पंजाब में सरकार और मुलाजिमों की तलवारें पूरी तरह से खिंच गई हैं। मुलाजिमों ने सरकार के खिलाफ बड़े संघर्ष का ऐलान कर दिया है और 11 सितंबर तक सामूहिक छुट्टी लेकर हड़ताल पर रहने का फैसला किया है। वहीं पंजाब सरकार ने भी हड़ताल को खत्म करने के लिए सख्त रुख अपना लिया है। सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों को स्पष्ट कह दिया है कि ‘नो वर्क नो पे’ फार्मूला लागू होगा। सरकार ने अपने आदेशों में साफ कर दिया कि जो काम नहीं करेंगे, उन्हें वेतन नहीं मिलेगा। यही नहीं, सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि दफ्तरों से गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक व विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। कार्मिक विभाग के इस कड़े आदेश के बाद यूनियन नेताओं ने कर्मचारियों से पूछा कि क्या उन्हें सरकार के इस पत्र से डर लग रहा है? इस पर कर्मचारियों ने एकसुर में यूनियन नेताओं से कहा कि जब तक सरकार अपना पुराना पत्र वापस नहीं लेती और मांगों पर चर्चा के लिए मीटिंग नहीं बुलाती, तब तक हड़ताल जारी रखी जाए। कर्मचारियों के इस फैसले से 11 सितंबर तक राज्यभर के सरकारी दफ्तरों का क्लेरिकल स्टाफ धरने पर रहेगा। इससे लोगों के कामकाज रूक जाएंगे। डीसी दफ्तर, तहसील दफ्तर से लेकर सभी विभागों के दफ्तरों में कर्मचारी काम नहीं करेंगे। साझा मुलाजिम मंच ने क्यों बढ़ाई हड़ताल? जानिए… सरकार ने अपने आदेश में क्या कहा? जानिए… जनता परेशान, पर आर-पार के मूड में मुलाजिम एक तरफ जहां सरकारी दफ्तरों में ताले लटके होने और कामकाज ठप रहने से आम जनता को जाति प्रमाण पत्र, रजिस्ट्री, लाइसेंस और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार और कर्मचारियों के बीच का यह टकराव और गहराता जा रहा है। यूनियन के प्रदेश स्तरीय नेताओं का कहना है कि सरकार दमनकारी नीतियां अपनाकर कर्मचारियों की आवाज को दबाना चाहती है, लेकिन राज्य का हर मुलाजिम एकजुट है। जब तक सरकार वार्ता की मेज पर आकर मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकालती, तब तक 11 सितंबर तक सामूहिक छुट्टी का फैसला वापस नहीं होगा।

