े दिए सबूत मामले की जांच में आरोपी की पहचान को लेकर कई सवाल उठे हैं। भुगतान के लिए जिस यूपीआई आईडी (boim-421687980831@boi) का इस्तेमाल हुआ, उस पर ‘Rakesh Saikh’ नाम दिखा। वहीं, आरोपी के व्हाट्सऐप प्रोफाइल पर ‘Ashok Meena Sir ji’ नाम दिख रहा था। इससे लगता है कि ठगी के पीछे फर्जी पहचान और संगठित साइबर अपराध हो सकता है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने पुलिस को दिए आवेदन के साथ व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट, संदिग्ध मोबाइल नंबर और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े सबूत भी दिए हैं। उन्होंने पुलिस से साइबर अपराध की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर तकनीकी जांच के माध्यम से आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी की मांग की है। पुलिस अब मोबाइल नंबर, यूपीआई लेनदेन और व्हाट्सऐप गतिविधियों के आधार पर मामले की जांच में जुटी है। बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति का फायदा उठाकर स्वास्थ्यकर्मियों को निशाना बनाए जाने से सरकारी कर्मियों के बीच भी सतर्कता बढ़ गई है। प्रशासनिक अधिकारियों के नाम पर आने वाले किसी भी फोन या आर्थिक मांग की पहले आधिकारिक स्तर पर पुष्टि करने की अपील की जा रही है।  

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